देश के किसानों को नकली, मिलावटी और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार नए और सख्त Seed Act की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्तावित कानून को अंतिम रूप देने से पहले सरकार किसानों और किसान संगठनों की राय लेने जा रही है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 10 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में देशभर के प्रमुख किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक करेंगे। यह बैठक अपराह्न 4 बजे कृषि भवन, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी।
बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित नए Seed Law के मसौदे में किसानों के जमीनी अनुभव, समस्याओं और सुझावों को शामिल करना है, ताकि देश में बीजों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी कानूनी व्यवस्था तैयार की जा सके।
नकली बीजों से किसानों को होने वाले नुकसान पर सरकार का फोकस
कृषि उत्पादन की पूरी प्रक्रिया में बीज सबसे महत्वपूर्ण inputs में से एक है। यदि किसान को खराब गुणवत्ता, नकली या मिलावटी बीज मिल जाता है तो उसका पूरा Crop Cycle प्रभावित हो सकता है। कई मामलों में किसान को बुआई के बाद फसल खराब होने पर दोबारा बुआई करनी पड़ती है, जिससे उसकी लागत बढ़ जाती है और आय पर सीधा असर पड़ता है।
इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार प्रस्तावित नए Seed Act में बीजों की Quality Control और Supply Chain Transparency को मजबूत करने पर जोर दे रही है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिसमें किसानों को बाजार में उपलब्ध बीजों की गुणवत्ता को लेकर अधिक भरोसा हो और यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार कंपनियों, कारोबारियों या अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
भारी जुर्माने और जेल के प्रावधान प्रस्तावित
प्रस्तावित नए Seed Act के तहत नकली, मिलावटी या घटिया बीज बेचने वालों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।
इनमें Heavy Penalty और Imprisonment जैसे प्रावधान शामिल किए जाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य Seed Fraud और अनियमित कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना है।
केंद्र सरकार का मानना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कानून में ऐसे Strict Enforcement Mechanisms भी होने चाहिए, जिनसे नियमों का उल्लंघन करने वालों पर वास्तविक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
किसानों से सीधे ली जाएगी राय
10 सितंबर की बैठक को इस लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों से किसान संगठनों के प्रतिनिधि सीधे कृषि मंत्री के सामने अपनी बात रखेंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा आयोजित इस संवाद में प्रस्तावित Seed Law के विभिन्न पहलुओं पर किसानों के अनुभव और सुझाव लिए जाएंगे। सरकार का प्रयास है कि नया कानून केवल policy-level considerations तक सीमित न रहे, बल्कि किसानों की वास्तविक समस्याओं और field-level challenges को भी ध्यान में रखे।
इससे Farmer-Centric Seed Policy तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Kashmir से Kanyakumari तक किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से किसान संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन (विभिन्न घटक), अखिल भारतीय किसान समन्वय समिति (AIKCC), किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गांव किसान उन्नयन और Society for Independent Farmers Association (SIFA) सहित कई संगठन शामिल हैं।
इसके अलावा अलग-अलग राज्यों के क्षेत्रीय किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी बैठक में अपनी बात रखेंगे।
इनमें कर्नाटक रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघ, महाराष्ट्र का शेतकारी संगठन, गुजरात का खेदुत समाज, राजस्थान और बिहार की राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन, तमिलनाडु का व्यवसाइगल संघम, झारखंड का प्रगतिशील कृषि मंच तथा केरल के कोट्टायम का कृषक संगठन शामिल हैं।
इस व्यापक भागीदारी से विभिन्न कृषि क्षेत्रों में किसानों के सामने आने वाली Seed Quality से जुड़ी अलग-अलग समस्याओं को सरकार के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
Seed Quality के साथ Traceability पर भी जोर
प्रस्तावित कानून का एक महत्वपूर्ण पहलू Seed Traceability System को मजबूत करना है। किसानों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उनके द्वारा खरीदा गया बीज किस स्रोत से आया है और उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी है।
एक प्रभावी Traceability System से Seed Supply Chain में transparency बढ़ाई जा सकती है। इससे बीज उत्पादन से लेकर processing, distribution और retail sale तक विभिन्न स्तरों पर निगरानी को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सरकार की मंशा ऐसी व्यवस्था विकसित करने की है जिसमें बीज की Quality और उसकी supply chain को अधिक पारदर्शी बनाया जा सके।
Traditional Seeds के अधिकारों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
प्रस्तावित Seed Act में किसानों के पारंपरिक बीजों से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है।
भारत में किसान लंबे समय से स्थानीय और पारंपरिक बीजों का संरक्षण एवं उपयोग करते रहे हैं। ऐसे में आधुनिक Seed Regulation के साथ Farmers’ Rights और Traditional Seed Systems के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
किसानों से होने वाला आगामी संवाद इसी तरह के विभिन्न मुद्दों पर सरकार को जमीनी feedback उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
मोदी सरकार के Farmer-Centric Approach पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में सरकार कृषि क्षेत्र से जुड़ी नीतियों को किसानों के साथ संवाद और उनकी भागीदारी के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रस्तावित Seed Act पर किसान संगठनों के साथ यह बैठक इसी approach का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य किसानों को बेहतर quality inputs उपलब्ध कराने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में transparency और accountability को मजबूत करना है।
आगामी संसद सत्र से पहले महत्वपूर्ण पहल
प्रस्तावित Seed Act को लेकर 10 सितंबर की बैठक ऐसे समय हो रही है जब आगामी Parliament Session से पहले इस मुद्दे पर व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है।
किसान संगठनों से मिलने वाले सुझाव प्रस्तावित कानून के अंतिम मसौदे को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि कानून के अंतिम प्रावधान और उनका स्वरूप आगे की legislative process के बाद ही स्पष्ट होगा।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नया Seed Act?
किसानों के लिए बीज केवल एक कृषि input नहीं बल्कि पूरी फसल की शुरुआत है। बीज की खराब गुणवत्ता का प्रभाव उत्पादन, लागत और किसान की आय पर पड़ सकता है।
यदि नए कानून के माध्यम से Seed Certification, Quality Testing, Traceability, Licensing और Enforcement की व्यवस्था को मजबूत किया जाता है, तो किसानों को बेहतर quality seeds उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही नकली या घटिया बीजों के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई होने से किसानों के आर्थिक नुकसान को कम करने की संभावना भी बढ़ेगी।
10 सितंबर की बैठक पर रहेगी किसानों की नजर
नई दिल्ली के कृषि भवन में होने वाली यह बैठक देश के Seed Sector के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एक ओर सरकार नकली और घटिया बीजों के खिलाफ सख्त legal framework तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर किसान संगठनों को इस प्रक्रिया में अपनी बात रखने का अवसर दिया जा रहा है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि किसान संगठन प्रस्तावित Seed Act में किन बदलावों की मांग करते हैं और सरकार उनके सुझावों को अंतिम कानून में किस तरह शामिल करती है।
यदि प्रस्तावित कानून में किसानों की Seed Quality, Farmers’ Rights, Transparency और Compensation से जुड़ी चिंताओं का प्रभावी समाधान शामिल होता है, तो यह देश के कृषि क्षेत्र में बीजों की गुणवत्ता और किसान हितों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

