Monsoon Cow Care: बारिश का मौसम खेती के लिए जितना महत्वपूर्ण है, पशुपालकों के लिए उतना ही सावधानी बरतने वाला समय भी है। मानसून में वातावरण में नमी बढ़ जाती है, पशुशाला में पानी और कीचड़ जमा होने की समस्या हो सकती है और चारा भी जल्दी खराब हो सकता है। ऐसे वातावरण में गायों में संक्रमण, बाहरी और अंदरूनी परजीवी तथा थन से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) ने भी बरसात के मौसम में डेयरी पशुओं के लिए आवास, आहार, स्वास्थ्य और प्रजनन प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। NDDB के मुताबिक इस मौसम में परजीवी संक्रमण और थनैला यानी मास्टाइटिस जैसी समस्याएं ज्यादा देखने को मिल सकती हैं। (NDDB)
ऐसे में पशुपालक थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतकर गाय को स्वस्थ रखने के साथ दूध उत्पादन पर पड़ने वाले बुरे असर को भी कम कर सकते हैं। आइए आसान भाषा में जानते हैं कि बरसात के दौरान गाय की देखभाल में कौन-कौन सी बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।
1. गाय के शेड को सूखा रखना सबसे जरूरी
मानसून में गाय की देखभाल की शुरुआत उसके रहने की जगह से होती है। गाय को ऐसी जगह बांधना चाहिए जहां बारिश का पानी सीधे अंदर न आए और पानी जमा न हो।शेड की छत से पानी टपक रहा है तो उसकी समय रहते मरम्मत करानी चाहिए। फर्श ऐसा होना चाहिए जिससे पानी आसानी से बाहर निकल जाए। नाली बंद नहीं होनी चाहिए और गोबर तथा दूसरे कचरे को नियमित रूप से हटाना चाहिए।
ICAR की सलाह में भी पशुओं को अधिक नमी और गर्मी से बचाने के लिए पर्याप्त छाया, हवा की आवाजाही और साफ पीने का पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। (Indian Council of Agricultural Research) गाय के बैठने वाली जगह लगातार गीली रहने से त्वचा, खुर और थनों से जुड़ी परेशानियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बिछावन भी साफ और सूखा रखा जाए।
2. शेड में हवा की आवाजाही बनी रहे
बारिश से बचाने के चक्कर में पशुशाला को चारों तरफ से पूरी तरह बंद कर देना सही नहीं है। बंद और नम जगह में उमस बढ़ सकती है।शेड ऐसा होना चाहिए जहां बारिश का पानी अंदर न आए, लेकिन पर्याप्त वेंटिलेशन बना रहे। हवा आने-जाने से शेड में नमी और दुर्गंध कम करने में मदद मिलती है। गायों को भीड़ में रखने से बचना चाहिए। पशुओं को बैठने और आराम करने के लिए पर्याप्त जगह मिलनी चाहिए।
3. साफ पानी का रखें विशेष ध्यान
बारिश के दिनों में आसपास पानी बहुत दिखाई देता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि गाय को पीने के लिए साफ पानी आसानी से मिल रहा है।गाय को हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराएं। नाली, गड्ढे या दूसरी दूषित जगहों पर जमा पानी पीने से रोकें। पानी के बर्तन और टंकी को नियमित रूप से साफ करना भी जरूरी है। ICAR और NDDB दोनों की पशुपालन संबंधी सलाह में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को पशु स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)
4. बारिश में हरे चारे को लेकर न करें यह गलती
मानसून में हरा चारा आसानी से उपलब्ध होता है। कई पशुपालक इस वजह से गाय को बहुत अधिक मात्रा में केवल हरा चारा देने लगते हैं।यह तरीका सही नहीं है। NDDB के अनुसार बारिश के मौसम में हरे चारे की अधिक उपलब्धता के कारण आहार व्यवस्था में बदलाव से पाचन और दूध की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। (NDDB)ICAR की खरीफ पशुपालन सलाह में गाय-भैंस को हरे चारे के साथ सूखे चारे का संतुलित मिश्रण देने की सलाह दी गई है। (Indian Council of Agricultural Research)
इसलिए गाय के आहार में हरा चारा, सूखा चारा और उसकी जरूरत के अनुसार संतुलित पशु आहार शामिल होना चाहिए। दूध देने वाली, गर्भवती और बढ़ते बछड़े वाली गायों की पोषण जरूरतें अलग हो सकती हैं। सही मात्रा तय करने के लिए पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह बेहतर रहती है।
5. फफूंद लगा या सड़ा चारा बिल्कुल न खिलाएं
बारिश में चारा और दाना नमी पकड़कर जल्दी खराब हो सकते हैं। कई बार ऊपर से चारा ठीक दिखाई देता है लेकिन अंदर नमी और फफूंद हो सकती है।इसलिए भूसा, दाना और पशु आहार को जमीन पर सीधे रखने के बजाय सूखी और ऊंची जगह पर रखें। भंडारण वाली जगह में पानी नहीं आना चाहिए।चारे से असामान्य गंध आ रही हो, उसमें फफूंद दिखाई दे या वह सड़ गया हो तो उसे गाय को न खिलाएं। हाल की पशुपालन सलाह में भी बरसात के दौरान गीले, सड़े और फफूंद लगे चारे से बचने की सलाह दी गई है। (Live Hindustan)
