भारत की कृषि शिक्षा और अनुसंधान प्रणाली ने वैश्विक स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए नया इतिहास रच दिया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के दो प्रमुख डीम्ड विश्वविद्यालयों ने पहली बार QS World University Rankings 2026 (विषयवार) में अपनी जगह बनाकर देश का नाम रोशन किया है। यह उपलब्धि न केवल कृषि शिक्षा के क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाती है, बल्कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम भी है।
यह सफलता उस व्यापक दृष्टिकोण का परिणाम है, जिसमें देश में उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के सम्मेलन में प्रधानमंत्री द्वारा कुशल मानव संसाधन के विकास पर दिए गए बल के अनुरूप, ICAR ने राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान, शिक्षा एवं विस्तार प्रणाली (NAREES) के तहत शिक्षा और अनुसंधान के स्तर को वैश्विक मानकों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं।
ताजा QS रैंकिंग, जिसे यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित संस्था द्वारा जारी किया गया है, में दुनिया भर के 1,900 से अधिक विश्वविद्यालयों और 21,000 से अधिक शैक्षणिक कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया। इस मूल्यांकन में शैक्षणिक प्रतिष्ठा, नियोक्ता की राय, शोध कार्यों के उद्धरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मानकों को शामिल किया गया है।
इस प्रतिष्ठित सूची में पहली बार ICAR-Indian Veterinary Research Institute (IVRI), बरेली ने पशु चिकित्सा विज्ञान श्रेणी में 51-100 रैंक हासिल कर शीर्ष 100 में स्थान बनाने वाला एकमात्र भारतीय संस्थान बनकर ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। यह न केवल IVRI की उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि पशु चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करता है।
इसी तरह, ICAR-Indian Agricultural Research Institute (IARI), नई दिल्ली ने कृषि एवं वानिकी श्रेणी में 151-200 रैंकिंग में जगह बनाई है। IARI का यह प्रदर्शन उसे भारत के चुनिंदा प्रतिष्ठित संस्थानों की श्रेणी में शामिल करता है, जहां पहले से ही Banaras Hindu University, University of Delhi और IIT Kharagpur जैसे संस्थान मौजूद हैं।
कृषि एवं वानिकी श्रेणी में कुल 475 वैश्विक संस्थानों में से 10 भारतीय विश्वविद्यालयों का शामिल होना इस बात का संकेत है कि भारत की कृषि शिक्षा प्रणाली तेजी से वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह बना रही है। इसके अलावा, Tamil Nadu Agricultural University (TNAU) ने 201-250 रैंकिंग में स्थान हासिल किया है, जबकि Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University ने 301-350 श्रेणी में पहली बार प्रवेश किया है।
इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. एम. एल. जाट, जो DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक हैं, ने कहा कि यह सफलता कृषि-खाद्य और स्वास्थ्य प्रणालियों में संस्थानों के बहुआयामी योगदान का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में, जहां संस्थानों का मूल्यांकन केवल शोध तक सीमित नहीं बल्कि उनके सामाजिक प्रभाव के आधार पर भी होता है, यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने आगे बताया कि IARI और IVRI की सफलता उनके समन्वित दृष्टिकोण का परिणाम है, जिसमें मौलिक अनुसंधान, व्यावहारिक अनुप्रयोग और जमीनी स्तर तक पहुंच शामिल है। फसल सुधार, पशुधन विकास और जलवायु-अनुकूल कृषि जैसे क्षेत्रों में इन संस्थानों का योगदान देश की कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ICAR संस्थानों की यह उपलब्धि देश के युवाओं को कृषि शिक्षा और अनुसंधान की ओर आकर्षित करेगी। इससे न केवल कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्ञान आदान-प्रदान के नए द्वार खुलेंगे, जिससे भारतीय कृषि को और अधिक आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।
यह उपलब्धि भारत की उस बदलती तस्वीर को भी दर्शाती है, जहां पारंपरिक कृषि अब आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार के साथ जुड़कर एक नए रूप में उभर रही है। डिजिटल तकनीकों, जैव प्रौद्योगिकी, जलवायु अनुकूल खेती और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

