नई दिल्ली: देश की अग्रणी कृषि अनुसंधान संस्था भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) को अप्रैल 2025 में एक बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा, जिसके चलते संस्था का महत्वपूर्ण डेटा गायब हो गया। यह डाटा ICAR की दिल्ली स्थित मुख्य सर्वर और हैदराबाद स्थित डिसास्टर रिकवरी सर्वर (DRC) पर स्टोर था।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, जो कृषि शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार गतिविधियों का संचालन करती है, इस हमले के बाद तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर संकट में आ गई है। इस हमले की पुष्टि The Indian Express की एक रिपोर्ट में की गई है।
क्या-क्या डाटा हुआ गायब?
ICAR की वेबसाइट हैक होने के बाद जिन विभागों का डाटा गायब हुआ, उनमें शामिल हैं:
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कृषि वैज्ञानिक चयन बोर्ड (ASRB)
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भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान (IASRI)
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राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (NAARM)
इस हमले में जिन अहम सूचनाओं का नुकसान हुआ, उनमें शामिल हैं:
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तकनीकी अधिकारियों से लेकर उपमहानिदेशक (DDG) तक की भर्ती संबंधी फाइलें
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विज्ञानियों द्वारा प्रस्तुत की गई शोध परियोजनाओं और सबमिशन की जानकारी
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प्रशासनिक और वित्तीय दस्तावेज
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हजारों ईमेल्स और संवाद
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2024 की नौकरी के लिए प्राप्त आवेदनों का डाटा
ईमेल सिस्टम भी हुआ ठप
एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, ICAR का पूरा ईमेल सिस्टम कई दिनों तक बाधित रहा, जिससे न केवल आंतरिक संचार प्रभावित हुआ, बल्कि वित्तीय, अनुसंधान और प्रशासनिक कार्यों पर भी असर पड़ा।
केंद्र सरकार की सक्रियता
यह मामला 7 जुलाई को ICAR की वार्षिक आम सभा के दौरान सामने आया, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। बैठक में इस घटना को “गंभीर चूक” माना गया और मंत्री ने तुरंत एक छह सदस्यीय जांच समिति गठित करने का निर्देश दिया।
इस समिति की अध्यक्षता डॉ. डी. के. यादव (DDG, फसल विज्ञान) कर रहे हैं। समिति को 31 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। हालांकि खबर लिखे जाने तक समिति की पहली बैठक भी नहीं हुई थी।
अब तक क्या हुआ?
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ICAR के आईटी सिस्टम को फिलहाल सामान्य रूप से बहाल कर दिया गया है
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प्रभावित डाटा की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है
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समिति की रिपोर्ट के बाद भविष्य में डाटा सुरक्षा को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी हो सकते हैं
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अब साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद से प्रणाली की ऑडिट और सुधार की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है
एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसी संस्थाएं जो राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशील डाटा का प्रबंधन करती हैं, उन्हें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, मल्टी-लेयर फायरवॉल, और क्लाउड बैकअप सिस्टम्स जैसी तकनीकों को अपनाना चाहिए।
यह घटना क्यों चिंताजनक है?
ICAR देश में फसल सुधार, पशुपालन, मत्स्यपालन और कृषि तकनीक से जुड़ी नीतियों का प्रमुख आधार है। ऐसे में उसके सर्वरों पर हुआ साइबर हमला सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कृषि सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।