6. मिनरल मिक्सचर और संतुलित पोषण भी जरूरी
गाय को स्वस्थ रखने के लिए केवल पेट भरना पर्याप्त नहीं है। आहार में जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन होना चाहिए।ICAR की खरीफ सलाह में दूध देने वाले पशुओं के आहार में हरे और सूखे चारे के संतुलन के साथ खनिज मिश्रण का भी उल्लेख किया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)
हालांकि मिनरल मिक्सचर या दूसरे सप्लीमेंट की सही मात्रा पशु की उम्र, वजन, दूध उत्पादन और स्वास्थ्य पर निर्भर कर सकती है। इसलिए किसी भी सप्लीमेंट की मात्रा पशु चिकित्सक या योग्य विशेषज्ञ की सलाह से तय करना बेहतर है।
7. थनैला यानी Mastitis से बचाव पर दें ध्यान
दुधारू गायों में मानसून के दौरान थनैला या मास्टाइटिस बड़ी चिंता हो सकती है। गंदे और गीले फर्श तथा दूध निकालने के दौरान खराब साफ-सफाई से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।NDDB ने भी बरसात में मास्टाइटिस की घटनाओं को एक महत्वपूर्ण समस्या बताया है। (NDDB)
दूध निकालने से पहले हाथ साफ रखें और थनों की सफाई तथा उन्हें सुखाने का ध्यान रखें। दूध निकालने के बर्तन भी साफ होने चाहिए। गाय के बैठने की जगह को साफ और सूखा रखना खास तौर पर जरूरी है।अगर थन में सूजन, असामान्य गर्माहट या दर्द दिखाई दे, दूध में अचानक बदलाव नजर आए या दूध उत्पादन अचानक घट जाए तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
8. खुरों की नियमित जांच करें
लगातार गीली और कीचड़ वाली जमीन गाय के खुरों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। इसलिए गाय को लंबे समय तक कीचड़ में खड़ा न रहने दें।खुरों में सूजन, घाव, बदबू या चलते समय लंगड़ापन दिखाई दे तो इसे नजरअंदाज न करें। ICAR की मानसून संबंधी सलाह में भी खुरों की देखभाल और फुट रॉट से बचाव के उपायों का उल्लेख किया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)किसी तरह की दवा या रासायनिक घोल इस्तेमाल करने से पहले पशु चिकित्सक से सही तरीका और मात्रा जरूर पूछें।
9. किलनी, मक्खी और दूसरे परजीवियों से बचाव
बरसात में नमी बढ़ने के साथ मक्खी, मच्छर, किलनी और दूसरे परजीवियों की समस्या बढ़ सकती है। पशुशाला में गोबर, गंदा पानी और कचरा जमा रहने पर स्थिति और खराब हो सकती है। इसलिए शेड और आसपास के क्षेत्र को साफ रखें। गाय के शरीर पर किलनी या दूसरे बाहरी परजीवियों की नियमित जांच करें।ICAR की खरीफ पशुपालन सलाह में परजीवी नियंत्रण और जरूरत के अनुसार जांच आधारित कृमिनाशन पर जोर दिया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)परजीवी मारने वाली दवा का मनमाने ढंग से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सही दवा और उसकी मात्रा पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही रखें।
10. कृमिनाशन को नजरअंदाज न करें
मानसून में दूषित और गीले वातावरण के कारण अंदरूनी परजीवियों की समस्या भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसका असर गाय की भूख, वजन, स्वास्थ्य और उत्पादन पर पड़ सकता है।हर गाय को एक ही समय और एक ही दवा देना जरूरी नहीं होता। ICAR ने मल जांच के आधार पर कृमिनाशक देने की सलाह भी दी है, जिससे बिना जरूरत दवा देने से बचा जा सके। (Indian Council of Agricultural Research)इसलिए अपने क्षेत्र के पशु चिकित्सक से गाय के लिए उचित कृमिनाशन कार्यक्रम की जानकारी लें।
11. टीकाकरण समय पर करवाएं
बारिश के मौसम में बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण बेहद महत्वपूर्ण है। खुरपका-मुंहपका यानी FMD, गलघोंटू यानी HS और लंगड़ा बुखार जैसे रोगों के खिलाफ क्षेत्र और सरकारी कार्यक्रम के अनुसार टीकाकरण कराया जाता है। ICAR की सलाह में गाय और भैंस के लिए गलघोंटू, लंगड़ा बुखार और खुरपका-मुंहपका के टीकाकरण पर विशेष जोर दिया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)
टीके का सही समय क्षेत्र, पशु की उम्र, पहले लगे टीकों और सरकारी पशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए स्थानीय पशु चिकित्सालय से गाय का टीकाकरण रिकॉर्ड जांचकर अगली तारीख तय कराएं।
12. बीमार गाय को दूसरे पशुओं से अलग रखें
