भारत वैश्विक निवेश मानचित्र पर लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इन्वेस्ट इंडिया ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 6.1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक मूल्य की 60 परियोजनाओं को सफलतापूर्वक सुगम बनाया है। इन परियोजनाओं से देश के 14 राज्यों में 31,000 से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह उपलब्धि भारत को एक आकर्षक और विश्वसनीय निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह पहल उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के मार्गदर्शन में संचालित की जा रही है, जो निवेशकों के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में नीतिगत स्पष्टता, तेज निर्णय प्रक्रिया और मजबूत संस्थागत ढांचा विदेशी निवेशकों के विश्वास को लगातार बढ़ा रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कुल निवेश का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा यूरोपीय देशों से आया है, जो भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते आर्थिक संबंधों को दर्शाता है। इसके अलावा, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी भी लगातार बनी हुई है। वहीं ब्राजील, न्यूजीलैंड और कनाडा जैसे उभरते निवेश स्रोतों की बढ़ती मौजूदगी भारत के निवेश आधार के विस्तार और विविधीकरण का संकेत देती है।
अमरदीप सिंह भाटिया ने कहा कि भारत में निवेश की गति नीतिगत सुधारों और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का परिणाम है। उन्होंने बताया कि 6.1 अरब डॉलर का निवेश देश के मजबूत नियामक ढांचे और आर्थिक परिवर्तन को दर्शाता है। सरकार प्रक्रियाओं को और सरल बनाने तथा निवेश को रोजगार और नवाचार में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
इन्वेस्ट इंडिया ने निवेश चक्र के हर चरण में अपनी भूमिका को मजबूत किया है। एजेंसी शुरुआती परामर्श से लेकर निवेश के बाद सहायता तक व्यापक सेवाएं प्रदान कर रही है। इसके साथ ही यह विदेशी निवेशकों को घरेलू कंपनियों के साथ जोड़कर संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा दे रही है, जिससे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिल रही है।
इन प्रयासों के परिणामस्वरूप निवेश के पैमाने और गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 में वास्तविक निवेश में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई, जबकि औसत समझौते का आकार 1.8 गुना बढ़ा है। यह संकेत देता है कि भारत अब उच्च मूल्य वाली परियोजनाओं के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनता जा रहा है।
निवृत्ति राय ने कहा कि यह उपलब्धि एजेंसी की रणनीतिक भूमिका को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि 31,000 से अधिक रोजगार सृजन और निवेश में तेज वृद्धि, सरकार की नीतियों और संस्थागत सहयोग का प्रत्यक्ष परिणाम है। इन्वेस्ट इंडिया ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस गति को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्षेत्रीय दृष्टि से देखा जाए तो रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, जैव प्रौद्योगिकी और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में लगभग 65 प्रतिशत निवेश केंद्रित रहा है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग (ESDM), एयरोस्पेस, रक्षा और ऑटो/इलेक्ट्रिक वाहन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी तेजी से निवेश बढ़ रहा है।
राज्यों के स्तर पर निवेश का वितरण भी संतुलित होता दिखाई दे रहा है। गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश उच्च मूल्य वाली परियोजनाओं के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। वहीं राजस्थान और उत्तर प्रदेश में परियोजनाओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। तमिलनाडु, कर्नाटक, हरियाणा और दिल्ली जैसे पारंपरिक निवेश केंद्रों में भी निवेश प्रवाह मजबूत बना हुआ है। इसके साथ ही असम, बिहार और सिक्किम जैसे राज्यों में नए निवेश की शुरुआत से देश के निवेश परिदृश्य का विस्तार हो रहा है।
रोजगार सृजन के मामले में मध्य प्रदेश अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जिसके बाद आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना और महाराष्ट्र का स्थान है। यह रुझान दर्शाता है कि निवेश अब केवल बड़े औद्योगिक राज्यों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में फैल रहा है।
इन उपलब्धियों के पीछे ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं जैसी नीतिगत पहलों का बड़ा योगदान है। साथ ही, बुनियादी ढांचे में लगातार सुधार और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार भी निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहा है।
कुल मिलाकर, इन्वेस्ट इंडिया की यह उपलब्धि भारत को एक वैश्विक विनिर्माण और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। आने वाले वर्षों में यह प्रवृत्ति देश की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को नई गति दे सकती है।

