भारतीय किसान उर्वरक सहकारी संस्था (IFFCO) अब देश के बाहर भी अपनी तकनीक का विस्तार करने जा रही है। नैनो यूरिया की सफलता के चार साल बाद अब इफको ब्राजील में अपना पहला इंटरनेशनल नैनो फर्टिलाइज़र प्लांट लगाने जा रही है। यह प्लांट IFFCO की सहायक कंपनी IFFCO नैनोवेंशन और ब्राजील की स्थानीय कंपनी NanoFert के साथ 7:3 के ज्वॉइंट वेंचर के तहत स्थापित किया जाएगा।
यह संयंत्र हर साल करीब 4.5 मिलियन लीटर नैनो-उर्वरक के उत्पादन में सक्षम होगा और 2025 के अंत तक ट्रायल उत्पादन शुरू हो जाएगा।
उपज और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
IFFCO नैनोवेंशन के मैनेजिंग डायरेक्टर लक्ष्मणन अरुणाचलम के अनुसार, नैनो उर्वरकों के विभिन्न फील्ड ट्रायल के बाद यह पहला चरण है। ब्राजील जैसे कृषि प्रधान देश में यह प्लांट मक्का, सोयाबीन, गन्ना और कॉफी जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेगा।
ब्राजील के किसानों में नैनो उर्वरक को लेकर सकारात्मक रुझान देखा गया है। वे न केवल परंपरागत उर्वरकों की खपत कम करना चाहते हैं बल्कि अधिक उत्पादन की दिशा में भी कदम बढ़ा रहे हैं।
रिसर्च में मिले सकारात्मक परिणामIFFCO और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, नैनो फर्टिलाइज़र के उपयोग से मक्का और सोयाबीन की उपज में करीब 10% और गन्ने में 7% से अधिक बढ़ोतरी देखी गई है। इससे ब्राजील जैसे कृषि निर्यातक देश को बड़ा फायदा होगा।
घरेलू उत्पादन और योजना
IFFCO फिलहाल देश में हर साल करीब 289.5 मिलियन बोतलों (500 मिली प्रति बोतल) के नैनो उर्वरकों का उत्पादन कर रहा है। FY2025 में कंपनी ने 26.5 मिलियन बोतल नैनो यूरिया प्लस और 9.7 मिलियन बोतल नैनो DAP की बिक्री की, जो पिछले साल की तुलना में क्रमशः 31% और 118% की वृद्धि दर्शाता है।
IFFCO अब जल्द ही नैनो जिंक और नैनो कॉपर भी बाजार में उतारने की योजना बना रही है।
कीमत और सब्सिडी
वर्तमान में, 500 मिली की नैनो यूरिया बोतल ₹240 में मिलती है, जबकि नैनो DAP की कीमत ₹600 प्रति बोतल है। यह बोतलें परंपरागत 45 किलो यूरिया बैग के बराबर मानी जाती हैं।
सरकार प्रति बैग यूरिया पर किसानों से केवल ₹242 लेती है, जबकि उत्पादन लागत करीब ₹2,650 होती है। शेष राशि सरकार द्वारा सब्सिडी के रूप में दी जाती है। वर्ष 2025-26 में कुल 1.67 ट्रिलियन रुपये की उर्वरक सब्सिडी का अनुमान है।

