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Home कृषि समाचार

असम की जीआई-टैग तेजपुर लीची ने दुबई में बनाई पहचान, एपीईडीए ने पहली निर्यात खेप को दी मंजूरी

Assam's GI-tag Tejpur litchi made in Dubai identified, APEDA approves first export consignment

Emran Khan by Emran Khan
June 10, 2026
in कृषि समाचार
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असम की जीआई-टैग तेजपुर लीची ने दुबई में बनाई पहचान, एपीईडीए ने पहली निर्यात खेप को दी मंजूरी
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असम की प्रसिद्ध जीआई-टैग (भौगोलिक संकेतक) प्राप्त तेजपुर लीची ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए) ने 7 जून 2026 को असम से दुबई के लिए तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप भेजने में सफलतापूर्वक सहायता प्रदान की। यह कदम उत्तर-पूर्व भारत के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

दुबई के लिए भेजी गई इस पहली खेप में एक मीट्रिक टन जीआई-टैग प्राप्त तेजपुर लीची शामिल थी। यह उपलब्धि न केवल असम के किसानों के लिए नए अवसर लेकर आई है, बल्कि भारत के विशिष्ट कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है।

अपनी मिठास और सुगंध के लिए विश्व प्रसिद्ध है तेजपुर लीची

तेजपुर लीची असम के सबसे प्रतिष्ठित बागवानी उत्पादों में गिनी जाती है। यह अपनी प्राकृतिक मिठास, आकर्षक चमकीले लाल रंग, विशिष्ट सुगंध और बेहतरीन स्वाद के लिए देश और विदेश में प्रसिद्ध है।

इस क्षेत्र में बॉम्बेया, बिलाती, इलायची, पियाजी और साही जैसी कई प्रमुख किस्मों की खेती की जाती है। इन किस्मों की विशेष गुणवत्ता और स्वाद के कारण बाजार में इनकी अलग पहचान है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजपुर की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां लीची को विशिष्ट गुण प्रदान करती हैं, जो इसे अन्य क्षेत्रों की लीची से अलग बनाती हैं।

जीआई टैग से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान

भौगोलिक संकेतक (GI) टैग मिलने के बाद तेजपुर लीची की पहचान और बाजार मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जीआई टैग किसी उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति और गुणवत्ता को प्रमाणित करता है, जिससे वैश्विक बाजार में उसकी विश्वसनीयता और मांग बढ़ती है।

विशेषज्ञों के अनुसार जीआई टैग ने तेजपुर लीची को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच एक प्रीमियम उत्पाद के रूप में स्थापित करने में मदद की है। यही कारण है कि दुबई जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

किसानों को मिला बेहतर मूल्य

इस निर्यात पहल का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को मिला है। एपीईडीए के अनुसार, निर्यात आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े उत्पादकों को घरेलू बाजार की मौजूदा कीमतों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक मूल्य प्राप्त हुआ।

इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है और उन्हें अपनी उपज के लिए नए एवं लाभकारी बाजार उपलब्ध हुए हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात का दायरा बढ़ता है तो भविष्य में किसानों को और अधिक आर्थिक लाभ मिल सकता है।

यह पहल किसानों को पारंपरिक बाजारों से आगे बढ़कर वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल होने के लिए भी प्रेरित करेगी।

औपचारिक रूप से रवाना की गई पहली खेप

दुबई भेजी गई इस ऐतिहासिक खेप को एक विशेष कार्यक्रम के दौरान औपचारिक रूप से रवाना किया गया। इस अवसर पर तेजपुर विधानसभा के विधायक पृथ्वीराज रावा, असम सरकार की कृषि उत्पादन आयुक्त अरुणा राजोरिया, एपीईडीए के अध्यक्ष अभिषेक देव, सोणितपुर के जिला आयुक्त आनंद कुमार दास तथा डीएमआर ग्रीन वैली एग्रो फ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में किसानों, निर्यातकों, सरकारी अधिकारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया। सभी ने इस उपलब्धि को असम और उत्तर-पूर्व भारत के कृषि क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया।

उत्तर-पूर्व के कृषि निर्यात को मिलेगा बढ़ावा

एपीईडीए लंबे समय से उत्तर-पूर्वी राज्यों के कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। इसके तहत बुनियादी ढांचे के विकास, गुणवत्ता प्रमाणन, क्षमता निर्माण, निर्यात-उन्मुख उत्पादन तकनीकों और बाजार संपर्क कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

संस्था किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), राज्य सरकारों, निर्यातकों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर क्षेत्र विशेष के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का काम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-पूर्व भारत में जैविक और विशिष्ट कृषि उत्पादों की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें वैश्विक बाजारों में बड़ी मांग मिल सकती है।

निर्यात बढ़ने से मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

तेजपुर लीची के सफल निर्यात से क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। निर्यात आधारित कृषि मॉडल किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी मदद करता है।

इसके अलावा प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स जैसी गतिविधियों में भी नए अवसर पैदा होंगे। इससे कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़े हजारों लोगों को लाभ मिलने की संभावना है।

एपीईडीए की भूमिका बनी महत्वपूर्ण

एपीईडीए भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली प्रमुख संस्था है। इसकी स्थापना वर्ष 1985 में एपीईडीए अधिनियम के तहत की गई थी। संस्था किसानों, निर्यातकों और एफपीओ को गुणवत्ता सुधार, प्रमाणन, अवसंरचना विकास, बाजार संवर्धन और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग प्रदान करती है।

पिछले कुछ वर्षों में एपीईडीए ने भारत के जीआई-टैग उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आम, चाय, मसाले, चावल और अन्य कृषि उत्पादों के बाद अब तेजपुर लीची का निर्यात इस दिशा में एक नई सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

वैश्विक बाजार में बढ़ेगी असम की पहचान

दुबई को तेजपुर लीची की पहली निर्यात खेप केवल एक व्यापारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि असम के किसानों और उत्तर-पूर्व भारत की कृषि क्षमता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में निर्यात की मात्रा बढ़ने से तेजपुर लीची वैश्विक फलों के बाजार में एक प्रीमियम भारतीय ब्रांड के रूप में उभर सकती है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि असम और पूरे उत्तर-पूर्व क्षेत्र की आर्थिक प्रगति को भी नई गति मिलेगी।

भारत सरकार और एपीईडीए के निरंतर प्रयासों से अब उत्तर-पूर्व भारत के कृषि उत्पाद विश्व बाजार में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

 

Tags: AgricultureFarminglitchi farming
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