National Mission for a Green India: भारत जैसे बड़े और विविध जलवायु वाले देश में जंगल, पेड़, पानी, मिट्टी और जैव विविधता केवल प्राकृतिक संपदा नहीं हैं, बल्कि जीवन और आजीविका का आधार भी हैं। ग्रीन इंडिया मिशन इसी सोच पर आधारित एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका लक्ष्य देश के वन और वृक्ष आवरण को बढ़ाना, मौजूदा वनों की गुणवत्ता सुधारना और जलवायु परिवर्तन से निपटने में भारत की क्षमता को मजबूत करना है। यह मिशन किसानों, वन-आश्रित समुदायों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
ग्रीन इंडिया मिशन क्या है?
ग्रीन इंडिया मिशन, जिसे National Mission for a Green India या GIM भी कहा जाता है, भारत के National Action Plan on Climate Change के आठ प्रमुख मिशनों में से एक है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत के वन और वृक्ष आवरण को सुरक्षित करना, बढ़ाना और खराब हो चुके जंगलों को फिर से बेहतर स्थिति में लाना है। यह मिशन जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए adaptation और mitigation दोनों तरीकों पर काम करता है। आधिकारिक मिशन दस्तावेज के अनुसार, इसका उद्देश्य कार्बन सिंक बढ़ाना, कमजोर पारिस्थितिकी तंत्रों को मजबूत करना और वन-आश्रित समुदायों की आजीविका को बेहतर बनाना है।
सरल शब्दों में कहें तो ग्रीन इंडिया मिशन केवल पौधे लगाने की योजना नहीं है। यह एक व्यापक रणनीति है, जिसमें जंगलों की गुणवत्ता सुधारना, नदियों और जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण, मिट्टी की नमी बचाना, जैव विविधता को सुरक्षित रखना और स्थानीय समुदायों को रोजगार व आय के अवसर देना शामिल है।
ग्रीन इंडिया मिशन की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में तेजी से बढ़ती आबादी, शहरीकरण, औद्योगिक विकास, खेती का विस्तार, वन कटाई, चराई दबाव और जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। कई क्षेत्रों में जंगलों की गुणवत्ता घट रही है, जल स्रोत कमजोर हो रहे हैं और मिट्टी का क्षरण बढ़ रहा है।
इसी कारण ग्रीन इंडिया मिशनhttps://fasalkranti.in/ जैसे कार्यक्रम की जरूरत महसूस हुई, ताकि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जा सके। National Forest Policy 1988 में देश के कम से कम एक-तिहाई भू-भाग को वन या वृक्ष आवरण के अंतर्गत लाने की कल्पना की गई है। वर्तमान में India State of Forest Report 2023 के अनुसार भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है।
इस आंकड़े से साफ है कि भारत ने हरित आवरण बढ़ाने में प्रगति की है, लेकिन 33 प्रतिशत के राष्ट्रीय लक्ष्य तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता बाकी है। ऐसे में ग्रीन इंडिया मिशन देश की पर्यावरण नीति का अहम हिस्सा बन जाता है।
ग्रीन इंडिया मिशन का उद्देश्य
ग्रीन इंडिया मिशन का उद्देश्य केवल जंगल बढ़ाना नहीं, बल्कि जंगलों को स्वस्थ और उपयोगी बनाना है। इस मिशन में पर्यावरण, जलवायु, आजीविका और ग्रामीण विकास को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।
| प्रमुख उद्देश्य | इसका महत्व |
|---|---|
| वन और वृक्ष आवरण बढ़ाना | हरित क्षेत्र बढ़ेगा और तापमान नियंत्रण में मदद मिलेगी |
| खराब वनों की गुणवत्ता सुधारना | जैव विविधता, मिट्टी और जल संरक्षण मजबूत होगा |
| कार्बन सिंक बनाना | जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायता मिलेगी |
| वन आधारित आजीविका बढ़ाना | ग्रामीण और वन-आश्रित परिवारों की आय बढ़ेगी |
| जल और मिट्टी संरक्षण | खेती, भूजल और प्राकृतिक संसाधनों को लाभ होगा |
| एग्रोफॉरेस्ट्री को बढ़ावा | किसानों को अतिरिक्त आय और पर्यावरणीय सुरक्षा मिलेगी |
आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार, मिशन का शुरुआती उद्देश्य 5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में वन और वृक्ष आवरण बढ़ाना तथा 5 मिलियन हेक्टेयर मौजूदा वन क्षेत्र की गुणवत्ता सुधारना था। इसके साथ ही 10 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में पारिस्थितिकी सेवाओं को बेहतर करने और लगभग 3 मिलियन परिवारों की वन-आधारित आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था।
ग्रीन इंडिया मिशन और जलवायु परिवर्तन
आज जलवायु परिवर्तन खेती, पानी, स्वास्थ्य और ग्रामीण जीवन पर सीधा असर डाल रहा है। कभी सूखा, कभी बाढ़, कभी अत्यधिक गर्मी और कभी अनियमित बारिश किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। ऐसे समय में ग्रीन इंडिया मिशन प्राकृतिक समाधान प्रदान करता है।
पेड़ और जंगल वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। इससे कार्बन सिंक बनता है। भारत ने अपने NDC लक्ष्य के तहत 2030 तक अतिरिक्त वन और वृक्ष आवरण के माध्यम से 2.5 से 3.0 बिलियन टन CO2 equivalent का अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाने का लक्ष्य रखा है।
इसका मतलब है कि ग्रीन इंडिया मिशन केवल राष्ट्रीय योजना नहीं, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं से भी जुड़ा हुआ है।
ग्रीन इंडिया मिशन की प्रमुख विशेषताएं
ग्रीन इंडिया मिशन को अलग बनाने वाली सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें केवल plantation नहीं, बल्कि ecosystem restoration पर जोर दिया गया है। यानी जहां पेड़ लगाए जाएं, वहां मिट्टी, पानी, स्थानीय प्रजाति, जैव विविधता और समुदाय की भूमिका को भी ध्यान में रखा जाए।
1. खराब वनों का सुधार
कई वन क्षेत्र ऐसे हैं जहां पेड़ तो मौजूद हैं, लेकिन उनकी घनता और गुणवत्ता कम हो चुकी है। ऐसे क्षेत्रों में assisted natural regeneration, soil moisture conservation, invasive species removal और स्थानीय प्रजातियों के रोपण पर जोर दिया जाता है।
2. वन क्षेत्र के बाहर हरियाली
मिशन वन क्षेत्र के बाहर भी वृक्ष आवरण बढ़ाने की बात करता है। इसमें खेतों की मेड़, सड़क किनारे, रेलवे लाइन के पास, शहरी क्षेत्र, परती भूमि, नदी किनारे और सार्वजनिक भूमि शामिल हो सकती है।
3. एग्रोफॉरेस्ट्री और सामाजिक वानिकी
किसानों के लिए ग्रीन इंडिया मिशन का सबसे उपयोगी हिस्सा एग्रोफॉरेस्ट्री है। इसमें खेतों में फसल के साथ पेड़ लगाए जाते हैं। इससे किसान को लकड़ी, फल, चारा, छाया, मिट्टी संरक्षण और अतिरिक्त आमदनी मिल सकती है।
4. वन आधारित आजीविका
महुआ, तेंदूपत्ता, शहद, लाख, बांस, जड़ी-बूटी, चिरौंजी और अन्य लघु वनोपज ग्रामीण परिवारों के लिए आय का अच्छा स्रोत बन सकती हैं। मिशन में ऐसे उत्पादों के processing, packaging और marketing पर भी जोर दिया गया है।
5. समुदाय की भागीदारी
मिशन की योजना नीचे से ऊपर यानी bottom-up approach पर आधारित है। इसमें ग्राम सभा, Joint Forest Management Committees, स्थानीय समुदाय, वन विभाग और अन्य एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। आधिकारिक दस्तावेज में JFMCs को implementation की प्रमुख इकाइयों में शामिल किया गया है।
ग्रीन इंडिया मिशन के तीन प्रमुख सब-मिशन
ग्रीन इंडिया मिशन को तीन मुख्य sub-missions में बांटा गया है, ताकि हर क्षेत्र पर स्पष्ट तरीके से काम किया जा सके। मिशन दस्तावेज के अनुसार ये sub-missions वन गुणवत्ता, वन और वृक्ष आवरण विस्तार तथा वन-आश्रित समुदायों की आय से जुड़े हैं।
| सब-मिशन | मुख्य लक्ष्य | संभावित लाभ |
|---|---|---|
| Sub-Mission 1 | मौजूदा वन आवरण की गुणवत्ता सुधारना | बेहतर जैव विविधता, जल संरक्षण, कार्बन संचयन |
| Sub-Mission 2 | वन और वृक्ष आवरण बढ़ाना | नए हरित क्षेत्र, शहरी और ग्रामीण हरियाली |
| Sub-Mission 3 | वन-आश्रित समुदायों की आय बढ़ाना | रोजगार, प्रशिक्षण, लघु वनोपज आधारित आमदनी |
ग्रीन इंडिया मिशन के तहत किन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाता है?
