देश में कीटनाशकों और अन्य फसल सुरक्षा उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर फसल सुरक्षा उद्योग ने सरकार से नियमों को और स्पष्ट तथा सख्त बनाने की मांग की है। फसल सुरक्षा उद्योग से जुड़ी संस्था क्रॉपलाइफ इंडिया ने कहा है कि इंटरनेट और ई-वाणिज्य मंचों के माध्यम से होने वाली कीटनाशकों की बिक्री को भी उन्हीं कानूनों और नियमों के दायरे में लाया जाना चाहिए, जो पारंपरिक बाजार में कीटनाशकों की बिक्री पर लागू होते हैं।
संस्था के अनुसार ऑनलाइन बिक्री व्यवस्था में उत्पाद की पहचान, आपूर्ति की निगरानी, विक्रेता की जिम्मेदारी और किसान तक उत्पाद पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं होने की चिंता है। ऐसे में किसानों और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन माध्यम से होने वाली बिक्री के लिए स्पष्ट नियामकीय व्यवस्था जरूरी है।
कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री पर बने अलग अध्याय
क्रॉपलाइफ इंडिया ने online-pesticide-sale-rules-croplife-india-demand की ओर से जारी किए गए प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक के मसौदे में डिजिटल और ई-वाणिज्य मंचों को नियंत्रित करने के लिए अलग अध्याय जोड़ने की मांग की है।
संस्था का कहना है कि ऑनलाइन और ई-वाणिज्य मंच भी कीटनाशकों के बाजार का हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए इन पर भी पारंपरिक बाजार की तरह समान कानून और नियम लागू होने चाहिए।
क्रॉपलाइफ इंडिया की ओर से बोलते हुए धनुका एग्रीटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राहुल धनुका ने कहा कि ऑनलाइन और ई-वाणिज्य मंच वर्तमान व्यवस्था में कानून के दायरे से काफी हद तक बाहर हैं। उनके अनुसार इन मंचों पर किसानों और उपभोक्ताओं के प्रति उत्पाद की पहचान तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है।
संस्था का मानना है कि यदि किसान ऑनलाइन माध्यम से कीटनाशक खरीदता है तो उसे यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि उत्पाद किस कंपनी का है, विक्रेता कौन है, उत्पाद वैध है या नहीं, उसका पंजीकरण हुआ है या नहीं और उसके उपयोग की अनुमति किस फसल के लिए है।
उत्पाद की पहचान और निगरानी सबसे बड़ी चुनौती
पारंपरिक बाजार में कीटनाशकों की बिक्री के लिए लाइसेंस, पंजीकरण और अन्य नियामकीय आवश्यकताएं लागू होती हैं। लेकिन ऑनलाइन बिक्री में अलग-अलग विक्रेताओं और मंचों के माध्यम से उत्पाद किसानों तक पहुंचते हैं।
ऐसी स्थिति में यदि किसी किसान को नकली, अवैध या गलत तरीके से बेचा गया कीटनाशक मिलता है तो उसके स्रोत की पहचान करना और जिम्मेदारी तय करना कठिन हो सकता है। उद्योग संस्था ने इसी वजह से ऑनलाइन बिक्री की पूरी श्रृंखला में निगरानी और पहचान की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
प्रस्तावित व्यवस्था में विक्रेता की पहचान, उत्पाद का पंजीकरण, बिक्री का अभिलेख और किसान तक उत्पाद पहुंचने की जानकारी उपलब्ध होने से शिकायतों की जांच करना आसान हो सकता है। इससे नकली और अनधिकृत फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगाने में सहायता मिल सकती है।
नियामकीय आंकड़ों की पांच साल तक सुरक्षा की मांग
क्रॉपलाइफ इंडिया ने प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक में नियामकीय आंकड़ों की सुरक्षा के लिए पांच वर्ष की अवधि तय करने की मांग भी दोहराई है।
संस्था के अनुसार किसी नए कृषि रसायन या फसल सुरक्षा उत्पाद को बाजार में लाने से पहले कंपनियों को सुरक्षा, प्रभावशीलता और अन्य नियामकीय आवश्यकताओं से जुड़े कई प्रकार के अध्ययन और आंकड़े तैयार करने पड़ते हैं। इस प्रक्रिया में काफी समय और धन खर्च होता है।
उद्योग का कहना है कि यदि किसी कंपनी द्वारा तैयार किए गए नियामकीय आंकड़ों को पर्याप्त अवधि तक सुरक्षा नहीं मिलती है तो नई तकनीक और नए उत्पाद विकसित करने के लिए निवेश का प्रोत्साहन कम हो सकता है।
बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका क्षेत्र के वाणिज्यिक प्रमुख मोहन बाबू ने कहा कि कंपनी ने दुनियाभर में करीब 1,200 अणुओं के माध्यम से फसल सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराए हैं, जबकि भारत में अलग-अलग रूपों और संरचनाओं में करीब 380 अणु उपलब्ध हैं।
