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आंध्र प्रदेश के मछुआरों को मिला सुरक्षा कवच: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना से 2.84 लाख से अधिक मछुआरे होंगे लाभान्वित

Andhra Pradesh fishermen get safety cover:

Emran Khan by Emran Khan
July 30, 2026
in कृषि समाचार
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मत्स्य क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

मत्स्य क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

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देश में मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने और मछुआरों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य विभाग द्वारा संचालित प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत लागू सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना (Group Accident Insurance Scheme-GAIS) मछुआरों और मत्स्य श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच के रूप में उभर रही है। इस योजना के माध्यम से समुद्री और अंतर्देशीय दोनों प्रकार के मछुआरों को दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उनके परिवारों को कठिन समय में वित्तीय संबल मिल सके।

केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2020-21 से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना को पूरे देश में लागू कर रही है। लगभग 20,750 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य मत्स्य उत्पादन बढ़ाना, आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास करना, रोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा मछुआरों की आय में वृद्धि करना है। योजना के अंतर्गत मछुआरों के लिए सामाजिक सुरक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना संचालित की जा रही है।

आंध्र प्रदेश पहली बार योजना में हुआ शामिल

केंद्र सरकार के अनुसार, आंध्र प्रदेश ने पिछले पांच वर्षों के दौरान सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना में भाग नहीं लिया था। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार ने पहली बार इस योजना में भागीदारी सुनिश्चित की है। इसके परिणामस्वरूप राज्य के 2,84,888 मछुआरों को दुर्घटना बीमा का लाभ प्रदान किया गया है। यह कदम राज्य के मत्स्य समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब बड़ी संख्या में मछुआरे किसी भी आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान बीमा अवधि 1 जून 2026 से 31 मई 2027 तक प्रभावी रहेगी। अभी तक इस अवधि में किसी भी प्रकार के बीमा दावे का निपटान नहीं हुआ है क्योंकि योजना के अंतर्गत अब तक कोई दावा प्रस्तुत नहीं किया गया है।

क्या है सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत संचालित सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना का उद्देश्य समुद्री और अंतर्देशीय मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को दुर्घटनाओं के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाना है। इस योजना में मछुआरों के साथ-साथ मत्स्य श्रमिकों और संबंधित गतिविधियों से जुड़े अन्य पात्र लाभार्थियों को भी शामिल किया गया है।

बीमा योजना के अंतर्गत मिलने वाले प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं—

  • दुर्घटना में मृत्यु अथवा स्थायी पूर्ण विकलांगता होने पर 5 लाख रुपये की बीमा सहायता।
  • स्थायी आंशिक विकलांगता की स्थिति में 2.5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
  • दुर्घटना के बाद अस्पताल में उपचार हेतु 25 हजार रुपये तक के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति।

इन प्रावधानों का उद्देश्य दुर्घटना के कारण प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करना तथा उनके जीवनयापन को सुरक्षित बनाना है।

केंद्र और राज्य मिलकर उठाते हैं प्रीमियम का भार

सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना की एक विशेषता यह भी है कि लाभार्थियों को बीमा प्रीमियम का बोझ स्वयं नहीं उठाना पड़ता। सामान्य राज्यों के लिए बीमा प्रीमियम की राशि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 60:40 के अनुपात में साझा की जाती है। वहीं, हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है। केंद्र शासित प्रदेशों के मामले में संपूर्ण बीमा प्रीमियम का भुगतान केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।

इस व्यवस्था के कारण आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरों को बिना अतिरिक्त वित्तीय भार के बीमा सुरक्षा उपलब्ध हो पाती है।

दावा प्रक्रिया को बनाया गया अधिक सरल

केंद्र सरकार ने बीमा दावों के शीघ्र निपटान के लिए दावा प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और सरल बनाया है। मत्स्य विभाग के अनुसार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मानकीकृत दावा प्रपत्र (स्टैंडर्ड क्लेम फॉर्म) तथा आवश्यक दस्तावेजों की चेकलिस्ट निर्धारित की गई है। इससे लाभार्थियों को दावा प्रस्तुत करने में सुविधा होती है और अनावश्यक देरी कम होती है।

इसके अतिरिक्त, राज्य मत्स्य विभागों, बीमा मध्यस्थों तथा बीमा कंपनियों के साथ नियमित समन्वय बैठकें आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में लंबित मामलों की समीक्षा, दस्तावेजों की कमियों को दूर करने तथा पात्र दावों के समयबद्ध निपटान पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

दावा प्रस्तुत करने की समय सीमा

योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार दुर्घटना की तिथि से 120 दिनों के भीतर बीमा दावा प्रस्तुत करना आवश्यक है। इसके साथ ही सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित पूर्ण दावा प्रस्ताव 180 दिनों के भीतर संबंधित एजेंसी को जमा करना अनिवार्य है।

सरकार का कहना है कि समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा बैठकों और निरंतर अनुवर्ती कार्रवाई की व्यवस्था की गई है। इससे पात्र लाभार्थियों को समय पर बीमा राशि प्राप्त हो सकेगी।

मत्स्य क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना केवल बीमा सुविधा तक सीमित नहीं है। यह योजना मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, आधुनिक मत्स्य अवसंरचना विकसित करने, कोल्ड चेन, प्रसंस्करण इकाइयों, मत्स्य बंदरगाहों और मूल्य संवर्धन जैसी गतिविधियों को भी प्रोत्साहित करती है। इसके माध्यम से मछुआरों की आय बढ़ाने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने तथा भारत को वैश्विक मत्स्य उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक आपदाओं, समुद्री दुर्घटनाओं और अन्य जोखिमों का सामना करने वाले मछुआरों के लिए दुर्घटना बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं। इससे न केवल परिवारों को आर्थिक राहत मिलती है बल्कि मछुआरों में सुरक्षा की भावना भी मजबूत होती है।

राज्यसभा में दी गई जानकारी

मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश द्वारा पहली बार योजना में भागीदारी किए जाने से राज्य के लगभग 2.85 लाख मछुआरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा। साथ ही सरकार दावा प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है ताकि जरूरतमंद लाभार्थियों को बिना विलंब के बीमा सहायता प्राप्त हो सके।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत संचालित सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना देश के लाखों मछुआरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण पहल है। आंध्र प्रदेश का पहली बार इस योजना से जुड़ना राज्य के मत्स्य समुदाय के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। 2.84 लाख से अधिक मछुआरों को बीमा सुरक्षा मिलने से न केवल उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता आएगी, बल्कि यह पहल मत्स्य क्षेत्र के समग्र विकास और मछुआरों के कल्याण को भी नई गति प्रदान करेगी।

 

Tags: AgricultureFarmingIndian Agriculture
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