भारत में तेजी से बढ़ते डिजिटल उपयोग के बीच ग्रामीण महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘e-SafeHER’ नामक एक महत्वाकांक्षी साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस पहल का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में देशभर की 10 लाख महिलाओं को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और आत्मविश्वास के साथ भाग लेने के लिए तैयार करना है।
यह कार्यक्रम Ministry of Electronics and Information Technology के सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता (ISEA) कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित किया जा रहा है। इसे Centre for Development of Advanced Computing, हैदराबाद और Reliance Foundation के सहयोग से लागू किया जाएगा।
ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल सुरक्षा की नई पहल
‘e-SafeHER’ का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण भारत की महिलाओं को साइबर खतरों के प्रति जागरूक बनाना और उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना है। आज के समय में जब महिलाएं तेजी से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही हैं—चाहे वह वित्तीय लेन-देन हो, सरकारी सेवाओं का लाभ हो या आजीविका के अवसर—ऐसे में साइबर सुरक्षा का ज्ञान अत्यंत आवश्यक हो गया है।
यह पहल एक लैंगिक-संवेदनशील और समुदाय-आधारित मॉडल पर आधारित है, जो डिजिटल समावेशन के साथ-साथ सुरक्षा को भी प्राथमिकता देती है।
‘साइबर सखी’ मॉडल से जमीनी स्तर पर बदलाव
इस कार्यक्रम के तहत “साइबर सखी” मॉडल को अपनाया जाएगा, जिसमें प्रशिक्षित महिलाएं अपने ही समुदाय में अन्य महिलाओं को साइबर सुरक्षा के बारे में जागरूक करेंगी। यह सहकर्मी-आधारित (peer-led) मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से प्रभावी साबित हो सकता है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर विश्वास और समझ अधिक होती है।
रिलायंस फाउंडेशन अपने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण नेटवर्क के माध्यम से इस पहल को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम करेगा।
तकनीकी सामग्री और प्रशिक्षण में C-DAC की भूमिका
Centre for Development of Advanced Computing इस कार्यक्रम के तहत साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण सामग्री के विकास, स्थानीयकरण और निरंतर अपडेट की जिम्मेदारी निभाएगा। इसमें बहुभाषी कंटेंट, ऑडियो-विजुअल मॉड्यूल और आधुनिक शिक्षण तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं के लिए सीखना आसान और प्रभावी बने।
चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में विस्तार
इस पहल की शुरुआत मध्य प्रदेश और ओडिशा से की जाएगी, जहां पहले चरण में साइबर सखियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसे पूरे देश में विस्तार दिया जाएगा, ताकि वर्ष 2029 तक 10 लाख महिलाओं तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
डिजिटल आत्मविश्वास और सुरक्षा दोनों पर फोकस
‘e-SafeHER’ का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं है, बल्कि व्यवहार में बदलाव लाना भी है। इस पहल के माध्यम से महिलाओं में निम्नलिखित सुधार देखने को मिलेंगे:
- साइबर खतरों के प्रति बेहतर समझ
- ऑनलाइन लेन-देन में आत्मविश्वास
- सुरक्षित डिजिटल आदतों का विकास
- डिजिटल सेवाओं का प्रभावी उपयोग
सरकार और निजी क्षेत्र का मजबूत सहयोग
इस कार्यक्रम में सरकार और निजी क्षेत्र के बीच मजबूत साझेदारी देखने को मिलती है। Ministry of Electronics and Information Technology का राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा ढांचा, C-DAC की तकनीकी विशेषज्ञता और रिलायंस फाउंडेशन का जमीनी अनुभव—इन तीनों का संयोजन इस पहल को मजबूत आधार प्रदान करता है।
नेतृत्व की प्रतिक्रिया
इस अवसर पर एमईआईटीवाई के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि ‘e-SafeHER’ देश के “साइबर सुरक्षित भारत” लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वहीं Isha Ambani ने इस कार्यक्रम को ग्रामीण महिलाओं के लिए डिजिटल सुरक्षा और सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
‘e-SafeHER’ पहल डिजिटल भारत के विजन को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक सशक्त कदम है। यह न केवल महिलाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि उन्हें सुरक्षित डिजिटल नागरिक बनने में भी मदद करेगी।
आने वाले समय में यह कार्यक्रम देशभर में साइबर सुरक्षा जागरूकता का एक मजबूत मॉडल बन सकता है, जो न केवल महिलाओं बल्कि पूरे समाज को डिजिटल खतरों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

