पश्चिम एशिया में जारी लॉजिस्टिक्स बाधाओं के बीच भारतीय निर्यातकों को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने निर्यात प्रोत्साहन मिशन के तहत ‘RELIEF’ (रेज़िलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन) योजना को मंजूरी दी है। इस योजना के लिए 497 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य निर्यातकों को बढ़ती लागत और अनिश्चितताओं से राहत देना है।
यह पहल विशेष रूप से उन निर्यातकों के लिए अहम मानी जा रही है, जो हाल के समय में पश्चिम एशिया क्षेत्र में उत्पन्न लॉजिस्टिक्स व्यवधानों के कारण प्रभावित हुए हैं। सरकार ने इस योजना के माध्यम से निर्यात गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने और निर्यातकों के विश्वास को मजबूत करने पर जोर दिया है।
RELIEF योजना के तहत पहला बड़ा प्रावधान उन निर्यातकों के लिए है, जिन्होंने पहले से Export Credit Guarantee Corporation (ईसीजीसी) का क्रेडिट बीमा कवर लिया हुआ है। ऐसे निर्यातकों को 14 फरवरी 2026 से 15 मार्च 2026 के बीच की पात्र अवधि के लिए मौजूदा कवर के अतिरिक्त 100 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज दिया जाएगा। इससे उन्हें बिना किसी अतिरिक्त लागत के अधिक सुरक्षा मिलेगी।
दूसरे प्रावधान के तहत 16 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक निर्यात की योजना बना रहे निर्यातकों को ईसीजीसी कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस दौरान सरकार के समर्थन से उन्हें मौजूदा कवर के अतिरिक्त 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज मिल सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लॉजिस्टिक्स में अनिश्चितताओं के बावजूद निर्यात का प्रवाह बाधित न हो।
तीसरा प्रावधान विशेष रूप से एमएसएमई निर्यातकों के लिए राहत लेकर आया है। ऐसे छोटे निर्यातक, जिन्होंने 14 फरवरी से 15 मार्च 2026 के दौरान ईसीजीसी बीमा नहीं लिया, लेकिन उन्हें बढ़े हुए मालभाड़ा और बीमा शुल्क का सामना करना पड़ा, उन्हें आंशिक वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस योजना के तहत पात्र एमएसएमई निर्यातकों को अधिकतम 50 प्रतिशत तक लागत की प्रतिपूर्ति मिलेगी, जिसकी सीमा प्रति निर्यातक 50 लाख रुपये तय की गई है।
सरकार का यह कदम एमएसएमई क्षेत्र के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन वैश्विक संकटों के दौरान सबसे अधिक प्रभावित भी होता है। RELIEF योजना के जरिए छोटे निर्यातकों को तत्काल राहत देने और उन्हें प्रतिस्पर्धा में बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
इसके साथ ही सरकार ने 2025–26 से 2030–31 तक के लिए निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) को भी मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है, खासकर एमएसएमई क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए। यह मिशन दो प्रमुख स्तंभों—‘निर्यात प्रोत्साहन’ और ‘निर्यात दिशा’—के तहत संचालित होगा।
‘निर्यात प्रोत्साहन’ के तहत व्यापार वित्त तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए ब्याज सब्सिडी, निर्यात ऋण गारंटी, फैक्टरिंग और ई-कॉमर्स निर्यातकों को वित्तीय सहायता दी जाएगी। वहीं ‘निर्यात दिशा’ के माध्यम से गुणवत्ता सुधार, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और बाजार पहुंच जैसे क्षेत्रों में सहयोग प्रदान किया जाएगा।
कुल मिलाकर, RELIEF योजना और निर्यात प्रोत्साहन मिशन मिलकर भारतीय निर्यात क्षेत्र को मौजूदा चुनौतियों से उबारने और भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।

