हरियाणा में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एडवोकेट अशोक कुमार सिरसी ने हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के चेयरमैन के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। पशुधन भवन, सेक्टर-2, पंचकूला स्थित कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कृषि, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा की उपस्थिति में अपना कार्यभार संभाला।
पदभार ग्रहण करने के बाद अशोक सिरसी ने प्रदेश के पशुपालकों, डेयरी किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा को पशुधन विकास और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों, बेहतर नस्ल विकास और पशुपालक कल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में अशोक सिरसी ने कहा कि हरियाणा पहले से ही देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में प्रति व्यक्ति दूध की औसत खपत लगभग 545 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि हरियाणा में यह आंकड़ा 1148 ग्राम प्रतिदिन के आसपास है, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और पशुधन विकास बोर्ड का लक्ष्य हरियाणा में दूध की उपलब्धता और खपत को और अधिक बढ़ाना है। इसके लिए डेयरी क्षेत्र में नई तकनीकों को अपनाने, पशुपालकों को प्रोत्साहन देने और बेहतर नस्ल के पशुओं को बढ़ावा देने पर काम किया जाएगा।
उनका मानना है कि दूध को संपूर्ण आहार के रूप में बढ़ावा देकर पोषण सुरक्षा को भी मजबूत किया जा सकता है। इसी दिशा में जागरूकता अभियान चलाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
मुर्राह भैंस और अन्य नस्लों के सुधार पर रहेगा फोकस
हरियाणा की पहचान देशभर में मुर्राह भैंस की उत्कृष्ट नस्ल के लिए की जाती है। अशोक सिरसी ने कहा कि प्रदेश में पशुओं की नस्ल सुधार योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
उन्होंने संकेत दिया कि वैश्विक स्तर पर उपलब्ध उन्नत तकनीकों और अनुभवों का अध्ययन कर पशुधन क्षेत्र में नवाचारों को अपनाया जाएगा। विशेष रूप से गाय और भैंसों की उत्पादकता बढ़ाने तथा उनकी आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार के लिए नई योजनाएं तैयार की जाएंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नस्ल वाले पशु न केवल अधिक दूध देते हैं बल्कि पशुपालकों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए नस्ल सुधार कार्यक्रम भविष्य में राज्य की पशुपालन नीति का प्रमुख आधार बन सकता है।
किसानों और पशुपालकों को मिलेगा योजनाओं का लाभ
नवनियुक्त चेयरमैन ने कहा कि बोर्ड की प्राथमिकता प्रदेश के किसानों और पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना होगी। इसके लिए विभाग की सभी योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पशुपालन क्षेत्र में कार्यरत छोटे और मध्यम स्तर के पशुपालकों को तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के अवसर बढ़ेंगे।
हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका
हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड राज्य में पशुधन की गुणवत्ता सुधारने, पशुपालकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कार्य करता है।
बोर्ड का मुख्य लक्ष्य पशुओं के आनुवंशिक संसाधनों में सुधार करना और विशेष रूप से मुर्राह नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा देना है। इसके अलावा उच्च गुणवत्ता वाली प्रजनन सामग्री तैयार करना और उसे किसानों तक पहुंचाना भी बोर्ड की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
बोर्ड पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी संचालन करता है। इससे पशुपालकों को नई तकनीकों और बेहतर प्रबंधन प्रणालियों की जानकारी मिलती है।
आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना
पशुधन विकास के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए बोर्ड प्रशिक्षण सुविधाओं के आधुनिकीकरण और उन्नयन पर भी काम कर रहा है।
पशुधन उत्पादन, दुग्ध प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, विपणन और अनुसंधान से जुड़ी नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा। इससे पशुपालन क्षेत्र को अधिक लाभकारी और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादन लागत कम की जा सकती है और पशुओं की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
पशुपालकों के लिए चल रही प्रमुख योजनाएं
हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करता है, जिनका सीधा लाभ पशुपालकों को मिलता है।
इनमें मोबाइल कृत्रिम गर्भाधान (एआई) सेवाएं प्रमुख हैं, जिनके माध्यम से पशुपालकों को उनके घर के निकट ही प्रजनन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अलावा उच्च गुणवत्ता वाले वीर्य का उत्पादन और वितरण भी किया जाता है ताकि पशुओं की नस्ल में सुधार हो सके।
बोर्ड उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले पशुओं की पहचान करने और उन्हें प्रोत्साहन देने का कार्य भी करता है। चयनित पशुओं को बीमा सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है।
महिला सशक्तिकरण और जागरूकता कार्यक्रमों पर जोर
बोर्ड द्वारा महिला पशुपालकों के लिए विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं। इन शिविरों में पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, पशु स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी प्रदान की जाती है।
ग्रामीण महिलाओं की पशुपालन क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार किए जाने की संभावना है। इससे महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा और परिवारों की आय में वृद्धि होगी।
पशु स्वास्थ्य और बांझपन प्रबंधन पर विशेष ध्यान
पशुधन क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में पशु स्वास्थ्य और प्रजनन संबंधी समस्याएं शामिल हैं। इसे देखते हुए बोर्ड नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच और बांझपन प्रबंधन शिविर आयोजित करता है।
इन शिविरों के माध्यम से पशुओं का उपचार, टीकाकरण और प्रजनन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाता है। इससे पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है और पशुपालकों को आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
पशुपालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प
पदभार ग्रहण करने के बाद अशोक सिरसी ने कहा कि वे पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे। उनका लक्ष्य हरियाणा को पशुधन विकास, दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाए रखना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पशुपालकों को आधुनिक तकनीक, बेहतर नस्ल, गुणवत्तापूर्ण सेवाएं और प्रभावी योजनाओं का लाभ मिलता है तो हरियाणा न केवल दुग्ध उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकता है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर सकता है।

