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पंचायती राज मंत्रालय ने राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों के लिए कार्यक्रम का उद्घाटन किया

Fiza by Fiza
July 2, 2024
in अन्य
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पंचायती राज मंत्रालय ने राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों के लिए कार्यक्रम का उद्घाटन किया
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ֆ:श्री भारद्वाज ने जोर देकर कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग से अनुदान के साथ शुरू की गई परियोजनाओं का उद्घाटन या उनका अनावरण न केवल व्यापक मान्यता प्राप्त करेगा, बल्कि अन्य पंचायतों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने आगे कहा, “स्वामित्व योजना को लागू करके और संपत्ति कर संग्रह की प्रक्रिया को स्वयं के स्रोत राजस्व (ओएसआर) पहलों के साथ जोड़कर, हम पंचायतों की आय बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।” श्री भारद्वाज ने प्रतिभागियों को अन्य पंचायतों को प्रेरित करने के लिए उनके सीखने और अनुभवों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया।आईआईपीए के महानिदेशक श्री एस.एन. त्रिपाठी, एमओपीआर के अपर सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमार, एमओपीआर के संयुक्त सचिव श्री विकास आनंद और आईआईपीए के प्रोफेसर डॉ. वी.एन. आलोक की उपस्थिति ने इस उद्घाटन सत्र की शोभा बढ़ाई। 1 जुलाई से 5 जुलाई 2024 तक चलने वाले इस पांच दिवसीय आवासीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम में 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 50 से अधिक राज्य नोडल अधिकारी (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधक (एसपीएम) भाग ले रहे हैं।


§ֆ:अपने संबोधन में, श्री एस. एन. त्रिपाठी ने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीटी) की दिशा में पंचायती राज मंत्रालय की अभिनव पहलों की सराहना की। उन्होंने स्थानीय कार्रवाई में वैश्विक परिप्रेक्ष्य लाते हुए सतत विकास लक्ष्यों (एलएसडीजी) के स्थानीयकरण की अवधारणा के माध्यम से गांवों में समावेशी, समग्र और सतत विकास कार्यों को वैश्विक लक्ष्यों के साथ जोड़ने में एमओपीआर के दूरदर्शी प्रयासों पर रोशनी डाली। महानिदेशक महोदय ने इस बात पर बल दिया कि मंत्रालय के निरंतर प्रयासों से पंचायतों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके सराहनीय कार्यों के लिए मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने, आईआईएम अहमदाबाद में पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान करने की पंचायती राज मंत्रालय की पहल की सराहना करते हुए, इसे नवप्रवर्तनकारी और पथ-प्रदर्शक बताया।डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने अपने भाषण में मंत्रालय द्वारा निरंतर संवाद, सहायता और आउटरीच के साधन के रूप में ऐसे पुनश्चर्या पाठ्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने सेवा वितरण, पंचायत विकास योजनाओं (पीडीपी) की गुणवत्ता, वित्तीय प्रबंधन पर सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से डिजिटल शासन के सकारात्मक प्रभावों का उल्लेख किया।श्री विकास आनंद ने इस तरह के पहले पुनश्चर्या प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य प्रतिभागियों की क्षमता, कौशल विकास, नेतृत्व क्षमता और उनके प्रदर्शन को बेहतर करना है।


§ֆ: उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित सशक्त, विकसित और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के सपने को प्राप्त करने के लिए समन्वित प्रयासों और निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में नेतृत्व कौशल, टीमवर्क, संघर्ष प्रबंधन, संचार कौशल, मीडिया संबंध, सामुदायिक जुड़ाव, संकट संचार तथा विभिन्न पहलों जैसे ई-ग्राम स्वराज, पीएफएमएस, टीएमपी, ओएसआर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल हैं। प्रशिक्षण में वार्षिक कार्य योजनाओं की तैयारी, आरजीएसए के तहत प्रगति की रिपोर्टिंग और ऑडिट ऑनलाइन, मेरी पंचायत और पंचायत निर्णय जैसे पोर्टलों का उपयोग भी शामिल है।पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य विकासात्मक और नैदानिक दृष्टिकोणों के माध्यम से प्रतिभागियों की नेतृत्व क्षमताओं को बढ़ाना, सुधार के क्षेत्रों की पहचान करना और आवश्यक शासन कौशल को बेहतर बनाना है। प्रशिक्षण पूरा होने पर, प्रतिभागियों से अपेक्षा की जाती है कि वे: (i) अपनी टीमों को उच्च प्रदर्शन और प्रभावशीलता के लिए नेतृत्व प्रदान करें, (ii) स्थानीय शासन में समकालीन नेतृत्व अवधारणाओं की गहन समझ हासिल करें, (iii) महान लोक सेवकों के समान अपने स्वयं के नेतृत्व गुणों की पहचान करें, (iv) अपने पंचायतों के भीतर एक लचीले और चुस्त प्रशासन को बढ़ावा देने के लिए संसाधनों को रणनीतिक रूप से संरेखित करें और (v) अधिक प्रभावी कामकाज के लिए अपने कौशल सेट्स को बेहतर करें।


§पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए), नई दिल्ली में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) के तहत राज्य नोडल अधिकारियों (एसएनओ) और राज्य कार्यक्रम प्रबंधकों (एसपीएम) के लिए एक पांच दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।श्री भारद्वाज ने अपने मुख्य भाषण में प्रतिभागियों से समर्पण और गुणवत्तापूर्ण कार्य के माध्यम से ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने प्रतिभागियों से अपनी क्षमता को पहचानने, लोगों की आकांक्षाओं को समझने और अपने प्रदर्शन में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने के लिए आवश्यक अपार मानवीय क्षमता, दृढ़ संकल्प और भावावेशपूर्ण आकांक्षा पर रोशनी डाली।श्री भारद्वाज ने जोर देते हुए कहा, “पंचायतों के पास संसाधनों और धन की कमी नहीं है; क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण (सीबीटी) पहलों में महत्वपूर्ण निवेश किया जा रहा है। वास्तविक जरूरत इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों को जमीनी स्तर पर देखने की है।” सचिव महोदय ने मानसिकता में सकारात्मक बदलाव के माध्यम से गुणवत्ता और ठोस परिणाम सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की वकालत की। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि कैसे सकारात्मक मानसिकता के साथ परिवर्तनकारी प्रथाओं, मजबूत और सार्थक संस्थानों की स्थापना कर सकते हैं, जो आत्मनिर्भर हैं।

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