• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

Buffalo Farming Rainy Season: जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, पशुपालक इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान

Buffalo Farming Rainy Season: Even Slight Negligence Can Prove Costly; Livestock Farmers Should Pay Special Attention to These Important Points.

Fiza by Fiza
August 18, 2026
in कृषि समाचार
0
Buffalo Farming Rainy Season

Buffalo Farming Rainy Season

0
SHARES
0
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

Buffalo Farming Rainy Season: बरसात का मौसम किसानों और पशुपालकों के लिए राहत लेकर आता है। खेतों में हरियाली बढ़ती है और हरे चारे की उपलब्धता भी बेहतर हो जाती है। लेकिन यही मौसम भैंस पालकों के लिए कई तरह की परेशानियां भी पैदा कर सकता है। लगातार बारिश, अधिक नमी, कीचड़, गंदा पानी, मच्छर-मक्खियां और गीला पशुशाला का फर्श पशुओं की सेहत पर असर डाल सकता है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही दूध उत्पादन से लेकर पशु के स्वास्थ्य तक को प्रभावित कर सकती है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की पशुपालन संबंधी सलाह में भी बरसात के आसपास पशुओं के टीकाकरण, संतुलित आहार, खुरों की देखभाल और थन की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। (Indian Council of Agricultural Research) इसलिए मानसून में भैंस पालन करते समय केवल चारे पर ध्यान देना काफी नहीं है। पशुशाला, पानी, दूध दुहने की सफाई, बीमारी की पहचान और टीकाकरण जैसी कई बातों का एक साथ ध्यान रखना जरूरी है।

बरसात में सबसे जरूरी है पशुशाला को सूखा रखना

मानसून में पशुपालक की पहली प्राथमिकता भैंस के रहने की जगह होनी चाहिए। पशुशाला में बारिश का पानी जमा नहीं होना चाहिए। छत टपक रही है तो उसकी मरम्मत कराएं। नालियां साफ रखें ताकि पानी और पशुओं का मल-मूत्र आसानी से बाहर निकल सके।

ICAR के केंद्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (CIRB) की जानकारी के मुताबिक पशुओं के लिए साफ-सफाई, उचित जल निकासी, हवादार शेड और ऐसा फर्श जरूरी है जिसे आसानी से साफ किया जा सके। फर्श फिसलन वाला नहीं होना चाहिए और उसमें पानी निकलने के लिए हल्की ढलान होनी चाहिए। (BuffaloPedia New)

बरसात में फर्श लगातार गीला रहने से भैंस को आराम करने में परेशानी होती है। खुर भी लंबे समय तक नमी और गंदगी के संपर्क में रहते हैं। इसलिए गोबर और गंदगी नियमित रूप से हटाएं और जहां पशु बैठता है उस जगह को यथासंभव साफ और सूखा रखें।

जलभराव और कीचड़ को न करें नजरअंदाज

कई पशुपालक पशुशाला के अंदर तो सफाई रखते हैं, लेकिन आसपास जमा पानी पर ध्यान नहीं देते। यह गलती मानसून में परेशानी बढ़ा सकती है। शेड के प्रवेश द्वार, चारे की नांद, पानी के स्थान और पशु के बांधने की जगह के आसपास कीचड़ जमा नहीं होने देना चाहिए।

लगातार कीचड़ में खड़े रहने से खुरों से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ICAR की खरीफ कृषि सलाह में पशुओं के खुरों की नियमित देखभाल और फुट रॉट यानी खुर सड़ने की समस्या को कम करने के लिए निर्धारित पशु-स्वास्थ्य उपायों पर जोर दिया गया है। (Indian Council of Agricultural Research) यदि भैंस चलते समय लंगड़ाने लगे, बार-बार पैर उठाए, खुर के आसपास सूजन दिखाई दे या चलने से बचे तो इसे सामान्य बात समझकर छोड़ना ठीक नहीं है। पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।

