भारत सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, आयातित ईंधन और रसायनों पर निर्भरता कम करने तथा स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकियों (Clean Coal Technologies) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन (National Coal Gasification Mission) को तेज गति से आगे बढ़ाया है। सरकार ने वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन (MT) कोयला गैसीकरण क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार वित्तीय प्रोत्साहन, कोयला लिंकेज और नीतिगत सुधारों के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश को बढ़ावा दे रही है।
केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि देश में वर्तमान में लगभग 22.6 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) कोयला गैसीकरण क्षमता या तो परिचालन में है अथवा विभिन्न चरणों में विकसित की जा रही है। सरकार का मानना है कि आगामी वर्षों में शुरू होने वाली नई परियोजनाएं भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण बढ़त देंगी।
2030 तक 100 MT क्षमता का लक्ष्य
राष्ट्रीय कोयला गैसीकरण मिशन का उद्देश्य केवल कोयले का उपयोग बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे अधिक स्वच्छ, आधुनिक और मूल्यवर्धित तरीके से उपयोग में लाना है। सरकार ने 2030 तक 100 मिलियन टन वार्षिक गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
वर्तमान में लगभग 22.6 MTPA क्षमता निम्न प्रमुख परियोजनाओं के माध्यम से विकसित हो रही है—
- जिंदल स्टील लिमिटेड (JSL) – लगभग 8 MTPA (परिचालन)
- तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (TFL) – लगभग 2.6 MTPA (कार्यान्वयनाधीन)
- 24 जनवरी 2024 की ₹8,500 करोड़ प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत स्वीकृत 8 परियोजनाएं – लगभग 12 MTPA (कार्यान्वयनाधीन)
इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारत की गैसीकरण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
₹37,500 करोड़ की नई योजना से मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
सरकार ने 13 मई 2026 को ₹37,500 करोड़ के वित्तीय परिव्यय वाली नई योजना को मंजूरी दी। यह योजना विशेष रूप से सतही कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 75 मिलियन टन कोयले का गैसीकरण संभव होगा। इससे 2030 तक 100 MT गैसीकरण क्षमता प्राप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत में स्वच्छ ऊर्जा आधारित औद्योगिक विकास को नई दिशा दे सकती है।
₹8,500 करोड़ योजना के तहत आठ परियोजनाएं
24 जनवरी 2024 को स्वीकृत ₹8,500 करोड़ की कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत आठ प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी।
सरकार के अनुसार—
- जिंदल स्टील लिमिटेड की एक परियोजना का वित्तीय समापन हो चुका है।
- परियोजना का निर्माण कार्य जारी है।
- कुल पांच परियोजनाओं का शिलान्यास किया जा चुका है।
- शेष परियोजनाएं विभिन्न स्वीकृति और कार्यान्वयन चरणों में हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से भारत में गैसीकरण आधारित औद्योगिक उत्पादन को नई गति मिलेगी।
निवेशकों के लिए आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन
कोयला गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने आकर्षक वित्तीय सहायता की व्यवस्था की है।
₹8,500 करोड़ योजना के तहत परियोजनाओं को पूंजीगत व्यय का 15 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
वहीं ₹37,500 करोड़ योजना के अंतर्गत संयंत्र और मशीनरी की पात्र लागत का 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराया जाएगा।
इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश को बढ़ाना और नई परियोजनाओं की स्थापना को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना है।
Coal Linkage Policy में बड़े बदलाव
सरकार ने कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए कोयले की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु Coal Linkage Policy में भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
इसके तहत—
- “कोयला गैसीकरण के लिए सिंथेटिक गैस उत्पादन” नाम से नया उप-क्षेत्र बनाया गया है।
- इस क्षेत्र को विद्युत क्षेत्र के समान न्यूनतम मूल्य पर कोयला उपलब्ध कराया जाएगा।
- कोयला लिंकेज की अवधि बढ़ाकर 30 वर्ष कर दी गई है।
- जिन परियोजनाओं के पास पहले से कोयला खदान आवंटित है, वे अतिरिक्त आवश्यकता होने पर अतिरिक्त कोयला लिंकेज भी प्राप्त कर सकेंगी।
इन सुधारों से परियोजनाओं को दीर्घकालिक ईंधन सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।
नीतिगत सुधारों से मिलेगा उद्योग को लाभ
सरकार ने केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि नीतिगत स्तर पर भी कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।
गैसीकरण के लिए उपयोग किए जाने वाले कोयले पर राजस्व हिस्सेदारी में 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई है।
इसके अतिरिक्त—
- भूमिगत कोयला गैसीकरण (Underground Coal Gasification – UCG) के लिए नया ढांचा और दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
- UCG परियोजनाओं के लिए पायलट कार्यक्रमों की अनुमति दी गई है।
- भूमिगत गैसीकरण हेतु कोयला ब्लॉकों की नीलामी में न्यूनतम राजस्व हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दी गई है।
- प्रदर्शन बैंक गारंटी सहित अग्रिम भुगतान में भी महत्वपूर्ण छूट प्रदान की गई है।
इन सुधारों से निवेशकों का विश्वास बढ़ने और नई परियोजनाओं के तेजी से शुरू होने की संभावना है।
BRICS देशों के साथ बढ़ा सहयोग
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान कोयला मंत्रालय ने 24 जून 2026 को स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी (Clean Coal Technology) पर विशेष बैठक आयोजित की।
इस कार्यक्रम में कोयला गैसीकरण पर विशेष चर्चा हुई और BRICS देशों के बीच तकनीकी अनुभव, अनुसंधान तथा बेहतर प्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया गया। इससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और तकनीकी नवाचार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
Coal Gasification से क्या होंगे लाभ?
कोयला गैसीकरण तकनीक के माध्यम से घरेलू कोयले का अधिक स्वच्छ एवं मूल्यवर्धित उपयोग किया जा सकता है।
इस प्रक्रिया से निम्न उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं—
- सिंथेटिक प्राकृतिक गैस (SNG)
- हाइड्रोजन
- उर्वरक
- औद्योगिक रसायन
- अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद
इससे भारत को महंगे आयातित ईंधन, उर्वरकों और रसायनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा, निवेश आकर्षित होगा, नए रोजगार सृजित होंगे और घरेलू संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित होगा।
₹1.5 लाख करोड़ तक आयात प्रतिस्थापन की संभावना
सरकार के अनुसार, ₹8,500 करोड़ और ₹37,500 करोड़ की योजनाओं के साथ-साथ तालचर फर्टिलाइजर्स लिमिटेड की परियोजना के पूरी तरह चालू होने के बाद भारत में कोयला एवं लिग्नाइट गैसीकरण के माध्यम से लगभग ₹1.5 लाख करोड़ प्रतिवर्ष का आयात प्रतिस्थापन संभव होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा क्षेत्र, रासायनिक उद्योग और उर्वरक उत्पादन में आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय Coal Gasification Mission भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक दीर्घकालिक परिवर्तनकारी पहल के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन गैसीकरण क्षमता का लक्ष्य, ₹37,500 करोड़ और ₹8,500 करोड़ की प्रोत्साहन योजनाएं, बेहतर Coal Linkage Policy, निवेश-अनुकूल नीतिगत सुधार और Clean Coal Technology पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलकर भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।
यदि सभी प्रस्तावित परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो भारत न केवल आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सतत आर्थिक प्रगति के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित कर सकेगा।
