केंद्र सरकार देश की ग्राम पंचायतों में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए लगातार बड़े कदम उठा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण स्तर पर डिजिटल शासन को प्रभावी बनाया जाए और नागरिकों को बेहतर ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी दिशा में ग्राम पंचायतों को फाइबर-टू-द-होम (FTTH) और निजी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के माध्यम से इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है।
दूरसंचार विभाग द्वारा संचालित भारतनेट परियोजना के तहत देशभर की ग्राम पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से कनेक्ट किया जा रहा है, जिससे उच्च गति की ब्रॉडबैंड सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश की कुल 2.69 लाख ग्राम पंचायतों में से 2.18 लाख से अधिक पंचायतों को सेवा के लिए तैयार किया जा चुका है, जो ग्रामीण डिजिटल ढांचे में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान भारतनेट परियोजना पर कुल ₹22,001.30 करोड़ खर्च किए गए हैं। इस दौरान विभिन्न राज्यों में बड़े स्तर पर फाइबर नेटवर्क बिछाया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंच तेजी से बढ़ी है।
राज्यवार आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे बड़े राज्यों में हजारों ग्राम पंचायतें इंटरनेट सेवाओं से जुड़ चुकी हैं। इससे न केवल ग्रामीण प्रशासन को डिजिटल रूप मिला है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी योजनाओं की पहुंच भी आसान हुई है।
सरकार का मानना है कि मजबूत डिजिटल अवसंरचना के जरिए ग्रामीण भारत को सशक्त बनाया जा सकता है। भारतनेट जैसी योजनाएं न केवल इंटरनेट पहुंच बढ़ा रही हैं, बल्कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