साफ पीने का पानी हर समय उपलब्ध रखें

बारिश का मतलब यह नहीं है कि पशु को साफ पानी की जरूरत कम हो गई। दूध देने वाली भैंस के लिए पर्याप्त स्वच्छ पेयजल बेहद महत्वपूर्ण है। पानी की टंकी या हौद नियमित रूप से साफ करें। उसमें गोबर, काई या दूसरी गंदगी जमा न होने दें। CIRB की पशु प्रबंधन संबंधी जानकारी में भैंसों को पर्याप्त मात्रा में ताजा और साफ पानी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। बरसात में आसपास पानी भरा होने के कारण पशु कई बार गंदे स्रोत से भी पानी पी सकता है। इसलिए पशुपालक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भैंस की पहुंच साफ पेयजल तक हो।

हरा चारा ज्यादा है तो भी संतुलन जरूरी

मानसून में खेतों और चारागाहों में हरे चारे की उपलब्धता बढ़ जाती है। इसका फायदा जरूर उठाना चाहिए, लेकिन केवल हरे चारे के भरोसे पशु का पूरा पोषण नहीं छोड़ा जा सकता।

ICAR की सलाह के अनुसार गाय-भैंस के राशन में हरे चारे के साथ सूखा चारा और पशु की जरूरत व दूध उत्पादन के अनुसार संतुलित आहार शामिल होना चाहिए। (Indian Council of Agricultural Research)

चारे में अचानक बड़ा बदलाव करने से भी बचना चाहिए। पशु को नया चारा धीरे-धीरे उसकी सामान्य खुराक में शामिल करके देना बेहतर रहता है। दूध देने वाली, गर्भवती, बढ़ते बछड़े और सूखी भैंस की पोषण जरूरतें अलग-अलग होती हैं। इसलिए सभी पशुओं को एक जैसी मात्रा में दाना देना सही तरीका नहीं है। खनिज मिश्रण और नमक की जरूरत भी पशु के आहार और उत्पादन के अनुसार होती है। इसकी सही मात्रा के लिए स्थानीय पशु चिकित्सक या पशुपोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

सड़ा, फफूंद लगा या गीला चारा बिल्कुल न खिलाएं

मानसून में चारे को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। बारिश की नमी से भूसा, दाना और दूसरे सूखे पशु आहार में फफूंद लग सकती है। इसलिए चारे को ऐसी जगह रखें जहां छत से पानी न आए और जमीन की नमी चारे तक न पहुंचे।

चारा सीधे गीली जमीन पर रखने के बजाय ऊंचे और सूखे स्थान पर रखें। यदि दाने या भूसे से असामान्य गंध आ रही हो, उसमें फफूंद दिखाई दे रही हो या वह खराब हो चुका हो तो उसे पशु को न खिलाएं। हरे चारे को काटकर लंबे समय तक ढेर में भी न छोड़ें। नांद में बचा हुआ खराब चारा नियमित रूप से हटाते रहें। साफ नांद में ताजा चारा देने की आदत पशु की सेहत के लिए बेहतर है।

मानसून से पहले टीकाकरण पर दें ध्यान

बरसात के मौसम में बीमारी से बचाव का सबसे मजबूत तरीका समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य निगरानी है।ICAR की 2025 खरीफ कृषि सलाह में गाय और भैंस के लिए हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया यानी गलघोंटू और ब्लैक क्वार्टर के खिलाफ मई-जून में टीकाकरण तथा फुट एंड माउथ डिजीज यानी खुरपका-मुंहपका के लिए मानसून के आसपास निर्धारित टीकाकरण कार्यक्रम अपनाने की सलाह दी गई है। (Indian Council of Agricultural Research)

हालांकि टीकाकरण का वास्तविक कार्यक्रम क्षेत्र, पशु की उम्र, पहले लगाए गए टीकों और सरकारी अभियान के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सक से पशु का टीकाकरण रिकॉर्ड जांचकर सही कार्यक्रम तय करें।

