केंद्र सरकार ने किसानों को फसल सीजन के दौरान उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति व्यवस्था को और अधिक मजबूत और सुव्यवस्थित किया है। राज्यसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री Anupriya Patel ने बताया कि सरकार ने उर्वरकों की ढुलाई, भंडारण और वितरण को लेकर कई अहम कदम उठाए हैं।
मंत्री ने बताया कि हर फसल सीजन से पहले कृषि विभाग राज्यों के साथ मिलकर राज्यवार और माहवार उर्वरक आवश्यकता का आकलन करता है। इसके आधार पर उर्वरक विभाग द्वारा मासिक आपूर्ति योजना तैयार की जाती है और पूरे देश में इसकी लगातार निगरानी की जाती है, ताकि कहीं भी कमी न हो।
उर्वरकों की आपूर्ति पर नजर रखने के लिए Integrated Fertilizer Management System (IFMS) नामक ऑनलाइन प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। इसके माध्यम से सब्सिडी वाले उर्वरकों की आवाजाही पर रियल-टाइम निगरानी रखी जाती है। साथ ही, राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय पर ऑर्डर देकर निर्माताओं और आयातकों के साथ समन्वय बनाए रखें।
रेल परिवहन को सुचारू बनाने के लिए रेल मंत्रालय के साथ नियमित बैठकें की जा रही हैं, ताकि उर्वरकों की ढुलाई में कोई बाधा न आए। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को पूरा करने के लिए अग्रिम आयात की व्यवस्था भी की गई है।
सरकार के अनुसार, वर्तमान रबी सीजन 2025-26 में यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता देशभर में पर्याप्त बनी हुई है। किसानों को यूरिया 242 रुपये प्रति 45 किलोग्राम बैग की निर्धारित अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) पर उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि शेष लागत सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में वहन की जाती है।
इसके अलावा Nutrient Based Subsidy Scheme (NBS) के तहत फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों पर भी सब्सिडी दी जा रही है, जिससे किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक मिल सके। सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों पर भी नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर सब्सिडी दरों में संशोधन करती है।
सरकार ने डीएपी और टीएसपी जैसे उर्वरकों पर अतिरिक्त राहत देते हुए ₹3500 प्रति मीट्रिक टन तक विशेष सब्सिडी का प्रावधान भी किया है, जिससे किसानों पर लागत का बोझ कम हो सके।
उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों को जबरन जोड़ने (टैगिंग) के मुद्दे पर मंत्री ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह पूरी तरह प्रतिबंधित है। Essential Commodities Act 1955 और उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत ऐसी अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। राज्य सरकारों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएं।
सरकार ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों के साथ किसी भी प्रकार की अनावश्यक वस्तु जोड़ने को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा और कंपनियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार के इन प्रयासों से देशभर में उर्वरकों की सुचारू आपूर्ति, उचित कीमत और पारदर्शिता सुनिश्चित हो रही है। यह कदम किसानों को राहत देने के साथ-साथ कृषि उत्पादन को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

