नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खेल महासंघ सम्मेलन 2026 में भारत के खेल भविष्य को लेकर व्यापक मंथन हुआ। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री Mansukh Mandaviya ने स्पष्ट कहा कि आगामी एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल और ओलंपिक जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भारत की सफलता मजबूत तैयारी, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल प्रशासन पर निर्भर करेगी। सम्मेलन में भारतीय ओलंपिक संघ सहित 37 राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और भारत को वैश्विक खेल महाशक्ति बनाने की दिशा में रणनीतियों पर चर्चा की।
डॉ. मांडविया ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं बल्कि भारत की खेल तैयारियों को नई दिशा देने वाला समन्वित प्रयास है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश अब खेलों को केवल प्रतियोगिता के रूप में नहीं बल्कि राष्ट्रीय विकास और युवा सशक्तिकरण के बड़े माध्यम के रूप में देख रहा है। सरकार की प्राथमिकता खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं, आधुनिक प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रतिस्पर्धात्मक माहौल उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि भारतीय खेल व्यवस्था का केंद्रबिंदु एथलीट होने चाहिए। महासंघों की कार्यप्रणाली पारदर्शी, जवाबदेह और खिलाड़ी-केंद्रित होनी चाहिए ताकि खिलाड़ियों को चयन, प्रशिक्षण और संसाधनों से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। डॉ. मांडविया ने समय पर चुनाव, पारदर्शी चयन प्रक्रिया और मजबूत संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि खेल महासंघों में सुशासन ही भारत के खेल भविष्य को मजबूत करेगा।
सम्मेलन में डोपिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। खेल मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि भारतीय खेल जगत से डोपिंग को पूरी तरह समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए केवल सरकार ही नहीं बल्कि महासंघों, प्रशिक्षकों, सहयोगी स्टाफ और खिलाड़ियों को भी सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि डोपिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और स्वच्छ खेल संस्कृति को बढ़ावा देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत अब खेलों में दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रहा है। खेलो इंडिया, फिट इंडिया मूवमेंट और आगामी खेलो भारत मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से देशभर में खेल संस्कृति को मजबूत किया जा रहा है। ग्रामीण और छोटे शहरों से प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए खेल अधोसंरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रशिक्षण, डेटा आधारित प्रदर्शन विश्लेषण और आधुनिक फिटनेस प्रोटोकॉल भारतीय खिलाड़ियों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के नियम और सुधार दिशानिर्देश पुस्तिका का भी औपचारिक विमोचन किया गया। इस कदम को खेल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य खेल महासंघों को अधिक पेशेवर और परिणाम आधारित बनाना है।
केंद्रीय खेल राज्य मंत्री Raksha Khadse ने कहा कि भारत की आगामी खेल यात्राएं प्रदर्शन, विज्ञान और मजबूत महासंघों पर आधारित होंगी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के लिए बेहतर सहायता प्रणाली, खेल विज्ञान और आधुनिक प्रशिक्षण तकनीक भविष्य की सफलता की कुंजी हैं। भारत अब केवल भागीदारी तक सीमित नहीं रहना चाहता बल्कि पदक तालिका में शीर्ष देशों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहता है।
खेल सचिव Hari Ranjan Rao ने कहा कि जो देश बड़े सपने देखता है, वह उससे भी बड़ी तैयारी करता है। उन्होंने 2036 के संभावित ओलंपिक विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज की रणनीतिक चर्चाएं भारत के दीर्घकालिक खेल भविष्य को आकार देंगी। उन्होंने अधिक प्रतियोगिताओं, खेल लीगों और आधुनिक प्रशिक्षण तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।
सम्मेलन में खेल सामग्री निर्माण, फिटनेस मूल्यांकन, डोपिंग विरोधी कानूनों को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी और वैश्विक खेल महासंघों में भारत की भागीदारी बढ़ाने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कुल मिलाकर यह सम्मेलन भारत को एक मजबूत, पारदर्शी और खिलाड़ी-केंद्रित खेल राष्ट्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