थनैला रोग से बचाव के लिए दूध दुहते समय सफाई जरूरी

दूध देने वाली भैंसों में थन की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बरसात में गीले और गंदे फर्श के कारण थन और शरीर के निचले हिस्से पर गंदगी ज्यादा लग सकती है। दूध दुहने से पहले हाथ साफ करें और थनों को साफ करके अच्छी तरह सुखाएं। ICAR की खरीफ सलाह में दूध दुहने के बाद उचित टीट-डिपिंग जैसे स्वच्छता उपायों को मास्टाइटिस का जोखिम कम करने में उपयोगी बताया गया है। (Indian Council of Agricultural Research)

यदि दूध के रंग या बनावट में अचानक बदलाव दिखे, थन गर्म या सूजा हुआ लगे, दूध उत्पादन अचानक कम हो जाए या पशु को थन छूने पर परेशानी हो तो पशु चिकित्सक से संपर्क करें। बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा या एंटीबायोटिक देना ठीक नहीं है।

मक्खी, मच्छर और दूसरे कीटों पर नियंत्रण रखें

मानसून में पानी और नमी बढ़ने के साथ मक्खी-मच्छरों की संख्या भी बढ़ सकती है। गोबर का ढेर, गंदा पानी और नालियों में जमा कचरा इनके पनपने के लिए अनुकूल वातावरण बना सकता है। इसलिए गोबर नियमित रूप से पशुशाला से बाहर निकालें। नालियों को बंद न होने दें। पानी की टंकियों और आसपास के क्षेत्र को साफ रखें। शेड में हवा का आवागमन भी पर्याप्त होना चाहिए।

CIRB के अनुसार साफ-सफाई और संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों को नियंत्रित करने के लिए पशु आवास की नियमित सफाई महत्वपूर्ण है। बीमार पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने और झुंड की नियमित निगरानी की भी सलाह दी गई है।

बीमार पशु को तुरंत अलग करें

अगर झुंड की किसी भैंस में बीमारी के संकेत दिखाई दें तो उसे दूसरे पशुओं के साथ रखने से बचें। उसके खाने-पीने के बर्तन भी अलग रखने पड़ सकते हैं। CIRB बीमारी की रोकथाम के उपायों में बीमार पशु को अलग रखने, नियमित निरीक्षण और पशु चिकित्सक की निगरानी को महत्वपूर्ण मानता है।

तेज बुखार, लगातार दस्त, खाना छोड़ना, अचानक दूध कम होना, सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती, मुंह या पैरों में असामान्य घाव, खुर में सूजन या लंगड़ापन जैसे लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से जल्द संपर्क करें। बीमारी को खुद पहचानकर मनमाने तरीके से दवा देने के बजाय विशेषज्ञ की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित है।

कृमिनाशक दवा भी चिकित्सकीय सलाह से दें

बारिश और नमी के दौरान परजीवियों से जुड़ी समस्याओं पर भी निगरानी जरूरी है। CIRB की रोग-रोकथाम संबंधी जानकारी नियमित डीवॉर्मिंग को झुंड स्वास्थ्य प्रबंधन का हिस्सा बताती है।

लेकिन पशुपालक को अपनी तरफ से बार-बार कृमिनाशक दवा नहीं देनी चाहिए। दवा का चुनाव, मात्रा और समय पशु की उम्र, वजन, स्थिति और स्थानीय समस्या के आधार पर पशु चिकित्सक से तय कराना बेहतर है।

बछड़ों का रखें ज्यादा ख्याल

छोटे बछड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता वयस्क पशुओं जितनी मजबूत नहीं होती। इसलिए बरसात में उन्हें गीले और ठंडे फर्श पर बैठने से बचाएं। उनके रहने की जगह सूखी, साफ और हवादार होनी चाहिए।

दस्त, कमजोरी, दूध न पीना या सुस्ती जैसे संकेतों को हल्के में न लें। नवजात बछड़े को जन्म के बाद समय पर पर्याप्त खीस यानी कोलोस्ट्रम मिलना भी उसके शुरुआती स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बछड़ों के खाने और पानी के बर्तन साफ रखें और उन्हें बहुत ज्यादा कीचड़ वाली जगह पर न छोड़ें।

