संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की अपील पर गुरुवार को देशभर में किसानों ने जिला मुख्यालयों पर बड़ी संख्या में जुटकर अपनी आवाज बुलंद की। इस दौरान किसानों Farmers protest ने राष्ट्रपति के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें खेती-किसानी से जुड़ी चार प्रमुख मांगों को तत्काल प्रभाव से लागू करने की अपील की गई। किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याएं लंबित हैं और अब सरकार को इन पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
ज्ञापन में किसानों ने राष्ट्रपति से अपेक्षा जताई है कि वे केंद्र सरकार को निर्देश दें, ताकि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जा सके। इस देशव्यापी अभियान के तहत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में किसानों की भारी भागीदारी देखने को मिली। कई स्थानों पर किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया।
किसानों की पहली और सबसे प्रमुख मांग रबी सीजन की फसलों, खासकर गेहूं और सरसों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित खरीद को लेकर है। किसानों ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों ने खरीद प्रक्रिया को जटिल और अव्यावहारिक बना दिया है। गेट पास के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर प्लेट अनिवार्य करना और उसकी फोटो अपलोड करने जैसे नियमों को किसानों ने परेशान करने वाला बताया है। उनका कहना है कि इन प्रक्रियाओं से मंडियों के बाहर लंबा जाम लगने की आशंका है, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होगी। किसानों ने इन नियमों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
दूसरी बड़ी मांग आलू किसानों से जुड़ी है। हाल के दिनों में आलू के दामों में भारी गिरावट के कारण किसानों को अपनी लागत भी नहीं मिल पा रही है। इस स्थिति ने कई किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है। पंजाब और उत्तर प्रदेश में कुछ किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं का हवाला देते हुए किसानों ने सरकार से तत्काल राहत पैकेज की मांग की है। साथ ही, आलू की उचित मूल्य पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई गई है।
तीसरे मुद्दे के रूप में किसानों ने भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस समझौते में खेती, डेयरी और पोल्ट्री सेक्टर को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। किसानों को डर है कि इससे विदेशी उत्पादों का आयात बढ़ेगा, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान होगा। उन्होंने अमेरिका से कृषि और खाद्य उत्पादों के आयात पर पूर्ण रोक लगाने की मांग भी की है।
चौथी मांग किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमों को वापस लेने की है। किसानों का कहना है कि आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके लिए दर्ज केस अन्यायपूर्ण हैं।
इस अभियान के तहत किसानों ने स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की भी बात कही है। पंजाब में किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की मौजूदगी में बड़ी संख्या में किसानों ने ज्ञापन सौंपा। फिलहाल यह आंदोलन जिला स्तर पर चल रहा है, लेकिन किसानों ने संकेत दिए हैं कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे इसे और व्यापक रूप दे सकते हैं।

