प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कृषि और किसानों के महत्व को रेखांकित करते हुए एक प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के पोषण का मूल आधार है। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब देश कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी नवाचार और किसानों की समृद्धि को लेकर नए आयाम स्थापित कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में किसानों के योगदान को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए कहा कि किसान का श्रम ही देश की खाद्य सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने लिखा कि जब किसानों का पसीना मिट्टी में मिलता है, तब वही अन्न बनकर करोड़ों लोगों के जीवन को संबल प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया संस्कृत सुभाषितम् इस प्रकार है—
“ते कृषिं च सस्यं च मनुष्या उप जीवन्ति।
कृष्टराधिरुपजीवनीयो भवति य एवं वेद॥”
इस सुभाषित का भावार्थ है कि खेती और फसल ही मानव जीवन के आधार हैं। जो व्यक्ति इस सत्य को समझता है, वही कृषि के महत्व को पहचानता है और उसी के माध्यम से समाज के भरण-पोषण तथा विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।
भारतीय संस्कृति में कृषि का विशेष स्थान
भारत को प्राचीन काल से ही कृषि प्रधान देश माना जाता रहा है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति की जड़ें कृषि से गहराई से जुड़ी हुई हैं। वैदिक साहित्य, उपनिषदों, पुराणों और अनेक प्राचीन ग्रंथों में कृषि को जीवन का आधार बताया गया है। भारतीय परंपरा में किसान को ‘अन्नदाता’ कहा जाता है, क्योंकि वह अपने परिश्रम से पूरे समाज के लिए भोजन उपलब्ध कराता है।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किया गया यह संस्कृत सुभाषित भी इसी विचारधारा को आगे बढ़ाता है कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व और सामाजिक व्यवस्था की आधारशिला है। खेतों में पैदा होने वाला अन्न केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि देश की स्थिरता, विकास और समृद्धि का आधार भी है।
किसानों का श्रम बनता है राष्ट्र की ताकत
देश की बढ़ती आबादी के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में किसानों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। विपरीत मौसम, प्राकृतिक आपदाओं, बाजार की चुनौतियों और लागत बढ़ने जैसी परिस्थितियों के बावजूद किसान लगातार उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में किसानों के इसी समर्पण और परिश्रम को सम्मान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों का पसीना ही देशवासियों के जीवन को ऊर्जा और सुरक्षा प्रदान करता है। खेतों में दिन-रात मेहनत करने वाले किसान ही देश की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखते हैं।
कृषि विकास से मजबूत होती है अर्थव्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की आर्थिक प्रगति में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत में आज भी बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। कृषि उत्पादन बढ़ने से न केवल किसानों की आय में वृद्धि होती है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है।
कृषि क्षेत्र खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्योगों को भी गति देता है। यही कारण है कि सरकार कृषि क्षेत्र में निवेश, आधुनिक तकनीक, सिंचाई सुविधाओं और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
तकनीक और नवाचार से बदल रही कृषि
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। ड्रोन तकनीक, सटीक कृषि, डिजिटल सेवाएं, मौसम आधारित सलाह, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से खेती को अधिक उत्पादक और टिकाऊ बनाने की दिशा में काम हो रहा है।
सरकार किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए भी विभिन्न कार्यक्रम चला रही है। इन प्रयासों का उद्देश्य कृषि को लाभकारी और भविष्य के लिए अधिक सक्षम बनाना है।