गर्भवती भैंस पर रखें विशेष नजर

गर्भवती भैंस को फिसलन वाली जमीन से बचाना जरूरी है। पशुशाला का फर्श ऐसा होना चाहिए जहां पैर आसानी से न फिसलें। CIRB भी भैंस आवास में नॉन-स्लिप और आसानी से साफ किए जा सकने वाले फर्श की सिफारिश करता है।

गर्भावस्था के आखिरी चरण में पशु के लिए साफ और आरामदायक स्थान की व्यवस्था करें। उसके आहार में अचानक बदलाव न करें। प्रसव का समय करीब आने पर पशु पर नियमित नजर रखें और किसी असामान्य स्थिति में पशु चिकित्सक की मदद लें।

बारिश के बाद तेज गर्मी और उमस भी चुनौती

मानसून का मतलब केवल बारिश नहीं है। कई इलाकों में बारिश के बीच तापमान और आर्द्रता दोनों काफी बढ़ जाते हैं। भैंसें गर्मी के प्रति संवेदनशील होती हैं। CIRB के अनुसार अधिक तापमान और आर्द्रता भैंस में गर्मी का तनाव बढ़ा सकती है, जिससे चारा खाने और दूध उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

इसलिए शेड हवादार रखें। साफ पानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। बहुत उमस वाले समय में पशु को बंद और हवा रहित कमरे में बांधकर न रखें। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पशु को ठंडक देने के सुरक्षित उपाय अपनाए जा सकते हैं।

दूध की स्वच्छता का रखें ध्यान

पशुपालक की कमाई सीधे दूध की गुणवत्ता से जुड़ी होती है। इसलिए मानसून में दूध दुहने वाली जगह की सफाई पर समझौता न करें।

दूध दुहने से पहले पशु के थन साफ और सूखे होने चाहिए। दूध के बर्तन भी पूरी तरह साफ हों। दूध में बारिश का पानी, गंदगी, बाल या दूसरी अशुद्धियां नहीं जानी चाहिए। दूध निकालने के बाद उसे साफ ढके हुए बर्तन में रखें और जल्द से जल्द सुरक्षित भंडारण या संग्रह केंद्र तक पहुंचाएं।

पशुशाला में दूध दुहते समय आसपास गोबर हटाना और मक्खियों को नियंत्रित रखना भी साफ दूध उत्पादन में मदद करता है।

रोज कुछ मिनट पशु को ध्यान से देखना जरूरी

बीमारी का जल्दी पता लगाने का सबसे आसान तरीका है कि पशुपालक रोज अपने पशुओं को ध्यान से देखे। CIRB भी बीमारी के संकेतों के लिए पशुओं की लगातार निगरानी को रोग-रोकथाम का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। (BuffaloPedia New)

देखें कि भैंस सामान्य रूप से खा और पानी पी रही है या नहीं। वह जुगाली कर रही है या नहीं। चलने में परेशानी तो नहीं है। गोबर सामान्य है या उसमें बदलाव आया है। दूध उत्पादन अचानक कम तो नहीं हुआ। शरीर, आंखों, नाक, मुंह, थन और खुरों में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं है। रोज की यह छोटी सी आदत गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में पकड़ने में मदद कर सकती है।

मानसून में भैंस पालकों के लिए 10 जरूरी बातें

  1. पशुशाला में बारिश का पानी जमा न होने दें।
  2. फर्श को साफ, सूखा और फिसलन से मुक्त रखें।
  3. भैंस को हर समय साफ पेयजल उपलब्ध कराएं।
  4. गीला, सड़ा या फफूंद लगा चारा न खिलाएं।
  5. हरे चारे के साथ संतुलित आहार का ध्यान रखें।
  6. स्थानीय पशु चिकित्सक से टीकाकरण कार्यक्रम की जांच कराएं।
  7. खुर, थन और त्वचा की नियमित जांच करें।
  8. गोबर, कीचड़ और जमा पानी हटाकर मक्खी-मच्छर नियंत्रित करें।
  9. बीमार पशु को अलग रखें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
  10. बछड़ों, गर्भवती और दूध देने वाली भैंसों पर अतिरिक्त ध्यान दें।

