विधानसभा में बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि यह कानून सभी नागरिकों को एक समान अधिकार देने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने दावा किया कि इससे समाज में लैंगिक समानता मजबूत होगी और महिलाओं को न्याय मिलेगा। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह बिल विभिन्न समुदायों की पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।
गुजरात UCC बिल 2026 अब राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू होने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा। इसके लागू होने के बाद राज्य में शादी, तलाक, और पैतृक संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में अलग-अलग धर्मों के कानूनों की जगह एक समान कानून लागू होगा।
इस बिल की प्रमुख विशेषताओं में सभी धर्मों के लिए विवाह, तलाक और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में समान नियम लागू करना शामिल है। सबसे अहम प्रावधान यह है कि बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का अधिकार मिलेगा, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा, लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। ऐसे संबंधों का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा और नियमों का पालन न करने पर सजा का प्रावधान किया गया है। बिल के मुताबिक, लिव-इन रजिस्ट्रेशन न कराने पर तीन महीने तक की सजा हो सकती है। वहीं, नाबालिग के साथ लिव-इन संबंध बनाने पर POCSO Act के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बिल में जबरन शादी और बहुविवाह को गंभीर अपराध मानते हुए सात साल तक की सजा का प्रावधान रखा गया है। साथ ही, कोर्ट के बाहर तलाक को अवैध घोषित किया गया है और ऐसा करने पर तीन साल तक की सजा हो सकती है।
हालांकि, सरकार ने कुछ समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ छूट भी दी है। उदाहरण के तौर पर, कजिन मैरिज जैसी परंपराओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कुल मिलाकर, गुजरात में UCC बिल का पारित होना न केवल राज्य बल्कि पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे रहा है। जहां एक ओर इसे समानता और आधुनिकता की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या यह कानून सभी समुदायों के हितों को संतुलित कर पाएगा या नहीं। आने वाले समय में इस कानून के प्रभाव और इसके सामाजिक-राजनीतिक परिणामों पर देशभर की नजरें टिकी रहेंगी।

