भारत में मत्स्य क्षेत्र को मजबूत बनाने और मछुआरा समुदायों की आय बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। इसी कड़ी में हैदराबाद में मत्स्य सहकारी संस्थाओं पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें देशभर के विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और सहकारी संगठनों ने हिस्सा लिया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना, आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना और “सहकार से समृद्धि” के विजन को जमीनी स्तर तक पहुंचाना था।
प्रधानमंत्री Narendra Modi के “सहकार से समृद्धि” दृष्टिकोण और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah के नेतृत्व में देशभर में सहकारी आंदोलन को नई दिशा दी जा रही है। इसी अभियान के तहत यह राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें मत्स्य क्षेत्र के समावेशी विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।
मत्स्य सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाने पर जोर
कार्यशाला को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव Ashish Kumar Bhutani ने कहा कि मत्स्य सहकारी संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन रही हैं। उन्होंने बताया कि मछुआरों, महिलाओं और मत्स्य मूल्य श्रृंखला से जुड़े परिवारों के लिए सहकारी मॉडल रोजगार और आय के नए अवसर पैदा कर रहा है।
उन्होंने संस्थागत ढांचे को मजबूत करने, डिजिटल तकनीकों को अपनाने और बाजार तक सीधी पहुंच बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, यदि सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और प्रशिक्षण से जोड़ा जाए तो मत्स्य क्षेत्र ग्रामीण विकास का बड़ा आधार बन सकता है।
आधुनिक तकनीक और स्टार्टअप मॉडल पर फोकस
मत्स्य पालन विभाग के सचिव Abhilaksh Likhi ने कहा कि भारत का मत्स्य क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसमें अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने मत्स्य स्टार्टअप, डिजिटल प्लेटफॉर्म, आधुनिक अवसंरचना और बाजार संपर्क को भविष्य के विकास का प्रमुख आधार बताया।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार की मांगों को देखते हुए भारतीय मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाना जरूरी है। इसके लिए तकनीकी नवाचार, डिजिटल विपणन और मूल्य संवर्धन पर तेजी से काम किया जा रहा है।
PMMSY और PM-MKSSY योजनाओं पर चर्चा
कार्यशाला में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के तहत मत्स्य सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। नई मत्स्य सहकारी समितियों के गठन, निष्क्रिय समितियों के पुनर्जीवन और सदस्यों की संख्या बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसके अलावा जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने और NABARD तथा NCDC जैसी संस्थाओं के सहयोग को मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि मछुआरों को सस्ता और आसान ऋण मिलेगा तो वे आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों को तेजी से अपना सकेंगे।
समुद्री शैवाल खेती और केज कल्चर पर जोर
कार्यशाला में समुद्री मत्स्य पालन के विविधीकरण को लेकर भी कई महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इनमें खुले समुद्र में केज कल्चर, समुद्री शैवाल खेती, सजावटी मत्स्य पालन और क्लस्टर आधारित मत्स्य विकास जैसे विषय प्रमुख रहे।
विशेषज्ञों ने बताया कि समुद्री शैवाल खेती महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकती है। वहीं खुले समुद्र में केज कल्चर से उत्पादन बढ़ाने और निर्यात क्षमता मजबूत करने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा Bio-floc और Recirculatory Aquaculture System (RAS) जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर भी जोर दिया गया। इन तकनीकों से कम पानी और सीमित संसाधनों में अधिक उत्पादन संभव है, जिससे किसानों और मछुआरों की आय बढ़ सकती है।
बीमा और सामाजिक सुरक्षा पर भी चर्चा
कार्यशाला में मछुआरों के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। समूह दुर्घटना बीमा योजना, एक्वाकल्चर बीमा और नौका बीमा जैसी योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और दुर्घटनाओं से प्रभावित मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा देना बेहद जरूरी है। बीमा योजनाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ेगा बाजार संपर्क
राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB), NAFED, SFAC और NERAMAC जैसी संस्थाओं ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-मार्केटिंग को बढ़ावा देने की रणनीतियों पर प्रस्तुति दी। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से मछुआरों को सीधे बाजार से जोड़ने पर उन्हें बेहतर दाम मिल सकेंगे।
इसके साथ ही मछली अपशिष्ट से मूल्य संवर्धन, सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल और निर्यात बढ़ाने पर भी विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि भारत वैश्विक मत्स्य बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकता है, यदि सहकारी मॉडल को आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन व्यवस्था से जोड़ा जाए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
हैदराबाद में आयोजित यह राष्ट्रीय कार्यशाला इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार मत्स्य क्षेत्र को ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन के बड़े माध्यम के रूप में देख रही है। सहकारी मॉडल के जरिए मछुआरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, नई तकनीकों को बढ़ावा देने और वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है।
आने वाले समय में यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो मत्स्य सहकारी संस्थाएं न केवल मछुआरों की आय बढ़ाएंगी बल्कि ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देंगी।