थोड़ी सावधानी से नुकसान से बच सकते हैं पशुपालक

बरसात पशुपालन के लिए अवसर और चुनौती दोनों लेकर आती है। हरा चारा उपलब्ध होने से पशुओं के पोषण में मदद मिल सकती है, लेकिन नमी, गंदगी और जलभराव बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं। इसलिए सफल भैंस पालन की कुंजी केवल ज्यादा चारा खिलाना नहीं, बल्कि साफ पशुशाला, संतुलित आहार, साफ पानी, समय पर टीकाकरण, थन और खुर की देखभाल तथा बीमारी की जल्दी पहचान है।

पशुपालक यदि मानसून शुरू होने से पहले शेड की मरम्मत, नालियों की सफाई और टीकाकरण जैसी तैयारियां पूरी कर लें और बारिश के दौरान रोज पशुओं पर नजर रखें तो कई समस्याओं से बचा जा सकता है। किसी भी बीमारी या असामान्य लक्षण की स्थिति में घरेलू उपचार या बिना सलाह के दवा देने के बजाय योग्य पशु चिकित्सक की मदद लेना सबसे सुरक्षित कदम है।

SEO Title

बरसात में भैंस पालन कैसे करें? मानसून में बीमारी, चारा, शेड और दूध उत्पादन के लिए अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

Meta Description

बरसात में भैंस पालन करते समय पशुशाला की सफाई, जल निकासी, चारा, साफ पानी, टीकाकरण, खुर और थन की देखभाल बेहद जरूरी है। जानें मानसून में भैंसों को स्वस्थ रखने और दूध उत्पादन बचाने के जरूरी उपाय।

Focus Keywords

बरसात में भैंस पालन, Buffalo Farming in Rainy Season, मानसून में पशुपालन, भैंस की देखभाल, भैंस पालन के तरीके, मानसून में पशुओं की बीमारी, भैंस का चारा, भैंस का टीकाकरण, डेयरी फार्मिंग, पशुपालन टिप्स

Tags

भैंस पालन, पशुपालन, Buffalo Farming, Dairy Farming, Monsoon Farming, मानसून, पशु स्वास्थ्य, डेयरी किसान, भैंस की बीमारी, पशुशाला, हरा चारा, पशु टीकाकरण, किसान समाचार, Agriculture News

Tags: Agriculture NewsewsAgriculture NewsपशुपालनAgriculture Nभैंस पालनBuffalo FarmingBuffalo Farming Rainy SeasonDairy farmingMonsoon Farmingकिसान समाचारडेयरी किसानपशु टीकाकरणपशु स्वास्थ्यपशुपालनपशुशालाभैंस की बीमारीभैंस पालनमानसूनहरा चारा
Previous Post

बरसात में गाय की देखभाल: Monsoon Cow Care के दौरान इन जरूरी बातों का रखें खास ख्याल

Recent Posts

  • Buffalo Farming Rainy Season: जरा सी लापरवाही पड़ सकती है भारी, पशुपालक इन जरूरी बातों का रखें खास ध्यान
  • बरसात में गाय की देखभाल: Monsoon Cow Care के दौरान इन जरूरी बातों का रखें खास ख्याल
  • Blue Economy: समुद्र से समृद्धि का नया रास्ता, भारत के लिए क्यों बन रही है अगली बड़ी आर्थिक ताकत?
  • CR Dhan 501 से बदलेगी खेती की तस्वीर: बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए नई हाई-यील्ड धान किस्म बनी किसानों की नई उम्मीद
  • HURL का बड़ा विस्तार प्लान, ग्रीन यूरिया और कोल गैसीफिकेशन की तैयारी

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Quick Links

  • Privacy policy
  • Terms and Conditions

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.