कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित जैविक कृषि समाधान विकसित करने वाली कंपनी एब्सोल्यूट ने अफ्रीका के कृषि बाजार में प्रवेश कर लिया है। कंपनी की कृषि जैविक समाधान शाखा INERA ने केन्या में व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं। इसे कंपनी की वैश्विक विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। INERA का लक्ष्य बड़े कृषि क्षेत्रों में पुनर्योजी और टिकाऊ कृषि समाधानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।
केन्या में अपने उत्पादों के वितरण और स्थानीय स्तर पर विस्तार के लिए INERA ने एक स्थापित कृषि कंपनी के साथ साझेदारी की है। साझेदार कंपनी को फूलों की खेती, विदेशी किस्म की जड़ी-बूटियों और बागवानी फसलों के क्षेत्र में काम करने का अनुभव है। यह साझेदारी INERA के जैविक उत्पादों को स्थानीय किसानों और उत्पादकों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
INERA के शुरुआती व्यावसायिक उत्पाद समूह में छह जैविक उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को मुख्य रूप से दो क्षेत्रों में बांटा गया है। पहला क्षेत्र जैविक पोषण प्रबंधन और दूसरा पौधों की शारीरिक क्षमता तथा जलवायु सहनशीलता से संबंधित है।
कंपनी के अनुसार, इन उत्पादों को पौधे और मिट्टी के बीच की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इनका लक्ष्य फसलों को मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों को बेहतर तरीके से प्राप्त करने और उनका उपयोग करने में मदद करना है। साथ ही, प्रतिकूल मौसम और पर्यावरणीय दबाव की स्थिति में पौधों की कार्यक्षमता बनाए रखने में भी ये जैविक समाधान मदद कर सकते हैं।
केन्या बनेगा अफ्रीका में विस्तार का आधार
INERA के लिए केन्या केवल पहला बाजार नहीं है, बल्कि कंपनी इसे पूरे अफ्रीका में आगे बढ़ने के आधार के रूप में देख रही है। कंपनी पूर्वी और पश्चिमी अफ्रीका के अन्य बाजारों का भी मूल्यांकन कर रही है। योजना के अनुसार, 2026 के बाकी महीनों और 2027 के दौरान अतिरिक्त अफ्रीकी बाजारों में उत्पाद पेश किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही कंपनी अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया में भी अपनी व्यावसायिक उपस्थिति बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
अफ्रीका को आने वाले वर्षों में दुनिया के महत्वपूर्ण कृषि विकास क्षेत्रों में माना जा रहा है। महाद्वीप में दुनिया की बची हुई बिना खेती वाली उपजाऊ कृषि भूमि का करीब दो-तिहाई हिस्सा मौजूद है। इसके बावजूद अफ्रीका में कृषि उत्पादकता अभी वैश्विक औसत से काफी कम है।
2024 में अफ्रीका में अनाज की औसत उपज करीब 1.68 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि वैश्विक औसत लगभग 4.2 टन प्रति हेक्टेयर था। उत्पादकता में यह बड़ा अंतर ऐसी कृषि तकनीकों और समाधानों की मांग पैदा कर रहा है, जिनसे उत्पादन बढ़ाया जा सके और इसके लिए केवल रासायनिक इनपुट की मात्रा बढ़ाने पर निर्भर न रहना पड़े।
केन्या क्यों है महत्वपूर्ण बाजार
केन्या में एक ओर बड़ी संख्या में छोटे किसान हैं, वहीं दूसरी ओर यहां निर्यात आधारित आधुनिक बागवानी उद्योग भी विकसित है। देश की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। केन्या राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, कृषि प्रत्यक्ष रूप से देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 24 प्रतिशत योगदान देती है। वहीं लगभग 72 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि क्षेत्र से अपनी आजीविका प्राप्त करती है।
केन्या में उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। 2024 में देश ने करीब 136.6 अरब केन्याई शिलिंग मूल्य के बागवानी उत्पादों का निर्यात किया। इसमें फूलों का योगदान करीब 72.1 अरब शिलिंग रहा, जो कुल बागवानी निर्यात मूल्य का लगभग 53 प्रतिशत था। फलों से करीब 41 अरब शिलिंग का निर्यात हुआ। फूलों के निर्यात में गुलाब की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बताई गई है।
निर्यात बाजारों के लिए उत्पादन करने वाले किसानों के लिए केवल प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता। मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता, जड़ों का स्वास्थ्य, फूल आने की प्रक्रिया, फसल की एकरूपता, उत्पाद की गुणवत्ता, गर्मी और पानी की कमी जैसी परिस्थितियों में पौधों की सहनशीलता, अवशेष मानकों का पालन और कटाई के बाद उत्पाद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है।
INERA के जैविक उत्पाद इन क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि पद्धतियों के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार किए गए हैं। कंपनी का उद्देश्य पोषक तत्वों की उपलब्धता, पौधों की कार्यक्षमता और मिट्टी-जड़ क्षेत्र की गतिविधियों को बेहतर बनाना है।
