18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री Jitendra Singh ने प्रशासनिक सुधारों, डिजिटल शासन और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत तेजी से “प्रशासन-केंद्रित” से “नागरिक-केंद्रित” शासन की ओर बढ़ रहा है।
अपने संबोधन में उन्होंने प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कारों की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इन पुरस्कारों के लिए आवेदन संख्या 2023 में 1,216 से बढ़कर 2024 में 1,588 और 2025 में 2,035 हो गई है। यह वृद्धि देश के 750 से अधिक जिलों में प्रतिस्पर्धा और नवाचार की बढ़ती भावना को दर्शाती है।
डॉ. सिंह ने क्षमता निर्माण के क्षेत्र में iGOT Karmayogi प्लेटफॉर्म की उपलब्धियों को साझा करते हुए कहा कि इस पर 88 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़ चुके हैं और 2,000 से अधिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। यह पहल सिविल सेवकों को आधुनिक चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
शिकायत निवारण प्रणाली CPGRAMS में हुए सुधारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 2014 में जहां सालाना लगभग 2 लाख शिकायतों का निपटारा होता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 25-30 लाख हो गई है। इनमें से 95 प्रतिशत से अधिक मामलों का समाधान किया जा चुका है और औसत निपटान समय 60 दिनों से घटकर लगभग 12 दिन रह गया है। उन्होंने कहा कि शिकायतों की बढ़ती संख्या असंतोष नहीं, बल्कि प्रणाली में बढ़ते भरोसे का संकेत है।
पेंशन सुधारों के तहत डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC) की सफलता का जिक्र करते हुए मंत्री ने बताया कि केवल 2024 में 40 लाख से अधिक पेंशनभोगियों ने फेस रिकग्निशन आधारित प्रमाण पत्र का उपयोग किया, जबकि कुल उपयोग 10 करोड़ से अधिक हो चुका है। यह डिजिटल समावेशन और तकनीकी नवाचार का बड़ा उदाहरण है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रशासनिक मूल्यांकन प्रणाली में बदलाव की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब सिविल सेवकों के प्रदर्शन का आकलन व्यक्तिगत प्रोफाइल के बजाय प्रमुख सरकारी कार्यक्रमों के परिणामों के आधार पर किया जा रहा है, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी।
उन्होंने शासन में संरचनात्मक सुधारों का जिक्र करते हुए बताया कि सरकार ने लगभग 2,000 पुराने नियमों को समाप्त किया है और कई भर्ती प्रक्रियाओं में इंटरव्यू खत्म कर पारदर्शिता बढ़ाई है। इसके साथ ही सिविल सेवा दिवस को एक ज्ञान-आधारित मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।
भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने “मिशन कर्मयोगी” और “कर्मयोगी प्रारंभ” जैसी पहलों के विस्तार की बात कही, जिनका उद्देश्य सिविल सेवकों को नई चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के प्रशासनिक मॉडल में वैश्विक स्तर पर रुचि बढ़ रही है और कई देश भारतीय प्रणालियों का अध्ययन कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में C. P. Radhakrishnan उपस्थित रहे। कार्यक्रम में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और नीति निर्माताओं की उपस्थिति ने इसे एक महत्वपूर्ण मंच बना दिया।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुधारों का लक्ष्य अधिकतम पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित करना है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंच सके।

