भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (ICC) द्वारा आयोजित ‘कृषि विक्रम – विकसित कृषि, विकसित भारत 2047’ राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन 23 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के ले मेरिडियन होटल में किया गया। सम्मेलन में केंद्र सरकार के मंत्री, नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लेकर भारतीय कृषि को भविष्य के लिए तैयार करने की रणनीतियों पर व्यापक चर्चा की।
सम्मेलन का आयोजन भारत के कृषि क्षेत्र को अधिक तकनीक आधारित, टिकाऊ, नवाचार केंद्रित और किसान हितैषी बनाने के उद्देश्य से किया गया। कार्यक्रम के रणनीतिक साझेदार स्नेल इंटीग्रल प्राइवेट लिमिटेड रहे। पूरे दिन चले इस सम्मेलन में कृषि उत्पादन से लेकर खाद्य प्रसंस्करण, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल तकनीक, कृषि स्टार्टअप, वैश्विक बाजार और किसानों की आय बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के महानिदेशक डॉ. राजीव सिंह के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन जरूरी है। उन्होंने कृषि को केवल उत्पादन का क्षेत्र न मानकर रोजगार, उद्योग, निर्यात और ग्रामीण विकास की मजबूत आधारशिला बताया।
उद्घाटन सत्र में श्रीकांत गोयनका, मेजर विशाल बख्शी, कपिल मीणा (आईएएस) और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष प्रो. एस. महेंद्र देव ने कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों और भविष्य की चुनौतियों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री जितिन प्रसाद ने कृषि, उद्योग और व्यापार के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत की कृषि को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने के लिए तकनीक, निवेश, अनुसंधान और बाजार तक किसानों की पहुंच को मजबूत करना होगा। उन्होंने कृषि निर्यात बढ़ाने, कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन देने और किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र का विषय ‘भविष्य की खेती: नवाचार, तकनीक और जलवायु अनुकूलता’ रहा। इस सत्र में विशेषज्ञों ने बताया कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र में तकनीक की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होगी। जलवायु परिवर्तन, पानी की कमी और बदलती कृषि परिस्थितियों को देखते हुए क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, प्रिसिजन फार्मिंग, स्मार्ट सिंचाई, संरक्षित खेती और डिजिटल कृषि समाधान अपनाना आवश्यक है।
इस सत्र का संचालन अमित खरे ने किया, जबकि आईसीएआर के उप महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने विशेष संबोधन दिया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों तक तकनीक पहुंचाने के महत्व पर प्रकाश डाला।
तकनीकी सत्र में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कोरोमंडल इंटरनेशनल, आर्या.एजी, ज़ायडेक्स इंडस्ट्रीज, भारत सर्टिस एग्रीसाइंस और बायर क्रॉप साइंस सहित कई प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। विशेषज्ञों ने बताया कि ड्रोन तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेंसर आधारित खेती और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकें खेती की लागत कम करने और उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
सम्मेलन के दौरान आयोजित प्लेनरी सत्र ‘द फ्यूचर ऑफ इंडियन एग्रीकल्चर एंड फूड: रोडमैप टू विकसित भारत 2047’ में भारतीय कृषि और खाद्य क्षेत्र के भविष्य पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि भारत को कृषि क्षेत्र में उत्पादन के साथ-साथ मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
इस सत्र में डॉ. ए.के. त्यागी, डॉ. आर.जी. अग्रवाल, डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय और नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने अपने विचार साझा किए। विशेषज्ञों ने कृषि निर्यात, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, कृषि आपूर्ति श्रृंखला, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करने की जरूरत बताई।
वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कृषि क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि किसानों को बेहतर बाजार, आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और मूल्य संवर्धन की सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव होगी।
सम्मेलन के विशेष प्लेनरी सत्र में केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की संभावनाओं और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग किसानों और बाजार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है, जो कृषि उत्पादों को बेहतर मूल्य दिलाने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने कृषि आधारित उद्योगों में निवेश बढ़ाने, स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने और युवाओं को कृषि उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सम्मेलन के दौरान कृषि, नवाचार, अनुसंधान और उद्योग क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों को सम्मानित भी किया गया। आयोजकों ने कहा कि ऐसे सम्मान कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रोत्साहित करते हैं और नए नवाचारों को बढ़ावा देते हैं।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और नेटवर्किंग हाई-टी के साथ हुआ, जिसमें उद्योग जगत, वैज्ञानिक समुदाय और नीति निर्माताओं ने भविष्य के सहयोग और साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा की।
‘कृषि विक्रम – विकसित कृषि, विकसित भारत 2047’ सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारत की विकास यात्रा में कृषि क्षेत्र केवल पारंपरिक आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार और उद्योग आधारित विकास का प्रमुख स्तंभ है। सम्मेलन में सामने आए विचार और सुझाव आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि को अधिक टिकाऊ, स्मार्ट और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

