भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग के अंतर्गत पशुओं पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के लिए समिति (CCSEA) द्वारा नई दिल्ली में “प्रयोगशाला पशु कल्याण: नीतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं” विषय पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य प्रयोगशाला पशु कल्याण मानकों को मजबूत करना, नैतिक एवं जिम्मेदार अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और संस्थागत प्रतिनिधियों के बीच सहयोग को बढ़ाना था।
सम्मेलन में देशभर से अनुसंधान संस्थानों, विश्वविद्यालयों, संस्थागत पशु आचार समितियों (IAEC), पशु चिकित्सा विशेषज्ञों, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) के सदस्यों और विभिन्न सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम ने प्रयोगशाला पशुओं के मानवीय और नैतिक उपयोग पर व्यापक चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह रहे। उनके साथ केंद्रीय राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल, केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन तथा पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार भी उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान, वैक्सीन विकास और नई दवाओं की खोज में पशु-आधारित अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन इसके साथ पशुओं के प्रति संवेदनशीलता और मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के दौरान पशुओं की पीड़ा और कष्ट को न्यूनतम रखना वैज्ञानिक समुदाय की नैतिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने देशभर के अनुसंधान संस्थानों और एनिमल हाउस में पशु कल्याण मानकों को लागू करने में CCSEA की केंद्रीय भूमिका की सराहना की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत को अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आगे बढ़ते हुए पशु कल्याण संबंधी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
श्री राजीव रंजन सिंह ने डेयरी क्षेत्र के विकास और निर्यात क्षमता बढ़ाने के लिए प्रभावी टीकाकरण कार्यक्रमों की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से फुट एंड माउथ डिजीज (FMD) जैसी बीमारियों के नियंत्रण को पशुधन और डेयरी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण बताया।
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रोफेसर एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति को करुणा और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत केवल वैज्ञानिक नवाचार में ही नहीं, बल्कि प्रत्येक जीवित प्राणी के प्रति गरिमा, देखभाल और नैतिक व्यवहार सुनिश्चित करने में भी विश्वास रखता है।
वहीं केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि वास्तविक वैज्ञानिक प्रगति वही है, जो मानवीय मूल्यों और नैतिकता के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि हर जीवित प्राणी के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता ही भारत की सांस्कृतिक पहचान है और वैज्ञानिक अनुसंधान में भी इसी सोच को अपनाने की आवश्यकता है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने कहा कि भारत तेजी से विकास कर रहा है और इसके साथ स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि विकास के साथ संवेदनशीलता और नैतिक जिम्मेदारी भी बनी रहे।
सम्मेलन के दौरान प्रयोगशाला पशु विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों और पेशेवरों ने “पशुओं पर अनुसंधान की नीतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं एवं उनका कल्याण” विषय पर तकनीकी सत्र में विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसमें प्रयोगशाला पशुओं की देखभाल, नैतिक प्रयोग पद्धतियों, नियामक ढांचे और संस्थागत अनुपालन जैसे विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने पशु कल्याण के क्षेत्र में CCSEA की भूमिका और योगदान की सराहना की।
सम्मेलन का एक प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने पर जोर देना भी था। इसमें प्रयोगशाला पशुओं के रखरखाव, वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए उनके उपयोग और संस्थागत जवाबदेही को लेकर नई रणनीतियों पर विचार किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों और CCSEA सदस्यों ने संस्थागत स्तर पर सामने आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर खुलकर चर्चा की। समिति ने इन चुनौतियों के समाधान के सुझाव देते हुए कहा कि पशु कल्याण और अनुसंधान मानकों को बनाए रखने के लिए स्व-जागरूकता, पारदर्शिता और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी है।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन जिम्मेदार, नैतिक और पारदर्शी वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की पहलें भारत को वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाने के साथ-साथ पशु कल्याण के प्रति संवेदनशील राष्ट्र के रूप में भी स्थापित करेंगी।

