अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव अब 24वें दिन में प्रवेश कर चुका है और इसका असर सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गहराता जा रहा है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस बीच एक नई रिपोर्ट ने हालात को और चिंताजनक बना दिया है।
लंदन स्थित मीडिया आउटलेट ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल तेल टैंकरों से भारी-भरकम शुल्क वसूल रहा है। दावा किया गया है कि हर एक टैंकर को सुरक्षित रास्ता देने के बदले करीब 20 लाख डॉलर यानी 18 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ली जा रही है।
रिपोर्ट में ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी के हवाले से कहा गया है कि यह कदम मजबूरी और रणनीति दोनों का हिस्सा है। उन्होंने कहा, “युद्ध की अपनी लागत होती है और ऐसे में हमारे नियंत्रण वाले रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेना स्वाभाविक है।” उनके बयान से साफ है कि ईरान इस वसूली को अपनी ताकत और नियंत्रण के प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहा है।
इससे पहले भी शिपिंग डेटा और एनालिटिक्स फर्म Lloyd’s List Intelligence ने अपनी रिपोर्ट में संकेत दिए थे कि कुछ टैंकर ऑपरेटरों ने सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान को भुगतान किया है। हालांकि, इस तरह के लेनदेन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद हैं, क्योंकि ईरान पर पहले से ही कई पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लागू हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20 फीसदी हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का अवरोध या अतिरिक्त शुल्क सीधे-सीधे तेल की कीमतों और सप्लाई चेन को प्रभावित करता है। इसका असर भारत समेत कई बड़े तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है।
ऊर्जा बाजार में पहले ही अस्थिरता बढ़ चुकी है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो पेट्रोल-डीजल से लेकर घरेलू गैस तक महंगी हो सकती है। इसके अलावा, शिपिंग कंपनियों के लिए भी जोखिम और लागत दोनों बढ़ जाएंगे, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ना तय है।
कुल मिलाकर, युद्ध के इस नए मोर्चे ने साफ कर दिया है कि अब लड़ाई सिर्फ जमीन या आसमान में नहीं, बल्कि समुद्री रास्तों और आर्थिक दबाव के जरिए भी लड़ी जा रही है। आने वाले दिनों में यह संकट कितना गहराएगा, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

