मुंबई में मत्स्य पालन और जलीय स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। महाराष्ट्र के पहले बहु-विशेषज्ञ मत्स्य क्लिनिक एवं मोबाइल फिश केयर यूनिट ‘हीलिंग फिन्स’ की आधारशिला भाकृअनुप–केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान परिसर में रखी गई। यह पहल राज्य में मत्स्य पालन से जुड़े किसानों, उद्यमियों और शौकिया एक्वेरियम धारकों के लिए एक समर्पित और आधुनिक सुविधा के रूप में सामने आई है।
इस परियोजना का शिलान्यास महाराष्ट्र सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने किया। इस अवसर पर वर्सोवा क्षेत्र के विधायक हारून राशिद खान, मुंबई उपनगर के जिलाधिकारी सौरभ कटियार और संस्थान के निदेशक डॉ. एन.पी. साहू सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
‘हीलिंग फिन्स’ परियोजना को जलीय पर्यावरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन (AEHM) प्रभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसे जिला योजना समिति, मुंबई उपनगर से वित्तीय सहयोग प्राप्त है। यह केंद्र मछली पालन करने वाले किसानों, झींगा उत्पादकों, सजावटी मछली व्यवसायियों और एक्वेरियम प्रेमियों के लिए रोग पहचान, उपचार और परामर्श जैसी समग्र सेवाएं प्रदान करेगा।
इस पहल की खास बात इसका चार-स्तरीय मॉडल है, जिसमें क्लिनिकल सेवाएं, मोबाइल आउटरीच, उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं और टेली-हेल्थ सेवाएं शामिल हैं। इसके माध्यम से न केवल संस्थान परिसर में बल्कि खेत और उत्पादन स्थलों पर भी समय पर उपचार और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। मोबाइल फिश केयर यूनिट इस दिशा में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे दूरदराज क्षेत्रों के मत्स्य किसानों को भी विशेषज्ञ सेवाएं मिल सकेंगी।
कार्यक्रम के दौरान निदेशक डॉ. एन.पी. साहू ने अपने संबोधन में इस परियोजना को मत्स्य क्षेत्र के लिए एक “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि इससे न केवल उत्पादन में सुधार होगा, बल्कि रोग प्रबंधन और गुणवत्ता में भी बड़ा बदलाव आएगा। वहीं परियोजना की मुख्य अन्वेषक डॉ. मेघा के. बेडेकर ने इस सुविधा की संरचना, कार्यप्रणाली और इसके संभावित लाभों पर विस्तार से जानकारी दी।
विधायक हारून राशिद खान ने महानगरीय क्षेत्रों में इस तरह की सुविधा की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे स्थानीय मत्स्य समुदाय को सीधा लाभ मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने संस्थान के जलीय जैव विविधता संग्रहालय और एक्वेरियम का भी दौरा किया और मत्स्य अनुसंधान एवं शिक्षा में संस्थान की भूमिका की सराहना की।
इस कार्यक्रम में 250 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें वैज्ञानिक, छात्र, मछुआरा समितियों के प्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी शामिल थे।
कुल मिलाकर, ‘हीलिंग फिन्स’ पहल महाराष्ट्र में मत्स्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल मछली स्वास्थ्य प्रबंधन को सुदृढ़ करेगा, बल्कि मत्स्य पालन को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनाने में भी सहायक साबित होगा।