मिशन में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है, जहां जलवायु जोखिम, भूमि क्षरण, जैव विविधता संकट या वन गुणवत्ता में गिरावट अधिक है। इसमें अरावली क्षेत्र, पश्चिमी घाट, उत्तर-पश्चिम भारत के शुष्क क्षेत्र, मैंग्रोव क्षेत्र, हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पूर्व व मध्य भारत के बांस वन जैसे संवेदनशील landscape शामिल हो सकते हैं।
इन क्षेत्रों पर काम करने से केवल पेड़ नहीं बढ़ते, बल्कि मिट्टी का कटाव कम होता है, जल स्रोत मजबूत होते हैं, वन्यजीवों का habitat सुधरता है और स्थानीय लोगों को बेहतर आजीविका मिलती है।
किसानों के लिए ग्रीन इंडिया मिशन क्यों महत्वपूर्ण है?
कई लोग ग्रीन इंडिया मिशन को केवल जंगलों से जुड़ी योजना मानते हैं, लेकिन इसका सीधा संबंध किसानों से भी है। खेती की सफलता काफी हद तक मिट्टी, पानी, तापमान और जैव विविधता पर निर्भर करती है। जब खेतों के आसपास हरियाली बढ़ती है, तो सूक्ष्म जलवायु बेहतर होती है, हवा की गति कम होती है और मिट्टी में नमी बनी रहती है।
किसानों को मिलने वाले संभावित लाभ
- खेतों में पेड़ लगाने से लंबे समय में अतिरिक्त आय मिल सकती है।
- मेड़ पर पेड़ लगाने से मिट्टी कटाव कम होता है।
- चारा और ईंधन की उपलब्धता बढ़ सकती है।
- फलदार और बहुउद्देशीय पेड़ों से घरेलू पोषण और आय दोनों बढ़ सकते हैं।
- एग्रोफॉरेस्ट्री से जलवायु जोखिम कम होता है।
- जैव विविधता बढ़ने से परागण और प्राकृतिक कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।
- वृक्ष आधारित खेती सूखा और गर्मी जैसी स्थितियों में सुरक्षा देती है।
इसलिए ग्रीन इंडिया मिशन को खेती और ग्रामीण विकास से अलग करके नहीं देखा जा सकता।
ग्रीन इंडिया मिशन और एग्रोफॉरेस्ट्री
एग्रोफॉरेस्ट्री यानी कृषि वानिकी में किसान अपनी फसल के साथ पेड़ लगाते हैं। यह मॉडल उन किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है, जिनके पास खेत की मेड़, खाली कोना, नहर किनारा या कम उत्पादक भूमि है।
एग्रोफॉरेस्ट्री के लिए उपयोगी पेड़
| क्षेत्र/उद्देश्य | संभावित पेड़ |
|---|---|
| फल आधारित आय | आम, अमरूद, आंवला, सहजन, कटहल |
| लकड़ी आधारित आय | सागौन, शीशम, पॉपलर, यूकेलिप्टस, बांस |
| चारा | सुबबूल, बरसीम क्षेत्र के किनारे चारा पेड़, करंज |
| मिट्टी सुधार | नीम, करंज, ग्लिरिसिडिया |
| सूखा क्षेत्र | बेर, खेजड़ी, नीम, सहजन |
पेड़ चुनते समय स्थानीय जलवायु, पानी की उपलब्धता, बाजार मांग, कानूनी नियम और फसल पर छाया के प्रभाव को जरूर देखें।
ग्रीन इंडिया मिशन की वर्तमान प्रासंगिकता
India State of Forest Report 2023 के अनुसार भारत का कुल वन और वृक्ष आवरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 7,15,343 वर्ग किलोमीटर forest cover और 1,12,014 वर्ग किलोमीटर tree cover शामिल है। 2021 की तुलना में कुल वन और वृक्ष आवरण में 1,445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है।
यह वृद्धि सकारात्मक संकेत है, लेकिन केवल क्षेत्रफल बढ़ना पर्याप्त नहीं है। वन की गुणवत्ता, स्थानीय प्रजातियों की संख्या, पौधों की survival rate, जैव विविधता और समुदाय को मिलने वाला लाभ भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि ग्रीन इंडिया मिशन plantation-driven approach की बजाय ecosystem-based approach पर जोर देता है।
ग्रीन इंडिया मिशन का वित्तीय और कार्यान्वयन रोडमैप
मिशन दस्तावेज के अनुसार ग्रीन इंडिया मिशन को 2021 से 2030 तक 10 वर्षों की अवधि में लागू करने की योजना है। इसमें ongoing Central और State schemes तथा CAMPA funds के convergence से 24 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में afforestation और tree plantation की कल्पना की गई है। Mission-specific interventions के तहत 1 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में क्षेत्रीय जरूरतों के अनुसार मॉडल विकसित करने का लक्ष्य है।
