Punjab Agricultural University के एक्सटेंशन एजुकेशन विभाग के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए विश्वविद्यालय का नाम रोशन किया है। ये उपलब्धियां जम्मू में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन “सस्टेनेबल एंड क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रोइकोसिस्टम्स: इनोवेशंस एंड पॉलिसी फ्रेमवर्क” के दौरान हासिल की गईं। इस सम्मेलन का आयोजन Indian Ecological Society द्वारा Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology of Jammu, चठा में 28 से 30 अप्रैल 2026 तक किया गया।
सम्मेलन में देशभर से कृषि, पर्यावरण और ग्रामीण विकास से जुड़े शोधार्थियों तथा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान आयोजित पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता में पीएयू के विद्यार्थियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल किए। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता और शोध क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है।
डॉ. विपन कुमार रांपल, प्रोफेसर-कम-हेड के निर्देशन में शोध कार्य कर रहे पीएच.डी. स्कॉलर मंजिंदर सिंह ने “मैपिंग द रिसर्च लैंडस्केप ऑफ फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशंस (FPOs) इन इंडिया: ए बिब्लियोमेट्रिक रिव्यू” विषय पर पोस्टर प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके शोध में भारत में किसान उत्पादक संगठनों पर हुए शोध कार्यों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया, जिसमें कृषि विकास और किसानों की सामूहिक भागीदारी के महत्व को रेखांकित किया गया।
इसी प्रकार डॉ. टी. एस. रियार, अतिरिक्त निदेशक संचार के मार्गदर्शन में शोध कर रहे पीएच.डी. स्कॉलर हर्ष भूषण ने “फैक्टर्स इन्फ्लुएंसिंग फार्मर्स डिसीजन इन सेलिंग देयर सरप्लस राइस एट प्रोक्योरमेंट सेंटर्स इन जम्मू रीजन” विषय पर उत्कृष्ट प्रस्तुति देते हुए प्रथम पुरस्कार हासिल किया। उनके अध्ययन में जम्मू क्षेत्र के किसानों द्वारा धान की बिक्री से संबंधित निर्णयों को प्रभावित करने वाले सामाजिक, आर्थिक और संस्थागत कारकों का विश्लेषण किया गया।
वहीं कृषि शिक्षा विभाग, डीन कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर कार्यालय के प्रोफेसर डॉ. पंकज कुमार के निर्देशन में शोध कर रहे पीएच.डी. स्कॉलर दिनेश सू और अर्जुन ने भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। दिनेश सू ने “रिस्क मैनेजमेंट स्ट्रेटेजीज अमंग पीएमएफबीवाई एंड नॉन-पीएमएफबीवाई फार्मर्स अगेंस्ट क्रॉप फेल्योर ड्यू टू नेचुरल कैलैमिटीज इन सांबा डिस्ट्रिक्ट, जम्मू एंड कश्मीर” विषय पर प्रस्तुति देकर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। उनके शोध में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान फसल नुकसान से निपटने के लिए किसानों द्वारा अपनाई जाने वाली जोखिम प्रबंधन रणनीतियों का अध्ययन किया गया।
अर्जुन ने “फैक्टर्स इन्फ्लुएंसिंग फार्मर्स यूटिलाइजेशन ऑफ आईसीटी टूल्स फॉर एक्सेसिंग इन्फॉर्मेशन ऑन मक्का प्रोडक्शन प्रैक्टिसेज इन राजौरी डिस्ट्रिक्ट ऑफ जम्मू डिवीजन” विषय पर पोस्टर प्रस्तुति देकर तृतीय स्थान हासिल किया। उनके अध्ययन में किसानों द्वारा मक्का उत्पादन संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) उपकरणों के उपयोग को प्रभावित करने वाले कारकों का विश्लेषण किया गया।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल तथा विभागाध्यक्ष डॉ. विपन कुमार रांपल ने विद्यार्थियों और उनके मार्गदर्शकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता विश्वविद्यालय के शोध वातावरण, शैक्षणिक गुणवत्ता और समर्पित मार्गदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शोध कार्य कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि प्रणाली जैसे विषय आज वैश्विक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुके हैं। ऐसे में विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे नीति-आधारित और नवाचारपूर्ण शोध भविष्य की कृषि नीतियों और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे।
सम्मेलन में मिली इन उपलब्धियों से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में नया उत्साह देखने को मिला है। शिक्षकों और शोधार्थियों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी विद्यार्थी इसी प्रकार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर विश्वविद्यालय और देश का नाम रोशन करते रहेंगे।

