देश में किसानों को सटीक और समय पर मौसम आधारित कृषि परामर्श उपलब्ध कराने के लिए सरकार द्वारा कृषि-मौसम सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, पहले ग्रामीन कृषि मौसम सेवा (GKMS) के तहत 199 जिला कृषि-मौसम विज्ञान इकाइयों (DAMUs) के माध्यम से सेवाएं दी जा रही थीं, जबकि वर्तमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से 130 कृषि-मौसम क्षेत्रीय इकाइयों (AMFUs) के नेटवर्क के जरिए यह सेवाएं जारी रखे हुए है।
यह नेटवर्क देशभर के किसानों को जिला स्तर पर मौसम आधारित सलाह प्रदान करता है, जिससे वे फसल प्रबंधन, बुवाई, सिंचाई और कटाई जैसे निर्णय बेहतर तरीके से ले सकें। आंध्र प्रदेश में भी 9 एग्रो-मेट इकाइयां सक्रिय हैं, जो किसानों को नियमित रूप से मौसम संबंधी जानकारी और सलाह उपलब्ध करा रही हैं।
सरकार द्वारा कृषि-मौसम सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी व्यापक बनाया गया है। पंचायत मौसम सेवा, मौसम ऐप और मेघदूत ऐप जैसे माध्यमों से किसानों तक मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह आसानी से पहुंचाई जा रही है। इसके साथ ही अन्य आईटी आधारित प्रसार प्रणालियों का भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक किसानों को लाभ मिल सके।
मौसम पूर्वानुमान की सटीकता बढ़ाने के लिए सरकार कृषि-स्वचालित मौसम स्टेशनों और अनुसंधान एवं विकास (R&D) अवसंरचना को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके तहत प्रेक्षण नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है, जिससे मौसम से संबंधित डेटा अधिक सटीक और प्रभावी रूप से उपलब्ध हो सके।
पिछले पांच वर्षों में इस क्षेत्र के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त वित्तीय संसाधन भी उपलब्ध कराए गए हैं। विभिन्न अटारी (ATARI) केंद्रों के माध्यम से राज्यों को वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच करोड़ों रुपये की राशि जारी की गई है, जिससे कृषि-मौसम सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण को गति मिली है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि आंध्र प्रदेश में जिला कृषि-मौसम विज्ञान इकाइयों (DAMUs) के पुनःस्थापन के बिना ही कृषि विज्ञान केंद्रों के साथ स्थापित 9 एएमएफयू (AMFUs) के माध्यम से सेवाएं प्रभावी रूप से दी जा रही हैं।

