वाणिज्य विभाग ने निर्यातकों को राहत देने और व्यापार प्रक्रिया को अधिक सरल बनाने के उद्देश्य से निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट (आरओडीटीईपी) योजना की संशोधित अनुसूची अधिसूचित की है। 30 अप्रैल, 2026 को जारी अधिसूचना संख्या 15/2026-27 के तहत यह बदलाव किए गए हैं, जो सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम, 1975 की प्रथम अनुसूची में वित्त अधिनियम, 2026 के माध्यम से हुए संशोधनों के अनुरूप हैं।
यह संशोधन मुख्य रूप से घरेलू टैरिफ क्षेत्र (डीटीए) से होने वाले निर्यात और अग्रिम प्राधिकरण (एए), निर्यात उन्मुख इकाइयों (ईओयू) तथा विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड) की इकाइयों द्वारा किए जाने वाले निर्यात पर लागू होंगे। इसके तहत परिशिष्ट 4आर में आवश्यक बदलाव किए गए हैं, जिससे निर्यात प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जा सके।
नई अधिसूचना के अनुसार, कुल 194 टैरिफ लाइनों में बदलाव किया गया है। इनमें 142 नई 8-अंकीय शुल्क लाइनों को शामिल किया गया है, जबकि 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 लाइनों के विवरण में संशोधन किया गया है। टैरिफ लाइनों का अर्थ उन विशेष श्रेणियों से है, जिनके आधार पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क और कर निर्धारित किए जाते हैं। इस तकनीकी अपडेट का उद्देश्य सीमा शुल्क ढांचे और आरओडीटीईपी अनुसूचियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से 1 मई, 2026 से सीमा शुल्क की स्वचालित प्रणाली में आरओडीटीईपी लाभों का सुचारू क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। इससे न केवल उत्पादों के वर्गीकरण से जुड़ी अस्पष्टताएं कम होंगी, बल्कि सीमा शुल्क प्रविष्टियों और आरओडीटीईपी अनुसूचियों के बीच एकरूपता भी स्थापित होगी। परिणामस्वरूप, पात्र निर्यातकों के दावों के प्रसंस्करण में तेजी आएगी और अनावश्यक देरी से बचा जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम निर्यातकों के लिए “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे सिस्टम-स्तर पर मौजूद विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी और निर्यातकों को मिलने वाली छूट की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुसंगत बनेगी।
आरओडीटीईपी योजना का उद्देश्य निर्यातित उत्पादों पर लगने वाले उन शुल्कों, करों और लेवी की भरपाई करना है, जो अन्य किसी योजना के तहत वापस नहीं मिल पाते। ऐसे में इस योजना के तहत समय-समय पर किए जाने वाले संशोधन निर्यात प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, वाणिज्य विभाग का यह कदम भारत के निर्यात ढांचे को और अधिक आधुनिक, पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को भी मजबूती मिलेगी।