मिट्टी की सेहत और जलवायु परिवर्तन पर जोर
केन्या की कृषि व्यवस्था के सामने मिट्टी की उर्वरता में कमी, पोषक तत्वों का लगातार क्षरण और बदलती जलवायु जैसी चुनौतियां भी हैं। मौसम में बदलाव के कारण किसानों को गर्मी, पानी की कमी और अन्य पर्यावरणीय दबावों का सामना करना पड़ रहा है।
इसी वजह से जैविक कृषि उत्पादों के लिए वहां संभावनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे उत्पादों का उद्देश्य मिट्टी और पौधों की प्राकृतिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना तथा फसल को कठिन परिस्थितियों में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करना है।
केन्या के कृषि रसायन बाजार में भी नियामकीय बदलाव हो रहे हैं। कई पारंपरिक कीटनाशक उत्पादों की समीक्षा और कुछ उत्पादों को हटाने की प्रक्रिया चल रही है। INERA के अनुसार, इससे भविष्य में जैविक फसल सुरक्षा तकनीकों के लिए अवसर बढ़ सकते हैं।
हालांकि, कंपनी की भविष्य की जैविक फसल सुरक्षा तकनीकें शुरुआती छह उत्पादों से अलग हैं। इनमें सूक्ष्मजीव आधारित समाधान, पेप्टाइड और आरएनएआई आधारित जैविक नियंत्रण तकनीकें शामिल हैं। इन उत्पादों के स्थानीय नियामकीय अनुमोदन और व्यावसायीकरण की प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं।
प्रकृति से जैविक समाधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल
INERA के उत्पाद विकास के पीछे एब्सोल्यूट के दो प्रमुख तकनीकी मंच काम करते हैं। इनमें पहला नेचर इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। यह प्राकृतिक पर्यावरण से प्राप्त विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों, जैव-अणुओं, एंजाइमों और अन्य जैविक विविधताओं का संग्रह और अध्ययन करने वाला मंच है।
कंपनी ने इन जैविक संसाधनों को अलग-अलग प्राकृतिक परिस्थितियों से खोजा और उनका अध्ययन किया है। इनमें हिमनद, ज्वालामुखीय क्षेत्र, मैंग्रोव, समुद्र, जंगल और रेगिस्तान जैसे वातावरण शामिल हैं।
कंपनी का मानना है कि अत्यधिक गर्मी, लवणता, पोषक तत्वों की कमी और रोगों जैसी कठिन परिस्थितियों में विकसित होने वाले जीवों में ऐसे जैविक गुण हो सकते हैं, जिनका उपयोग कृषि में किया जा सकता है।
दूसरा मंच नेचर प्लस है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रोटीन और जैव-अणु खोज एवं डिजाइन प्रणाली है। यह बड़े जैविक आंकड़ों का विश्लेषण करके उपयोगी अणुओं और प्रोटीन की पहचान करने में मदद करता है। इसके बाद चुने गए संभावित समाधानों का प्रयोगशाला परीक्षण, क्षेत्र परीक्षण और उत्पाद विकास की प्रक्रिया से गुजारा जाता है।
इस तरह कंपनी प्राकृतिक दुनिया से उपयोगी जैविक तत्वों की खोज को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक के साथ जोड़ रही है।
भारत से वैश्विक बाजार तक विस्तार
INERA का केन्या में प्रवेश केवल उत्पाद निर्यात तक सीमित नहीं है। कंपनी स्थानीय कृषि भागीदारों, किसानों और कृषि विशेषज्ञों के साथ मिलकर अलग-अलग फसलों, मिट्टी और जलवायु परिस्थितियों में अपने उत्पादों का परीक्षण और उपयोग बढ़ाने की योजना बना रही है।
कंपनी के अनुसार, उसने अब तक 10 से अधिक कृषि-जलवायु क्षेत्रों में 100 एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्षेत्रीय परीक्षण नेटवर्क तैयार किया है। इसके अलावा 50,000 से अधिक क्षेत्रीय परीक्षण और किसान प्रदर्शन किए जाने का दावा किया गया है।
INERA कृषि, खाद्य और जीवन विज्ञान क्षेत्र की कई कंपनियों के साथ भी काम कर रही है। इनमें ओलम, एडामा, आईटीसी, क्रॉपनेक्स्ट और जुबिलेंट जैसी कंपनियां शामिल हैं।
कंपनी के संस्थापक और समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी अगम खरे के अनुसार, अफ्रीका आने वाले दशकों में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्रों में शामिल होगा। उनके मुताबिक, अफ्रीका में उत्पादकता बढ़ाने के लिए केवल अधिक कृषि इनपुट इस्तेमाल करना ही समाधान नहीं है, बल्कि किसानों को कम संसाधनों में अधिक उत्पादन और पोषक तत्वों तथा पानी के बेहतर उपयोग में मदद करना जरूरी है।
केन्या में कारोबार की शुरुआत इसी व्यापक रणनीति का पहला चरण है। कंपनी अब अफ्रीका के अन्य बाजारों में विस्तार, जैविक कृषि तकनीकों के विकास और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से प्रकृति आधारित समाधान तैयार करने पर ध्यान दे रही है। यदि स्थानीय स्तर पर उत्पादों को नियामकीय स्वीकृति और किसानों से व्यावसायिक स्वीकार्यता मिलती है, तो यह विस्तार अफ्रीकी कृषि में जैविक इनपुट के इस्तेमाल को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

