Punjab Agricultural University (पीएयू) ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और समग्र कल्याण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘साथ – Student Assistance and Therapeutic Help’ पहल की शुरुआत की है। यह पहल Tele-MANAS (पंजाब सेल) और Institute of Mental Health के सहयोग से शुरू की गई है।
इस संयुक्त कार्यक्रम के तहत विश्वविद्यालय और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मिलकर छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ को सुलभ, गोपनीय और समय पर काउंसलिंग सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत के दौरान कुलपति Satbir Singh Gosal ने विश्वास जताया कि यह पहल परिसर में एक सहयोगी, सुरक्षित और सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद करेगी, जहां छात्र बिना झिझक अपनी मानसिक समस्याओं पर सहायता ले सकें।
24×7 मानसिक स्वास्थ्य सहायता
टेली-मानस के पंजाब चैप्टर के प्रभारी Sanmay Gupta ने बताया कि यह सेवा भारत सरकार द्वारा समर्थित एक 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन है, जो संकट की स्थिति में सहायता, काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। ‘साथ’ कार्यक्रम के माध्यम से पीएयू और टेली-मानस मिलकर शिक्षकों, हॉस्टल वार्डनों और छात्र मेंटर्स को प्रशिक्षित करेंगे, ताकि वे छात्रों में तनाव या भावनात्मक परेशानी के शुरुआती संकेत पहचान सकें।
छात्रों को मिलेगा समग्र सहयोग
डायरेक्टर स्टूडेंट्स वेलफेयर Nirmal Jaura के अनुसार, यह पहल छात्रों, फैकल्टी और स्टाफ के लिए टेली-काउंसलिंग, भावनात्मक समर्थन और रेफरल सेवाएं उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा, कार्यक्रम के तहत जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और तनाव प्रबंधन की क्षमता बढ़ेगी।
वहीं, नोडल अधिकारी Deepika Vig ने बताया कि यह पहल देश में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है और Supreme Court of India के दिशा-निर्देशों के साथ भी मेल खाती है।
क्यों है यह पहल खास?
- छात्रों के लिए मुफ्त और गोपनीय काउंसलिंग सुविधा
- 24×7 हेल्पलाइन के जरिए तुरंत सहायता
- तनाव, चिंता और अवसाद जैसे मुद्दों पर पेशेवर मार्गदर्शन
- पूरे कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर
इस पहल के शुभारंभ के दौरान विश्वविद्यालय के डीन, निदेशक, शिक्षक, हॉस्टल वार्डन और बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
‘साथ’ पहल पीएयू के उस प्रयास को दर्शाती है, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ छात्रों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