मिशन का अनुमानित financial outlay 12,190 करोड़ रुपये बताया गया है, जिसमें 5,000 करोड़ रुपये ongoing Green India Mission CSS scheme और 7,190 करोड़ रुपये National CAMPA Fund से आने की बात कही गई है।
ग्रीन इंडिया मिशन में समुदाय की भूमिका
किसी भी वृक्षारोपण या वन सुधार कार्यक्रम की सफलता केवल पौधे लगाने से तय नहीं होती। पौधा लगाने के बाद 3 से 5 साल तक देखभाल, सुरक्षा, पानी, चराई नियंत्रण और स्थानीय सहयोग जरूरी होता है। इसलिए ग्रीन इंडिया मिशन में ग्राम सभा, पंचायत, JFMC, महिला समूह, युवा समूह और स्थानीय समुदाय की भूमिका अहम है।
समुदाय क्या कर सकता है?
- गांव की खाली जमीन पर स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाना
- पौधों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक निगरानी करना
- अवैध कटाई और आग से बचाव में सहयोग देना
- जल संरक्षण संरचनाओं को बनाए रखना
- लघु वनोपज का sustainable उपयोग करना
- स्कूल और पंचायत स्तर पर हरित अभियान चलाना
ग्रीन इंडिया मिशन की चुनौतियां
ग्रीन इंडिया मिशन का उद्देश्य बड़ा और जरूरी है, लेकिन इसके सामने कई व्यावहारिक चुनौतियां भी हैं।
1. पौधों की survival rate
केवल पौधे लगाना सफलता नहीं है। पौधे बचें, बड़े हों और स्थानीय ecosystem का हिस्सा बनें, यह अधिक जरूरी है।
2. स्थानीय प्रजातियों का चयन
कई बार तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियां लगाई जाती हैं, लेकिन वे स्थानीय जैव विविधता के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। इसलिए indigenous और climate-suitable species का चयन जरूरी है।
3. भूमि उपलब्धता
वन क्षेत्र के बाहर वृक्षारोपण के लिए भूमि उपलब्धता, स्वामित्व और उपयोग अधिकार महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
4. समुदाय का भरोसा
अगर स्थानीय समुदाय को योजना से लाभ नहीं मिलेगा, तो संरक्षण लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा।
5. निगरानी और पारदर्शिता
GIS, geo-tagging, remote sensing और social audit जैसे tools का बेहतर उपयोग जरूरी है, ताकि planted area और वास्तविक growth में अंतर साफ दिख सके।
ग्रीन इंडिया मिशन को सफल बनाने के उपाय
ग्रीन इंडिया मिशन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए plantation की संख्या से ज्यादा ecosystem quality पर ध्यान देना होगा।
- स्थानीय और बहुउद्देशीय पौधों को प्राथमिकता दी जाए।
- पौधों की survival monitoring कम से कम 3 साल तक हो।
- पंचायत और JFMC को वास्तविक अधिकार और जिम्मेदारी मिले।
- किसानों को एग्रोफॉरेस्ट्री के लिए तकनीकी सलाह और बाजार सहायता मिले।
- जल संरक्षण कार्यों को plantation के साथ जोड़ा जाए।
- स्कूलों, युवाओं और महिला समूहों को मिशन से जोड़ा जाए।
- लघु वनोपज की value chain मजबूत की जाए।
- private sector और CSR funds को पारदर्शी तरीके से जोड़ा जाए।
ग्रीन इंडिया मिशन और ग्रामीण रोजगार
ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षारोपण, nursery development, पौध सुरक्षा, जल संरक्षण, वनोपज processing और eco-restoration जैसे कार्य रोजगार के अवसर बना सकते हैं। इससे मजदूरी के साथ skill development भी होता है। जंगलों पर निर्भर परिवारों के लिए लघु वनोपज, बांस आधारित उत्पाद, शहद, औषधीय पौधे और हस्तशिल्प आय का स्रोत बन सकते हैं।
यदि ग्रीन इंडिया मिशन को कृषि, ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कौशल विकास योजनाओं से अच्छी तरह जोड़ा जाए, तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।
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FAQ: ग्रीन इंडिया मिशन से जुड़े सवाल
Q1. ग्रीन इंडिया मिशन क्या है?
