अल्पसंख्यक भाषाओं के संरक्षण और उन्हें डिजिटल युग में सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ‘गुरुमुखी भाषा संरक्षण और डिजिटल एआई मॉडल विकास’ विषय पर ‘भाषिणी’ संचालन/सेवा कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 17 अप्रैल को दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज में आयोजित हुई, जिसमें भाषा और तकनीक के संगम पर गहन चर्चा की गई।
गुरुमुखी भाषा के डिजिटल भविष्य पर जोर
कार्यशाला में गुरुमुखी लिपि के महत्व और उसकी डिजिटल दुनिया में भूमिका को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। गुरुमुखी, पंजाबी भाषा और सिख परंपराओं की आधारशिला है, जिसका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई आधारित प्लेटफॉर्म पर इस भाषा को प्रभावी रूप से शामिल करने के लिए व्यवस्थित डिजिटलीकरण, डेटा संग्रह और भाषाई सत्यापन आवश्यक है।
‘भाषिणी’ के जरिए बहुभाषी समावेशन
इस पहल का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत ‘डिजिटल इंडिया भाषिणी’ प्रभाग द्वारा किया गया। ‘भाषिणी’ एक राष्ट्रीय मंच है, जिसका उद्देश्य एआई आधारित भाषा प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश में बहुभाषी डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देना है।
कार्यशाला के दौरान ‘भाषिणी’ टीम ने टेक्स्ट-टू-टेक्स्ट अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन (आवाज़ पहचान), ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और बहुभाषी डिजिटल टूल्स का लाइव प्रदर्शन किया। इन तकनीकों का उपयोग शासन, शिक्षा और डिजिटल सेवाओं में किस तरह किया जा सकता है, इसके व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए।
शैक्षणिक संस्थानों की अहम भूमिका
एसजीटीबी खालसा कॉलेज ने इस पहल में एक प्रमुख ज्ञान साझेदार के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कॉलेज ने गुरुमुखी भाषा की सटीकता और सांस्कृतिक संदर्भ को बनाए रखने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता प्रदान की।
कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. गुरमोहिंदर सिंह ने कहा कि ‘भाषिणी’ भारतीय भाषाओं के बीच डिजिटल खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की प्रतिबद्धता भी जताई।
डेटा और समुदाय आधारित एआई मॉडल पर फोकस
कार्यशाला में गुरुमुखी भाषा के लिए एआई मॉडल विकसित करने के लिए डेटा संग्रह, सत्यापन ढांचा और समुदाय की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया। टेक्स्ट कॉर्पोरा, ऑडियो रिकॉर्डिंग और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके साथ ही ‘भाषादान’ प्लेटफॉर्म की जानकारी दी गई, जो भाषा डेटा संग्रह और सत्यापन में समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करता है। यह पहल स्थानीय भाषाओं को सशक्त बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
डिजिटल भारत के विजन को मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘भाषिणी’ जैसी पहलें भारत को एक समावेशी डिजिटल समाज की ओर ले जा रही हैं, जहां हर भाषा और समुदाय को समान अवसर मिल सके। यह प्लेटफॉर्म पहले ही 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को सेवाएं दे रहा है और 36 से अधिक भाषाओं में तकनीकी समाधान उपलब्ध करा रहा है।
कुल मिलाकर, यह कार्यशाला न केवल गुरुमुखी भाषा के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कैसे एआई और तकनीक के माध्यम से भारत की भाषाई विविधता को सहेजते हुए उसे भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है।

