भारत सरकार ने डेयरी और पशुधन (Livestock) क्षेत्र को अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने बताया कि Milk Processing Infrastructure, Livestock Development, Fodder Availability और Market Access को मजबूत करने के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है। इन पहलों का उद्देश्य दुग्ध उत्पादकों की आय बढ़ाना, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और देश में गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry & Dairying) को ऐसी कोई रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है, जिससे यह संकेत मिले कि दूध प्रसंस्करण या कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सरकार के अनुसार, दूध खरीद की कीमतें वर्तमान बाजार परिस्थितियों के आधार पर डेयरी सहकारी समितियां और निजी डेयरी कंपनियां तय करती हैं।
डेयरी अवसंरचना को मजबूत करने पर सरकार का फोकस
देशभर में डेयरी सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए सरकार दो प्रमुख योजनाओं का संचालन कर रही है—
- National Programme for Dairy Development (NPDD)
- Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF)
इन योजनाओं के माध्यम से दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, आधुनिक डेयरी सुविधाओं और ग्रामीण डेयरी नेटवर्क को सुदृढ़ किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया को मिली नई सुविधाएं
सरकार ने बताया कि NPDD के तहत मध्य प्रदेश के भिंड और दतिया जिलों को दुग्ध खरीद एवं संग्रहण व्यवस्था मजबूत करने के लिए शामिल किया गया है।
इस योजना के अंतर्गत—
- भिंड जिले में 3,000 लीटर क्षमता वाला Bulk Milk Cooler (BMC) स्थापित किया जाएगा।
- भिंड की 34 Dairy Cooperative Societies (DCS) और दतिया की 14 DCS में दूध संग्रहण अवसंरचना विकसित की जाएगी।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि AHIDF के अंतर्गत इन दोनों जिलों से अभी तक कोई परियोजना प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
पशुपालकों के लिए चारा उत्पादन पर विशेष जोर
पशुओं के चारे और आहार की बढ़ती लागत को देखते हुए सरकार National Livestock Mission (NLM) के माध्यम से बड़े स्तर पर काम कर रही है।
सरकार के अनुसार मिशन के तहत अब तक—
- 1.62 लाख टन Fodder Seed का उत्पादन किया गया।
- 204 Feed एवं Fodder Enterprises को स्वीकृति दी गई।
- 19 राज्यों में 100 Fodder-based Farmer Producer Organisations (FPOs) का गठन किया गया।
इन पहलों का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर चारा उपलब्ध कराना, पशुपालकों की उत्पादन लागत कम करना और ग्रामीण क्षेत्रों में चारा आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है।
दिल्ली में दूध की बढ़ती मांग के लिए पर्याप्त व्यवस्था
लोकसभा में सरकार ने बताया कि National Dairy Plan (Phase-I) के तहत किए गए अध्ययन के अनुसार वर्ष 2019 में दिल्ली की दूध मांग लगभग 111 लाख लीटर प्रतिदिन थी, जो वर्ष 2030 तक बढ़कर लगभग 173.5 लाख लीटर प्रतिदिन होने का अनुमान है।
सरकार के अनुसार वर्तमान में दिल्ली की दूध आपूर्ति निम्न संस्थानों द्वारा सफलतापूर्वक पूरी की जा रही है—
- Mother Dairy
- GCMMF (Amul)
- Delhi Milk Scheme (DMS)
- COMFED
- Karnataka Milk Federation (KMF)
- विभिन्न Private Dairy Companies
इन सभी संस्थानों द्वारा FSSAI के खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि फिलहाल अतिरिक्त हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि वर्तमान आपूर्ति व्यवस्था मांग को पूरा करने में सक्षम है।
पशुधन विकास राज्यों का विषय
सरकार ने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में स्पष्ट किया कि संविधान के अनुसार Animal Husbandry राज्य का विषय है। इसलिए पूरे देश के लिए कोई अलग National Livestock Development Law बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
हालांकि केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करती रहेगी।
कई राष्ट्रीय योजनाओं से मिल रहा किसानों को लाभ
सरकार वर्तमान में कई प्रमुख योजनाओं के माध्यम से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को समर्थन दे रही है, जिनमें प्रमुख हैं—
- National Gokul Mission (RGM)
- National Livestock Mission (NLM)
- Livestock Health & Disease Control Programme (LHDCP)
- National Programme for Dairy Development (NPDD)
- Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF)
इन योजनाओं के जरिए नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य, डेयरी अवसंरचना, दुग्ध प्रसंस्करण और किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
एक दशक में रिकॉर्ड वृद्धि
सरकार ने पिछले दस वर्षों में डेयरी और पशुधन क्षेत्र की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार—
- Milk Production वर्ष 2014-15 के 146.31 Million Tonnes से बढ़कर 2024-25 में 248.87 Million Tonnes हो गया, जो लगभग 70 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।
- इसी अवधि में Egg Production 78.48 Billion से बढ़कर 149.11 Billion हो गया, यानी लगभग 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ये आंकड़े भारत के डेयरी एवं पोल्ट्री सेक्टर की तेज़ प्रगति को दर्शाते हैं।
डिजिटल Livestock Database से मिलेगा निर्यात को बढ़ावा
सरकार ने बताया कि National Dairy Development Board (NDDB) के सहयोग से भारत पशुधन डेटाबेस विकसित किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक पशु को 12 अंकों की Unique Tag ID दी जा रही है, जिससे पशुधन की पहचान, ट्रेसबिलिटी और स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटल प्रबंधन संभव होगा।
सरकार का मानना है कि इससे भारतीय डेयरी एवं पशुधन उत्पादों के Export Opportunities बढ़ेंगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता मजबूत होगी।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर
सरकार ने दोहराया कि उसका लक्ष्य केवल दूध उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि Value Chain Development, आधुनिक डेयरी अवसंरचना, बेहतर पशु स्वास्थ्य, उच्च उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना है। डेयरी सेक्टर में बढ़ता निवेश, आधुनिक तकनीकों का उपयोग और पशुधन विकास की योजनाएं ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देंगी। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा और कृषि आधारित आय को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जिससे भारत वैश्विक डेयरी उद्योग में अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत कर सकेगा।