ग्रीन इंडिया मिशन भारत सरकार की एक राष्ट्रीय पर्यावरण पहल है, जिसका उद्देश्य देश में वन और वृक्ष आवरण बढ़ाना, खराब वनों की गुणवत्ता सुधारना, कार्बन सिंक बनाना और वन-आश्रित समुदायों की आजीविका मजबूत करना है।
Q2. ग्रीन इंडिया मिशन किस योजना के अंतर्गत आता है?
ग्रीन इंडिया मिशन National Action Plan on Climate Change के आठ प्रमुख मिशनों में से एक है। इसका संबंध जलवायु परिवर्तन, जंगल संरक्षण और sustainable development से है।
Q3. ग्रीन इंडिया मिशन किसानों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह मिशन एग्रोफॉरेस्ट्री, सामाजिक वानिकी और खेतों के आसपास वृक्षारोपण को बढ़ावा देता है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय, मिट्टी संरक्षण, नमी संरक्षण, चारा, फल, लकड़ी और जलवायु सुरक्षा मिल सकती है।
Q4. ग्रीन इंडिया मिशन का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका मुख्य लक्ष्य वन और वृक्ष आवरण बढ़ाना, मौजूदा वनों की गुणवत्ता सुधारना, ecosystem services मजबूत करना और 2030 तक अतिरिक्त carbon sink बनाने में योगदान देना है।
Q5. क्या ग्रीन इंडिया मिशन केवल जंगलों तक सीमित है?
नहीं, ग्रीन इंडिया मिशन वन क्षेत्र के बाहर भी हरियाली बढ़ाने पर जोर देता है। इसमें खेत, सड़क किनारे, नदी किनारे, शहरी क्षेत्र, परती भूमि और सामुदायिक भूमि शामिल हो सकती है।
Q6. ग्रीन इंडिया मिशन में समुदाय की क्या भूमिका है?
ग्राम सभा, पंचायत, Joint Forest Management Committees, महिला समूह और स्थानीय समुदाय पौधों की देखभाल, संरक्षण, social audit और लघु वनोपज प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q7. ग्रीन इंडिया मिशन और कार्बन सिंक का क्या संबंध है?
पेड़ और जंगल वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं। इसलिए वन और वृक्ष आवरण बढ़ाकर ग्रीन इंडिया मिशन carbon sink बढ़ाने में मदद करता है।
Q8. ग्रीन इंडिया मिशन की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सबसे बड़ी चुनौती पौधों की survival rate, सही प्रजाति चयन, भूमि उपलब्धता, समुदाय की भागीदारी और long-term monitoring है।
निष्कर्ष
ग्रीन इंडिया मिशन भारत के लिए केवल एक वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि जलवायु सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण, जल और मिट्टी बचाव, ग्रामीण आजीविका और sustainable development से जुड़ा व्यापक मिशन है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जंगलों और पेड़ों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे किसानों को जलवायु जोखिम से बचाते हैं, मिट्टी को मजबूत करते हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देते हैं।
यदि ग्रीन इंडिया मिशन को स्थानीय समुदायों, किसानों, पंचायतों, वन विभाग, वैज्ञानिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ लागू किया जाए, तो यह भारत को अधिक हरित, जलवायु-सुरक्षित और संसाधन-संपन्न देश बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। आने वाले वर्षों में इस मिशन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि हम पौधे लगाने से आगे बढ़कर उन्हें बचाने, बढ़ाने और स्थानीय जीवन से जोड़ने पर कितना ध्यान देते हैं।