अगर किसी गाय में संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे बाकी स्वस्थ पशुओं से अलग रखना बेहतर होता है। उसके चारा-पानी के बर्तन भी अलग रखे जा सकते हैं। बीमार पशु की देखभाल के बाद हाथ और इस्तेमाल किए गए उपकरण साफ करें। इससे संक्रमण के फैलाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
13. दूध में अचानक कमी को हल्के में न लें
दूध उत्पादन अचानक कम होना केवल चारे की समस्या नहीं है। यह बीमारी, तनाव, थन संक्रमण या दूसरी स्वास्थ्य समस्या का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।अगर गाय अचानक कम दूध देने लगे, सुस्त हो जाए, चारा खाना कम कर दे या व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई दे तो कारण का पता लगाना जरूरी है। हाल की पशु स्वास्थ्य सलाह में दूध की मात्रा अचानक कम होना, सुस्ती, खाना-पीना छोड़ना और लंगड़ापन जैसे संकेतों पर पशु चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
14. बछड़ों पर दें अतिरिक्त ध्यान
बरसात में छोटे बछड़ों को भी साफ, सूखी और हवादार जगह की जरूरत होती है। उन्हें बारिश में भीगने और लगातार गीले फर्श पर रहने से बचाएं।
बछड़े के खाने-पीने में कमी, दस्त, खांसी, कमजोरी या ज्यादा सुस्ती दिखाई दे तो पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। छोटे बछड़ों में बीमारी की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है, इसलिए देरी न करें।
15. बिजली और भारी बारिश के दौरान खुले में न छोड़ें
तेज बारिश, आंधी या बिजली चमकने के समय गायों को खुले मैदान में छोड़ना जोखिम भरा हो सकता है। उन्हें सुरक्षित और मजबूत शेड में रखें। पशुशाला में खुले बिजली के तार, खराब स्विच या पानी के संपर्क में आने वाले बिजली उपकरण नहीं होने चाहिए। जलभराव वाली जगहों से पशुओं को दूर रखें।
बाढ़ की आशंका वाले क्षेत्रों में चारा, पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की व्यवस्था और स्थानीय पशु चिकित्सा संपर्क की जानकारी पहले से रखना उपयोगी है। ICAR की सलाह में भी आपदा की स्थिति के लिए पशु चिकित्सा संपर्क और चारे की अग्रिम व्यवस्था पर जोर दिया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)
इन लक्षणों को देखते ही पशु चिकित्सक से करें संपर्क
पशुपालक को रोज गाय को कुछ मिनट ध्यान से देखना चाहिए। अगर गाय खाना छोड़ दे, बहुत सुस्त दिखाई दे, दूध अचानक कम हो जाए, चलने में परेशानी हो, खुर या थन में सूजन दिखे, लगातार दस्त हों या स्वास्थ्य में कोई तेज बदलाव दिखाई दे तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें।बीमारी का घरेलू इलाज करने या बिना सलाह के दवा देने से बचें। सही समय पर बीमारी की पहचान और उपचार से गंभीर स्थिति से बचने की संभावना बढ़ जाती है।
मानसून में गाय की देखभाल का आसान फॉर्मूला
बरसात के दौरान गाय की अच्छी देखभाल को पांच मुख्य बातों में समझा जा सकता है: सूखा और साफ शेड, साफ पानी, संतुलित एवं सुरक्षित चारा, समय पर टीकाकरण व परजीवी नियंत्रण और रोजाना स्वास्थ्य की निगरानी। NDDB के मुताबिक बरसात में डेयरी पशुओं के बेहतर प्रबंधन के लिए आवास, भोजन, स्वास्थ्य और प्रजनन जैसे सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। (NDDB)
निष्कर्ष
मानसून में गायों की देखभाल में थोड़ी सी लापरवाही बड़ी समस्या बन सकती है। गीला फर्श, गंदा पानी, फफूंद लगा चारा, खराब साफ-सफाई और बीमारी के शुरुआती लक्षणों की अनदेखी पशु की सेहत के साथ दूध उत्पादन को भी प्रभावित कर सकती है।
इसके उलट शेड को साफ और सूखा रखने, पर्याप्त हवा की व्यवस्था करने, साफ पानी और संतुलित आहार देने, खुर और थनों की नियमित जांच करने तथा स्थानीय पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार टीकाकरण और परजीवी नियंत्रण करने से बरसात के मौसम में गायों को स्वस्थ रखने में काफी मदद मिल सकती है।
पशुपालकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इलाज से ज्यादा जोर बीमारी की रोकथाम पर दिया जाए। गाय के व्यवहार, चारा खाने की मात्रा, दूध उत्पादन और चलने-फिरने पर रोज नजर रखें। किसी भी असामान्य बदलाव पर समय रहते पशु चिकित्सक की मदद लें।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सामान्य पशुपालन जानकारी और ICAR तथा NDDB की उपलब्ध सलाह पर आधारित है। पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर योग्य पशु चिकित्सक से जांच कराएं। दवा, टीका, कृमिनाशक या किसी रासायनिक उपचार का इस्तेमाल पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही करें।

