भारत के प्रसिद्ध मखाना उत्पादन क्षेत्र में गुणवत्ता आधारित कृषि और निर्यात को बढ़ावा देने की दिशा में भाकृअनुप–राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र (ICAR-NRC Makhana), दरभंगा तथा भारतीय गुणवत्ता परिषद (Quality Council of India – QCI) के संयुक्त तत्वावधान में “किसान समृद्धि – गुणवत्ता मंथन” कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन में गुणवत्ता के प्रति जागरूकता बढ़ाना, जमीनी स्तर की चुनौतियों की पहचान करना तथा किसानों, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और नीति निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित कर एक मजबूत एवं प्रतिस्पर्धी Makhana Value Chain तैयार करना था।
कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि यदि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और पैकेजिंग तक प्रत्येक चरण में गुणवत्ता मानकों का पालन किया जाए तो भारतीय मखाना वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत पहचान बना सकता है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ निर्यात के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ भाकृअनुप–राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले तथा भारतीय गुणवत्ता परिषद के संयुक्त निदेशक अमित सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
अपने संबोधन में डॉ. नचिकेत कोतवालीवाले ने कहा कि मखाना मूल्य श्रृंखला के प्रत्येक चरण में गुणवत्ता बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य मिलेगा और भारतीय मखाने की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक मजबूत होगी।
गुणवत्ता और मशीनीकरण से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
डॉ. कोतवालीवाले ने कहा कि मखाना उद्योग में आधुनिक Mechanization अपनाने से श्रम की आवश्यकता कम होगी, प्रसंस्करण अधिक स्वच्छ एवं वैज्ञानिक बनेगा तथा निर्यात योग्य उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार किए जा सकेंगे।
उन्होंने किसानों और उद्यमियों से उत्पादन, प्रसंस्करण तथा भंडारण के दौरान स्वच्छता और गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि गुणवत्ता केवल उत्पाद की विशेषता नहीं बल्कि उपभोक्ता का विश्वास भी है।
Quality Culture विकसित करने पर जोर
भारतीय गुणवत्ता परिषद के संयुक्त निदेशक अमित सिंह ने कार्यक्रम में परिषद की विभिन्न गुणवत्ता संवर्धन योजनाओं और उद्देश्यों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि यदि मखाना क्षेत्र में Quality Culture, Standardization और Capacity Building को बढ़ावा दिया जाए तो यह उद्योग न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा बल्कि भारत के मखाना निर्यात को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन भविष्य में भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सबसे मजबूत आधार बनेगा।
राष्ट्रीय मखाना बोर्ड और सरकारी योजनाओं की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान जिला उद्यान अधिकारी, दरभंगा श्री नीरज कुमार झा ने किसानों को राष्ट्रीय मखाना बोर्ड तथा मखाना उत्पादकों के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उत्पादन एवं आय बढ़ाने की अपील की।
वैज्ञानिकों ने बताए गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के तरीके
कार्यक्रम में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आई.एस. सिंह ने किसानों को मखाना उत्पादन की अनुशंसित वैज्ञानिक पद्धतियों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि उन्नत उत्पादन तकनीकों, उचित जल प्रबंधन, समय पर पोषण प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीके से कटाई एवं प्रसंस्करण करने से मखाने की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
Export Quality पर APEDA ने किया मार्गदर्शन
APEDA के सहायक महाप्रबंधक के. निरंजन रेड्डी ने मखाना निर्यात से जुड़े गुणवत्ता मानकों, अंतरराष्ट्रीय बाजार की आवश्यकताओं तथा निर्यात योग्य उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए किसानों और उद्यमियों को गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा मानकों तथा उचित पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देना होगा।
मखाना प्रसंस्करण में आधुनिक मशीनों की भूमिका
सीफेट (CIPHET), लुधियाना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के. विश्वकर्मा ने मखाना प्रसंस्करण में आधुनिक मशीनों के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि मशीनीकरण अपनाने से उत्पादन लागत कम होती है, गुणवत्ता बेहतर होती है तथा प्रसंस्करण की गति और दक्षता दोनों में वृद्धि होती है। इससे किसानों और प्रसंस्करण इकाइयों की आय में भी सुधार संभव है।
किसान संवाद में सामने आईं जमीनी चुनौतियां
कार्यक्रम के दौरान आयोजित किसान संवाद सत्र का संचालन वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार ने किया।
इस सत्र में किसानों और मखाना उद्यमियों ने उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, गुणवत्ता नियंत्रण तथा बाजार से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और सुझावों को साझा किया। विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों के समाधान के लिए वैज्ञानिक और व्यावहारिक सुझाव भी दिए।
संवाद सत्र ने किसानों, वैज्ञानिकों और नीति विशेषज्ञों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।
गुणवत्ता संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने “गुणवत्ता संकल्प” लेते हुए गुणवत्ता को अपने कार्य और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
गुणवत्ता मंथन सत्र का संचालन शिवम शुक्ला और मो. सलीम (भारतीय गुणवत्ता परिषद) ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अमित सिंह ने प्रस्तुत किया।
ICAR-NRC Makhana, दरभंगा एवं भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा आयोजित “किसान समृद्धि – गुणवत्ता मंथन” कार्यक्रम मखाना क्षेत्र में गुणवत्ता आधारित उत्पादन, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, मशीनीकरण और निर्यात क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान गुणवत्ता मानकों, आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक प्रबंधन को अपनाते हैं, तो भारतीय मखाना न केवल घरेलू बाजार में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, निर्यात को गति मिलेगी और भारत का मखाना उद्योग अधिक प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बन सकेगा।

