भारत की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में 9 जून से ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों का महत्वपूर्ण सम्मेलन शुरू होने जा रहा है। यह आयोजन कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, कृषि नवाचार और छोटे किसानों के सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा का मंच बनेगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान सम्मेलन की विस्तृत जानकारी साझा की।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और इसी क्रम में इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन विशेष महत्व रखता है। इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक इतने व्यापक मंत्री स्तरीय स्वरूप में आयोजित की जा रही है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2006 में शुरू हुए ब्रिक्स समूह ने आज वैश्विक स्तर पर एक प्रभावशाली आर्थिक और रणनीतिक मंच का रूप ले लिया है। वर्तमान में इसमें 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश शामिल हैं। कृषि क्षेत्र के संदर्भ में इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया की लगभग 42 प्रतिशत कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि जोतें और करीब 42 प्रतिशत खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों में ही केंद्रित है। ऐसे में इस मंच पर लिए गए निर्णय और सहयोगी प्रयास वैश्विक खाद्य सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं।
उन्होंने बताया कि भारत इससे पहले भी वर्ष 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है। वर्ष 2016 में भारत की पहल पर ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच की स्थापना की गई थी, जिसने सदस्य देशों के बीच कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा दिया। इस बार भी भारत कृषि क्षेत्र में सहयोग के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है।
कृषि मंत्री ने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान कृषि कार्य समूह के अंतर्गत अब तक आठ महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में खाद्य सुरक्षा, मत्स्य पालन, पशुपालन, कृषि व्यापार, तकनीकी नवाचार और किसानों की आय बढ़ाने जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की सभी नीतियों और पहलों के केंद्र में छोटे और सीमांत किसान हैं।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि छोटे किसानों की अपनी विशिष्ट चुनौतियां हैं। उनकी जोतें छोटी होती हैं, संसाधन सीमित होते हैं और आधुनिक तकनीकों तक उनकी पहुंच अपेक्षाकृत कम होती है। इसलिए यह आवश्यक है कि कृषि अनुसंधान का लाभ सीधे इन किसानों तक पहुंचे, उनकी बाजारों तक पहुंच आसान बने और कृषि ऋण का प्रवाह बढ़े। सम्मेलन में इन विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा।
इस वर्ष के सम्मेलन में चार प्रमुख विषयों पर विशेष फोकस रखा गया है। इनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और आजीविका; कृषि व्यापार और सहयोग; जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि; तथा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार एवं साझेदारी को मजबूत बनाना शामिल है। इन विषयों के माध्यम से सदस्य देश कृषि क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर साझा रणनीति विकसित करने का प्रयास करेंगे।
जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया भर के किसान मौसम की अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पुनर्योजी कृषि, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, सतत कृषि पद्धतियां और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी आधुनिक तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छोटे किसानों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर ही कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से 12 जून को “लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा” विषय पर एक विशेष मंत्री स्तरीय संवाद आयोजित किया जाएगा। इस संवाद में कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका को मजबूत बनाने के उपायों पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम के अनुसार 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 12 और 13 जून को कृषि मंत्रियों का मुख्य सम्मेलन होगा। इस दौरान खाद्य हानि को कम करने, कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि नवाचार तथा किसानों के अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
सम्मेलन का एक विशेष आकर्षण “ब्रिक्स वाटिका” होगी। भारत की प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण की परंपरा को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से सदस्य देशों के मंत्री और प्रतिनिधि सामूहिक वृक्षारोपण करेंगे। इस पहल के तहत तैयार की जाने वाली ब्रिक्स वाटिका पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता का प्रतीक बनेगी।
विदेशी प्रतिनिधियों को भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने के लिए विशेष भ्रमण कार्यक्रम भी तैयार किया गया है। मेहमानों को इंदौर के ऐतिहासिक राजवाड़ा, प्रसिद्ध छप्पन दुकान और ऐतिहासिक नगर मांडू का भ्रमण कराया जाएगा। इससे उन्हें भारत की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और पर्यटन क्षमता को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह मंच दुनिया भर के करोड़ों छोटे किसानों की आवाज को वैश्विक एजेंडे में प्रमुखता से स्थान दिलाने में भी सहायक सिद्ध होगा। भारत की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन कृषि नवाचार, सतत विकास और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में नए सहयोगात्मक प्रयासों की मजबूत नींव रख सकता है।

