देश में खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने तिलहन क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) को वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक सात वर्षों के लिए लागू किया है। इसके तहत उन्नत स्वदेशी तिलहन किस्मों, हाइब्रिड बीजों और प्रमाणित बीजों के उत्पादन एवं वितरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में डॉ. संदीप कुमार पाठक सहित अन्य सदस्यों द्वारा पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
सात साल के लिए शुरू हुआ राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन
सरकार ने 3 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन (NMEO-OS) की शुरुआत की थी। यह मिशन वर्ष 2024-25 से 2030-31 तक सात वर्षों की अवधि के लिए लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में तिलहन उत्पादन को बढ़ाना और खाद्य तेलों के मामले में भारत को अधिक आत्मनिर्भर बनाना है।
मिशन के तहत तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर बीज उपलब्ध कराने और पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हों और देश में तिलहन उत्पादन का आधार मजबूत हो।
स्वदेशी तिलहन किस्मों को बढ़ावा
सरकार ने देश में विकसित उन्नत स्वदेशी तिलहन किस्मों और हाइब्रिड बीजों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान किए हैं। मिशन के तहत ब्रीडर बीजों की खरीद के लिए 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जा रही है।
इसके अलावा, मूल्य श्रृंखला क्लस्टरों के माध्यम से किसानों तक प्रमाणित बीजों के वितरण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने और तिलहन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
60 बीज केंद्र और 50 विशेषीकृत बीज भंडारण इकाइयां
सरकार ने हाल ही में जारी की गई तिलहन किस्मों के हाइब्रिड बीजों के उत्पादन के लिए 60 बीज केंद्रों को मंजूरी दी है। इसके साथ ही 50 विशेषीकृत बीज भंडारण इकाइयों की स्थापना को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।
इन सुविधाओं का उद्देश्य देश में तिलहन के गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाना और बीज उत्पादन एवं भंडारण की व्यवस्था को मजबूत करना है।
ऑयल पाम के लिए भी अलग मिशन
सरकार ने खाद्य तेलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए तिलहन के साथ-साथ ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम (NMEO-OP) लागू किया है।
यह केंद्र प्रायोजित योजना वर्ष 2021-22 में 11,040 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय के साथ शुरू की गई थी। इसमें भारत सरकार का हिस्सा 8,844 करोड़ रुपये है। मिशन के तहत वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान 6.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को ऑयल पाम की खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया था।
15 राज्यों में लागू है NMEO-OP
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-ऑयल पाम वर्तमान में देश के 15 राज्यों में लागू किया जा रहा है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और त्रिपुरा शामिल हैं।
मिशन के तहत किसानों को रोपण सामग्री, पौधों के रखरखाव, इंटरक्रॉपिंग, ड्रिप सिंचाई और कृषि मशीनरी के लिए सहायता दी जा रही है। इसके अलावा पुनःरोपण, बीज उद्यान और नर्सरी की स्थापना तथा ऑयल पाम प्रसंस्करण से जुड़ी आधारभूत संरचना के विकास पर भी काम किया जा रहा है।
किसानों के लिए मूल्य आश्वासन की व्यवस्था
ऑयल पाम किसानों के लिए व्यवहार्यता अंतर भुगतान (VGP) के माध्यम से मूल्य आश्वासन तंत्र भी उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को उत्पादन के लिए बेहतर मूल्य सुरक्षा प्रदान करना और ऑयल पाम की खेती को अधिक आकर्षक बनाना है।
2.73 लाख हेक्टेयर में हुई ऑयल पाम की खेती
सरकार के अनुसार, वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान देश में कुल 2.73 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम की खेती की गई।
इसी अवधि में मिशन के विभिन्न घटकों के तहत राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से कुल 1,447.21 करोड़ रुपये जारी किए गए।
2026-27 के लिए 1,143.9 करोड़ रुपये मंजूर
एनएमईओ-ऑयल पाम के लिए वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक 11,040 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया था। इसके बाद वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजनाओं के लिए कार्यान्वयन करने वाले राज्यों के लिए 1,143.9 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
भारत में खाद्य तेल की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भरता लंबे समय से एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है। ऐसे में सरकार तिलहन फसलों के उत्पादन, बेहतर बीजों की उपलब्धता, उत्पादकता में वृद्धि और मूल्य श्रृंखला के विकास पर जोर दे रही है।
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत स्वदेशी उन्नत किस्मों और हाइब्रिड बीजों को बढ़ावा देने, प्रमाणित बीजों की उपलब्धता बढ़ाने तथा बीज उत्पादन और भंडारण ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देकर खाद्य तेलों में देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करना है।

