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बरसात में फसलों को बचाने के लिए किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन, धान-मा‍क्का-मिर्च समेत सब्जियों पर फोकस

Fiza by Fiza
July 15, 2025
in कृषि समाचार
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बरसात में फसलों को बचाने के लिए किसानों के लिए जरूरी गाइडलाइन, धान-मा‍क्का-मिर्च समेत सब्जियों पर फोकस
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देशभर में मॉनसून का असर दिखने लगा है। खासकर महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लगातार हो रही तेज बारिश से किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और कई जगहों पर दोबारा बुवाई की नौबत आ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा ने किसानों के लिए एक अहम एडवाइजरी जारी की है। इसमें धान, मक्का, सब्जियों और चारे की फसलों को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं ताकि मौजूदा बरसाती हालात में किसानों को कम नुकसान हो और पैदावार पर भी असर न पड़े।

धान की रोपाई के लिए यही सही समय:
पूसा की सलाह है कि जिन किसानों की धान की नर्सरी 20-25 दिन की हो चुकी है, वे तैयार खेतों में तुरंत रोपाई शुरू करें। रोपाई करते समय पंक्ति से पंक्ति की दूरी 20 सेमी और पौध से पौध की दूरी 10 सेमी रखें। उर्वरकों की सही मात्रा का इस्तेमाल करें:

  • नाइट्रोजन – 100 किग्रा/हेक्टेयर
  • फास्फोरस – 60 किग्रा/हेक्टेयर
  • पोटाश – 40 किग्रा/हेक्टेयर
  • जिंक सल्फेट – 25 किग्रा/हेक्टेयर

जहां खेतों में पानी भरा हो वहां नील हरित शैवाल (Blue-Green Algae) का एक पैकेट प्रति एकड़ डालें ताकि मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा बढ़े। खेतों की मेंड़ों को मजबूत बनाकर अधिक से अधिक बारिश का पानी संग्रहित करें।

मक्का किसान अपनाएं ये उपाय:

मक्का उगाने वाले किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसल की बुवाई मेड़ों पर करें। हाइब्रिड किस्में जैसे AH-421 और AH-58 या उन्नत किस्में पूसा कंपोजिट-3 और पूसा कंपोजिट-4 का ही चयन करें और बीज प्रमाणित स्रोत से खरीदें।

  • बीज की मात्रा: 20 किग्रा/हेक्टेयर
  • कतार की दूरी: 60-75 सेमी
  • पौधों की दूरी: 18-25 सेमी

खरपतवार नियंत्रण के लिए 1 से 1.5 किग्रा एट्राजिन को 800 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें और खेत में जलनिकासी की उचित व्यवस्था रखें।

चारे और लोबिया की बुवाई का उत्तम समय

यह समय चारे के लिए ज्वार और लोबिया की बुवाई के लिए उत्तम है। पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 जैसी किस्में चुनी जा सकती हैं। ज्वार के लिए बीज मात्रा 40 किग्रा प्रति हेक्टेयर रखी जाए।

मिर्च, बैंगन और फूलगोभी की नर्सरी पर ध्यान दें

किसानों को सलाह दी गई है कि वे मिर्च, बैंगन और सितंबर वाली फूलगोभी की नर्सरी के लिए नाइलॉन जाली और छायादार नेट का उपयोग करें ताकि कीटों से बचाव हो सके।

  • बीजों का केप्टान (2 ग्राम/किग्रा बीज) से उपचार करें।
  • जल निकासी की व्यवस्था सुदृढ़ रखें।
  • यदि नर्सरी तैयार है तो जल्द ही रोपाई की तैयारी करें।

सब्जियों की बुवाई और किस्मों का चयन
बरसात के इस मौसम में कद्दूवर्गीय सब्जियों जैसे लौकी, करेला, सीताफल, तुरई और खीरा की बुवाई मेड़ों पर करें। साथ ही बेलों को मचान पर चढ़ाएं। पूसा की उन्नत किस्में जैसे पूसा नवीन (लौकी), पूसा विशेष (करेला), पूसा चिकनी धारीदार (तुरई), पूसा बरखा (खीरा) आदि की खेती करें।

मिर्च के खेत में करें ये उपाय
मिर्च की फसल में यदि कोई पौधा वायरस से संक्रमित है तो उसे तुरंत उखाड़कर जमीन में गाड़ दें। साफ मौसम में इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मि.ली./लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। नए बाग लगाते समय प्रमाणित स्रोत से पौध खरीदें।

खरपतवार नियंत्रण जरूरी
खरीफ की सभी फसलों में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करें। इससे न केवल खरपतवारों से फसल को बचाया जा सकता है बल्कि पानी की बचत भी होती है और जड़ों का बेहतर विकास होता है।

 

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