Ministry of Textiles ने बजट 2026-27 के तहत घोषित नई वस्त्र योजनाओं पर दक्षिण क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों, उद्योग विशेषज्ञों, बुनकरों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया और वस्त्र क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक रणनीति पर चर्चा की।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की सचिव Neelam Shami Rao ने कहा कि वस्त्र क्षेत्र ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक की पूरी मूल्य श्रृंखला में ‘फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज’ को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता, आधुनिकीकरण और बदलती उपभोक्ता मांगों के अनुरूप नवाचार को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने वस्त्र अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग को भी टिकाऊ विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
विकास आयुक्त (हथकरघा) M. Beena ने कहा कि बजट में घोषित नई योजनाएं वस्त्र क्षेत्र को एकीकृत समर्थन प्रदान करेंगी और विशेष रूप से शिल्पकारों, बुनकरों तथा छोटे उद्यमों को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार सृजन और निर्यात क्षमता को मजबूत करना है।
वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव Padmini Singla ने राज्यों के प्रतिनिधियों के सवालों के जवाब देते हुए योजनाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर स्पष्टता प्रदान की। उन्होंने राज्यों की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए उनके समाधान के लिए व्यावहारिक रणनीतियां प्रस्तुत कीं।
अपर सचिव Aarti Kanwar ने बताया कि सरकार द्वारा आधुनिकीकरण के लिए अनुदान, स्वदेशी मशीनरी निर्माण को बढ़ावा, रोजगार-संबद्ध प्रोत्साहन (ELI), वेतन सब्सिडी तथा कर्मचारी राज्य बीमा और भविष्य निधि के तहत कवरेज जैसे कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने क्लस्टर आधारित अवसंरचना विकास, ब्रांडिंग, नवाचार और प्लग-एंड-प्ले टेक्सटाइल पार्कों के निर्माण को भी प्राथमिकता बताया।
कार्यशाला में कौशल विकास पर भी विशेष जोर दिया गया। वस्त्र मंत्रालय के उप महानिदेशक Akhilesh Kumar ने ‘समर्थ 2.0’ योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि यह पहल आधुनिक और पारंपरिक कौशलों को जोड़ते हुए प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करेगी। इसमें मोबाइल तकनीक, उद्योग-उन्मुख प्रशिक्षण और द्वैध प्रमाणन जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इस दौरान Central Silk Board के सदस्य सचिव P. Shivkumar ने ‘फार्म टू फॉरेन’ विजन के अनुरूप सभी पहलों को हितधारक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया, ताकि वस्त्र क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
कार्यशाला में एकीकृत वस्त्र क्षेत्र कार्यक्रम, राष्ट्रीय फाइबर योजना (NFS), टेक्सटाइल विस्तार एवं रोजगार (TEEM), राष्ट्रीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प कार्यक्रम (NHHP), समर्थ 2.0, टेक्स-इको पहल और मेगा टेक्सटाइल पार्क जैसी प्रमुख योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन योजनाओं का उद्देश्य वस्त्र उद्योग की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना, सततता को बढ़ावा देना और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करना है।
कुल मिलाकर, यह कार्यशाला केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, नीतियों को व्यावहारिक रूप देने और भारत को वैश्विक वस्त्र हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।

