रांची स्थित ICAR–Indian Institute of Agricultural Biotechnology (आईसीएआर-IIAB) में 9 अप्रैल 2026 को कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। Dr. M. L. Jat, सचिव, डीएआरई एवं महानिदेशक, Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर) ने संस्थान का दौरा कर अत्याधुनिक शोध अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की। इस दौरान उनके साथ Dr. D. K. Yadava सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिक और अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस अवसर पर डॉ. एम. एल. जाट ने ‘प्रिसिजन ब्रीडिंग कॉम्प्लेक्स’ का शिलान्यास किया, जो आधुनिक कृषि अनुसंधान के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुविधा के रूप में देखा जा रहा है। इस कॉम्प्लेक्स में स्पीड ब्रीडिंग फैसिलिटी, हाई-टेक ट्रांसजेनिक ग्लासहाउस, नेट हाउस और ग्रीनहाउस जैसी उन्नत संरचनाएं शामिल हैं। ये सुविधाएं वैज्ञानिकों को कम समय में बेहतर गुणवत्ता वाली, उच्च उत्पादकता वाली और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसल किस्में विकसित करने में मदद करेंगी।
डॉ. जाट ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच उन्नत अनुसंधान अवसंरचना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि इस तरह की आधुनिक सुविधाएं न केवल अनुसंधान को गति देंगी, बल्कि किसानों तक नई तकनीकों को तेजी से पहुंचाने में भी सहायक होंगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कुशल मानव संसाधन का विकास आवश्यक है, जिसके लिए अनुसंधान संस्थानों को सशक्त बनाना जरूरी है।
इस दौरान डॉ. जाट ने ‘एनिमल शेड’ सुविधा को भी राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पशु और मानव स्वास्थ्य के समन्वित अध्ययन से कृषि और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। यह सुविधा पशु-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देगी और समग्र कृषि प्रणाली को मजबूत बनाएगी।
कार्यक्रम के दौरान Dr. Sujay Rakshit, निदेशक, आईसीएआर-IIAB ने संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संस्थान लगातार वैज्ञानिक शोध को व्यावहारिक समाधान में बदलने के प्रयास कर रहा है, जिससे झारखंड सहित देशभर के किसानों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नई सुविधाओं के माध्यम से अनुसंधान की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
वहीं, डॉ. डी. के. यादव ने ‘रेन-आउट शेल्टर फैसिलिटी’ का उद्घाटन किया। यह सुविधा नियंत्रित मौसम परिस्थितियों में फसलों पर प्रयोग करने के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगी। इसके माध्यम से सूखा सहनशील फसल किस्मों के विकास, जल प्रबंधन और सटीक कृषि अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। विशेष रूप से छोटानागपुर पठार क्षेत्र के लिए यह सुविधा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जहां जलवायु परिवर्तन का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।
इस पूरे दौरे ने यह स्पष्ट कर दिया कि आईसीएआर-IIAB कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। यहां विकसित की जा रही आधुनिक सुविधाएं न केवल वैज्ञानिकों को बेहतर अनुसंधान के अवसर प्रदान करेंगी, बल्कि किसानों के लिए भी नई संभावनाएं खोलेंगी।
कुल मिलाकर, यह पहल भारत में कृषि के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्नत अनुसंधान अवसंरचना, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के माध्यम से देश की खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने और किसानों की आय बढ़ाने में यह प्रयास मील का पत्थर साबित हो सकता है।

