भारत में मानव रहित विमानन (ड्रोन) और उन्नत एरियल मोबिलिटी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत Technology Development Board ने गुरुग्राम स्थित KC Aviation Private Limited के साथ एक अहम समझौता किया है। यह समझौता “बूस्ट इलेक्ट्रिक जंप टेक-ऑफ (BE-JTO)” परियोजना के लिए किया गया है, जो उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन तकनीक पर आधारित है।
यह परियोजना भारत–यूके सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत चलाई जा रही है, जिसमें यूके की कंपनी ARC Aerosystems Limited भी साझेदार है। इस पहल के माध्यम से भारत में अगली पीढ़ी की ड्रोन और हल्के विमानों की तकनीक को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
हाइब्रिड प्रणोदन से बदलेगा टेक-ऑफ सिस्टम
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य हाइब्रिड प्रणोदन आधारित जंप टेक-ऑफ (JTO) प्रणाली विकसित करना है। यह तकनीक पारंपरिक टेक-ऑफ सिस्टम की तुलना में कम दूरी में या लगभग वर्टिकल (ऊर्ध्वाधर) टेक-ऑफ करने की क्षमता प्रदान करेगी।
इससे छोटे विमानों और ड्रोन को सीमित स्थानों, दुर्गम इलाकों और आपात परिस्थितियों में भी आसानी से उड़ान भरने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से यह तकनीक उन क्षेत्रों के लिए उपयोगी होगी जहां रनवे की सुविधा सीमित या उपलब्ध नहीं होती।
आपदा प्रबंधन से लेकर लॉजिस्टिक्स तक व्यापक उपयोग
BE-JTO तकनीक के विकसित होने के बाद इसके कई महत्वपूर्ण उपयोग सामने आएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- आपदा राहत और बचाव अभियान
- मेडिकल इमरजेंसी और एयर एम्बुलेंस सेवाएं
- दुर्गम क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स सप्लाई
- निगरानी और सुरक्षा ऑपरेशन
- क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार
यह तकनीक भारत के ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
उत्तर भारत में बनेगी अत्याधुनिक परीक्षण सुविधा
इस परियोजना के तहत उत्तर भारत में एक समर्पित परीक्षण बेंच सुविधा (Test Bench Facility) स्थापित की जाएगी। यह सुविधा रोटरक्राफ्ट प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण और सत्यापन के लिए उपयोग की जाएगी।
यह न केवल केसी एविएशन की तकनीक को विकसित करने में मदद करेगी, बल्कि देशभर के अन्य स्टार्टअप्स और डेवलपर्स को भी परीक्षण सेवाएं उपलब्ध कराएगी। इससे भारत में एयरोस्पेस नवाचार का एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार होगा।
स्टार्टअप्स को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन
KC Aviation Private Limited एक उभरती हुई एयरोस्पेस कंपनी है, जो छोटे विमानों और विशेष विमानन समाधानों के डिजाइन और विकास पर काम कर रही है। इस परियोजना के जरिए कंपनी को अपनी तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में परखने और उसे व्यावसायिक स्तर पर विकसित करने का अवसर मिलेगा।
यह पहल भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्नत विमानन तकनीकों में घरेलू नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बढ़ेगी तकनीकी क्षमता
Technology Development Board के सचिव राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक अनुसंधान कार्यक्रम अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत–यूके साझेदारी के तहत यह परियोजना न केवल तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगी, बल्कि भारत को उन्नत एरियल मोबिलिटी और मानव रहित विमानन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद करेगी।
सतत और कुशल विमानन की दिशा में कदम
हाइब्रिड प्रणोदन तकनीक पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और अधिक कुशल एवं पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करने में सक्षम है। यह परियोजना भारत को सतत (sustainable) विमानन तकनीकों की दिशा में आगे बढ़ाने में भी सहायक होगी।
यह पहल भारत के विमानन और ड्रोन सेक्टर के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। उन्नत हाइब्रिड प्रणोदन, जंप टेक-ऑफ तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ, भारत न केवल अपनी तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य की एरियल मोबिलिटी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेगा।
आने वाले समय में इस तरह की परियोजनाएं देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर भारत की स्थिति को और मजबूत करेंगी।

