Onion Procurement: केंद्र सरकार ने प्याज किसानों को राहत देने के लिए NAFED और NCCF के जरिये की जा रही प्याज खरीद की गुणवत्ता शर्तों में ढील दी है। उपभोक्ता मामले विभाग यानी DoCA के इस फैसले से महाराष्ट्र के नासिक सहित प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों के किसानों से खरीद बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार ने यह कदम उस समय उठाया है, जब दोनों एजेंसियों की प्याज खरीद तय लक्ष्य से कम रही। जानकारी के अनुसार, पिछले पखवाड़े में NAFED और NCCF ने मिलकर 2 लाख मीट्रिक टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन इसके मुकाबले केवल 1.55 लाख मीट्रिक टन प्याज की ही खरीद हो सकी।
सख्त गुणवत्ता नियमों से खरीद पर असर
खरीद एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, प्याज खरीद के दौरान गुणवत्ता से जुड़ी सख्त शर्तों के कारण मंडियों में लाई गई बड़ी मात्रा में प्याज को रिजेक्ट करना पड़ा। किसानों का प्याज बाजार में उपलब्ध होने के बावजूद खरीद एजेंसियां नियमों के कारण उसे खरीद नहीं पा रही थीं।
इसी स्थिति को देखते हुए उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने 2 जून को नई दिल्ली में एक अहम बैठक की। बैठक में NAFED, NCCF और सेंट्रल वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन यानी CWC के प्रतिनिधि शामिल हुए। CWC इन एजेंसियों द्वारा खरीदे गए प्याज के भंडारण की जिम्मेदारी संभालता है।
DoCA ने जारी किया मेमोरेंडम
बैठक में खरीद की धीमी रफ्तार और प्याज रिजेक्शन से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके बाद DoCA ने 2 जून को एक मेमोरेंडम जारी किया, जिसमें प्याज खरीद की गुणवत्ता शर्तों में ढील का उल्लेख किया गया। इस मेमोरेंडम पर विभाग की प्राइस मॉनिटरिंग डिवीजन की सहायक निदेशक मुस्कान जैन ने हस्ताक्षर किए।
सरकार का मानना है कि नियमों में ढील से मंडियों में उपलब्ध प्याज की खरीद आसान होगी और किसानों को अपनी उपज बेचने में राहत मिलेगी। खासकर नासिक जैसे बड़े प्याज उत्पादक क्षेत्र में इसका असर देखने को मिल सकता है।
किसानों को क्या फायदा होगा?
गुणवत्ता नियमों में ढील से उन किसानों को लाभ मिल सकता है, जिनकी उपज पहले मामूली गुणवत्ता कारणों से रिजेक्ट हो रही थी। इससे खरीद एजेंसियों के लिए अधिक प्याज खरीदना संभव होगा और किसानों को सरकारी खरीद व्यवस्था का फायदा मिल सकेगा।
नासिक देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक और व्यापारिक केंद्रों में गिना जाता है। यहां की मंडियों में प्याज की आवक अधिक रहती है। ऐसे में खरीद नियमों में राहत से किसानों को बेहतर बाजार समर्थन मिलने की उम्मीद है।
भंडारण और कीमत स्थिरता पर भी असर
NAFED और NCCF द्वारा की जाने वाली प्याज खरीद केवल किसानों को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में भी मदद करती है। खरीदा गया प्याज भंडारण में रखा जाता है और जरूरत पड़ने पर बाजार में उपलब्ध कराया जाता है, ताकि उपभोक्ताओं को बहुत अधिक कीमतों का सामना न करना पड़े।
CWC की भूमिका इस पूरी व्यवस्था में अहम है, क्योंकि खरीदे गए प्याज को सुरक्षित रखने के लिए बेहतर भंडारण व्यवस्था जरूरी होती है। प्याज जल्दी खराब होने वाली फसल है, इसलिए इसकी खरीद, छंटाई और स्टोरेज में सावधानी जरूरी रहती है।
निष्कर्ष
केंद्र सरकार द्वारा प्याज खरीद की गुणवत्ता शर्तों में दी गई ढील किसानों के लिए राहत भरा कदम मानी जा रही है। इससे NAFED और NCCF की खरीद रफ्तार बढ़ सकती है और नासिक सहित अन्य प्याज उत्पादक क्षेत्रों के किसानों को अपनी उपज बेचने में मदद मिल सकती है। अगर खरीद व्यवस्था तेजी से आगे बढ़ती है, तो किसानों को बेहतर समर्थन मिलने के साथ-साथ बाजार में प्याज की कीमतों को संतुलित रखने में भी मदद मिलेगी।

