पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, फरीदकोट में खरीफ फसलों संबंधी किसान मेला बड़े उत्साह के साथ आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में किसानों और महिला किसानों ने भाग लिया। “खेती विविधता अपनाओ, बहुमूल्य पर्यावरण बचाओ” विषय पर आयोजित इस किसान मेले में पंजाब विधानसभा के माननीय स्पीकर सरदार कुलतार सिंह संधवां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय धान वैज्ञानिक डॉ. गुरदेव सिंह खुश, फरीदकोट के विधायक सरदार गुरदित्त सिंह सेखों, पीएयू प्रबंधकीय बोर्ड के सदस्य इंजीनियर अमरजीत सिंह ढिल्लों तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्रमुख और वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे। मेले की अध्यक्षता पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने की।
किसानों के विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए सरदार कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि पंजाब के मेहनतकश किसानों और कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हरित क्रांति लाकर देश के अन्न भंडार भरने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने खेती को दुनिया का सबसे श्रेष्ठ व्यवसाय बताते हुए कहा कि पंजाब ने गेहूं और धान उत्पादन में देश को खाद्य सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि आज का समय विज्ञान और प्रौद्योगिकी का है, इसलिए किसानों को नई कृषि तकनीकों को अपनाना होगा और पीएयू के वैज्ञानिकों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब को प्रगति की राह पर आगे बढ़ाने के लिए कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाना जरूरी है। उन्होंने किसानों को अपने बच्चों को खेती की विरासत से जोड़ने और कृषि व सहायक व्यवसायों की तकनीकी जानकारी हासिल करने की सलाह दी।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां आयोजित किसान मेले केवल तकनीकी जानकारी देने का माध्यम नहीं, बल्कि खेती संस्कृति की जीवंत पहचान भी हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसान मेलों से मिलने वाला फीडबैक विश्वविद्यालय की शोध और प्रसार सेवाओं को नई दिशा देता है। डॉ. गोसल ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसान पारंपरिक फसल चक्र से बाहर निकलकर खेती में विविधता अपनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण और कृषि की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने दालों, तिलहनों, फलों, फूलों और सब्जियों जैसी मूल्यवर्धित फसलों को अपनाने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, पशुपालन, मूल्य संवर्धन और कृषि प्रसंस्करण जैसे सहायक धंधों को भी किसानों की आय बढ़ाने का सशक्त माध्यम बताया।
डॉ. गोसल ने किसानों को कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए विदेशों की तर्ज पर एग्री-बिजनेस मॉडल अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन स्वयं करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित 94 शैक्षणिक कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्रामीण स्कूलों में दसवीं तक पढ़े किसानों के बच्चों के लिए 10 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अपने बच्चों को कृषि शिक्षा दिलाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियां वैज्ञानिक सोच के साथ खेती को और आगे बढ़ा सकें।
डॉ. गुरदेव सिंह खुश ने पीएयू द्वारा सब्जियों और फलों की फसलों पर किए जा रहे शोध की सराहना करते हुए कहा कि इससे निश्चित रूप से खेती विविधता को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों की अथक मेहनत से विकसित तकनीकों का लाभ न केवल पंजाब बल्कि पूरे देश को मिलेगा। उन्होंने देसी कपास पर हो रहे शोध को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि देसी कपास पर कीट प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है।
फरीदकोट के विधायक सरदार गुरदित्त सिंह सेखों ने कहा कि पीएयू के वैज्ञानिक कठिन परिश्रम से किसानों के लिए नई किस्में और आधुनिक उत्पादन तकनीकें विकसित कर रहे हैं। उन्होंने किसानों से विश्वविद्यालय की सिफारिशों को पूरी तरह अपनाने का आग्रह किया। वहीं इंजीनियर अमरजीत सिंह ढिल्लों ने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए कम पानी लेने वाली फसलों की खेती, रसायनों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने और फसल अवशेषों को खेत में मिलाने की अपील की।
निदेशक अनुसंधान डॉ. अजमेर सिंह ढट्ट ने किसान मेले को “ज्ञान-विज्ञान का मेला” बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अब तक 991 से अधिक फसल किस्में विकसित कर चुका है, जिनमें लगभग 250 किस्मों को राष्ट्रीय स्तर पर भी मान्यता मिल चुकी है। उन्होंने किसानों को धान की नई किस्म पीआर 133, देसी कपास की पीबीडी 88 और मक्का की एनके 7328 सहित सब्जियों और फलों की कई उन्नत किस्मों की जानकारी दी। उन्होंने जल संरक्षण, फसल अवशेष प्रबंधन और रसायनों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया।
अपर निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. तरसेम सिंह ढिल्लों ने कहा कि किसान मेले में किसानों की बड़ी भागीदारी विश्वविद्यालय की शोध और प्रसार सेवाओं पर उनके विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने किसानों को 20-21 मार्च 2026 को लुधियाना परिसर में आयोजित होने वाले दो दिवसीय किसान मेले में भी भाग लेने का निमंत्रण दिया। इस दौरान उन्होंने किसानों से विश्वविद्यालय के कृषि साहित्य को पढ़ने और “चंगी खेती” तथा “प्रोग्रेसिव फार्मिंग” जैसी पत्रिकाओं के सदस्य बनने की अपील की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. तेजिंदर सिंह रियार ने किसानों को विश्वविद्यालय के सोशल मीडिया मंचों से जुड़कर आधुनिक कृषि संबंधी नवीनतम जानकारी हासिल करने के लिए प्रेरित किया। अंत में क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, फरीदकोट के निदेशक डॉ. कुलदीप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए किसानों से विभिन्न विभागों के स्टॉल देखने तथा विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे प्रमाणित बीज, सब्जी, तिलहन, मोटे अनाज और चारे की किटें तथा फलदार पौधे खरीदने का आह्वान किया।
यह किसान मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों, वैज्ञानिकों और कृषि नीति निर्माताओं के बीच संवाद का ऐसा सशक्त मंच बनकर उभरा, जिसने स्पष्ट किया कि खेती में विविधता, वैज्ञानिक सोच और मूल्य संवर्धन ही भविष्य की समृद्ध खेती का मार्ग

