इटली के वेनिस में आयोजित विश्व की प्रतिष्ठित कला प्रदर्शनी La Biennale di Venezia में भारत ने वर्ष 2019 के बाद अपनी आधिकारिक वापसी दर्ज कराते हुए वैश्विक कला मंच पर प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। 61वीं अंतर्राष्ट्रीय कला प्रदर्शनी में “पैविलियन ऑफ इंडिया” के तहत प्रस्तुत ‘जियोग्राफ़ीज़ ऑफ डिस्टेंस: रिमेम्बरिंग होम’ प्रदर्शनी ने भारतीय समकालीन कला, सांस्कृतिक स्मृतियों और अपनेपन की भावनाओं को नई संवेदनशीलता के साथ दुनिया के सामने रखा।
यह प्रदर्शनी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा Nita Mukesh Ambani Cultural Centre और Serendipity Arts Foundation के सहयोग से आयोजित की गई है। प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री Gajendra Singh Shekhawat ने किया। इस अवसर पर ला बिएननेल डि वेनेज़िया के अध्यक्ष Pietrangelo Buttafuoco, संस्कृति मंत्रालय के सचिव Vivek Aggarwal तथा इटली में भारत की राजदूत Vani Rao भी मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह प्रदर्शनी एक ऐसे आधुनिक भारत की तस्वीर प्रस्तुत करती है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा होने के साथ-साथ भविष्य की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय कला अब वैश्विक संवाद का मजबूत माध्यम बन रही है और यह प्रदर्शनी भारत की सांस्कृतिक शक्ति और रचनात्मकता का प्रतीक है।
प्रदर्शनी के क्यूरेटर Amin Jaffer ने इस आयोजन को “घर” की पारंपरिक अवधारणा से आगे बढ़ाकर एक भावनात्मक और सांस्कृतिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी यह समझने का प्रयास करती है कि स्मृतियां, प्रवास और सामाजिक बदलाव किस प्रकार व्यक्ति की पहचान और अपनेपन की भावना को आकार देते हैं।
इस सामूहिक प्रदर्शनी में पांच प्रमुख भारतीय कलाकारों की नई और विशाल कलाकृतियां शामिल की गई हैं। Alwar Balasubramaniam की कृति “नॉट जस्ट फॉर अस” ग्रामीण तमिलनाडु की मिट्टी और प्राकृतिक सामग्रियों के माध्यम से समय, स्मृति और पर्यावरणीय बदलावों को दर्शाती है। वहीं Ranjani Shettar की इंस्टॉलेशन “अंडर द सेम स्काई” प्रकृति, शिल्प और भावनात्मक जुड़ाव का अनूठा अनुभव प्रस्तुत करती है।
Sumakshi Singh की कलाकृति “परमानेंट एड्रेस” विशेष रूप से दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है। इसमें उन्होंने अपने पुश्तैनी घर को धागों और कढ़ाई के माध्यम से पुनर्जीवित किया है, जो स्मृतियों और बिछड़ते घरेलू परिवेश का मार्मिक चित्रण है। वहीं Skarma Sonam Tashi की इंस्टॉलेशन “एकोज ऑफ होम” लद्दाखी वास्तुकला और पारिस्थितिकी के माध्यम से सांस्कृतिक निरंतरता की कहानी कहती है।
प्रदर्शनी में Asim Waqif की विशाल बांस संरचना “चाल” भी खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यह भारतीय शहरों में तेजी से बदलते शहरी ढांचे और निर्माण प्रक्रियाओं को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करती है।
मई से नवंबर 2026 तक चलने वाली इस प्रदर्शनी के साथ भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरित विशेष परफॉर्मेंस कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिनका क्यूरेशन सेरेंडिपिटी आर्ट्स द्वारा किया गया है। इन प्रस्तुतियों में संगीत, नृत्य और विभिन्न कलात्मक माध्यमों के जरिए भारतीय संस्कृति की विविधता को वैश्विक दर्शकों के सामने रखा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनिस बिएननेल में भारत की यह वापसी केवल एक कला प्रदर्शनी नहीं बल्कि भारतीय सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक कला जगत में देश की बढ़ती भूमिका का भी प्रतीक है। “रिमेम्बरिंग होम” प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय समकालीन कला आज विश्व मंच पर अपनी विशिष्ट और प्रभावशाली पहचान बना रही है।