उद्योग का तर्क है कि भारत में नए और सुरक्षित फसल सुरक्षा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए अनुसंधान तथा विकास में निवेश को प्रोत्साहित करना जरूरी है।
नया उत्पाद विकसित करने में लगते हैं कई साल
कृषि रसायन उद्योग के अनुसार किसी नए फसल सुरक्षा उत्पाद को विकसित करना लंबी और महंगी प्रक्रिया है। बीएएसएफ के कृषि समाधान कारोबार से जुड़े अधिकारी गिरिधर रानू ने बताया कि किसी नए उत्पाद के विकास में लगभग छह से आठ वर्ष तक का समय लग सकता है।
इस दौरान वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रयोगशाला परीक्षण, खेतों में परीक्षण, सुरक्षा मूल्यांकन और नियामकीय प्रक्रिया पर काफी खर्च होता है। उद्योग का कहना है कि यदि किसी कंपनी के लंबे अनुसंधान के बाद तैयार उत्पाद से जुड़े आंकड़ों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती है तो दूसरी कंपनियों के लिए समान जानकारी के आधार पर बाजार में प्रवेश करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
इससे नई तकनीक के विकास में निवेश करने वाली कंपनियों के लिए व्यावसायिक जोखिम बढ़ सकता है।
पेटेंट और नियामकीय आंकड़ों की सुरक्षा का संबंध
फसल सुरक्षा उद्योग ने कृषि रसायनों में पेटेंट की स्थिति का भी उल्लेख किया है। उद्योग के अनुसार कृषि रसायन बाजार में करीब 20 प्रतिशत उत्पाद पेटेंट के अंतर्गत हैं। वहीं लगभग 15 से 20 प्रतिशत उत्पाद ऐसे हैं जिनका पेटेंट हाल के वर्षों में समाप्त हुआ है। लगभग 60 प्रतिशत उत्पाद काफी समय से पेटेंट सुरक्षा से बाहर हैं।
ऐसे बाजार में नियामकीय आंकड़ों की सुरक्षा को उद्योग नए उत्पादों के विकास के लिए महत्वपूर्ण मानता है। उसका कहना है कि पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद भी नए उत्पादों के अनुसंधान और विकास में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए नियामकीय व्यवस्था में उचित सुरक्षा जरूरी है।
किसानों के लिए सुरक्षित कीटनाशक उपलब्ध कराने पर जोर
कीटनाशक किसानों के लिए फसल को कीट, रोग और खरपतवार से बचाने का महत्वपूर्ण साधन हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल निर्धारित मात्रा, सही फसल और सही समय के अनुसार किया जाना जरूरी है।
इसलिए केवल बिक्री की व्यवस्था ही नहीं, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, वैधता और सही उपयोग से जुड़ी जानकारी भी महत्वपूर्ण है। ऑनलाइन बिक्री बढ़ने के साथ किसानों को यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे अधिकृत और पंजीकृत उत्पाद ही खरीदें।
यदि ऑनलाइन मंचों पर उत्पाद की सही जानकारी, निर्माता का विवरण, पंजीकरण संबंधी जानकारी और उपयोग संबंधी निर्देश स्पष्ट रूप से उपलब्ध हों तो किसानों को खरीद का निर्णय लेने में सुविधा हो सकती है।
प्रस्तावित कानून में डिजिटल बाजार को शामिल करने की मांग
क्रॉपलाइफ इंडिया की मांग ऐसे समय में सामने आई है जब सरकार कीटनाशक प्रबंधन से जुड़े नए विधायी ढांचे पर काम कर रही है। प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक का उद्देश्य कीटनाशकों के पंजीकरण, नियमन, बिक्री और उपयोग से संबंधित व्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाने से जुड़ा है।
उद्योग संस्था चाहती है कि इस व्यवस्था में डिजिटल बाजार और ई-वाणिज्य मंचों के लिए स्पष्ट प्रावधान किए जाएं। इससे ऑनलाइन तथा पारंपरिक बाजार के बीच नियमन में अंतर कम किया जा सकेगा।
ऑनलाइन बिक्री के लिए समान नियम लागू होने से उत्पाद की गुणवत्ता, विक्रेता की पहचान, बिक्री का अभिलेख और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जा सकता है।
किसानों और उद्योग दोनों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा
कीटनाशकों की ऑनलाइन बिक्री का विस्तार किसानों के लिए उत्पाद खरीदने का एक अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध कराता है, लेकिन इसके साथ उत्पाद की गुणवत्ता और वैधता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
उद्योग की मांग है कि नई नियामकीय व्यवस्था ऐसी हो जिसमें किसानों को सुरक्षित और प्रमाणित फसल सुरक्षा उत्पाद मिलें तथा नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों को अनुसंधान और निवेश के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन मिले।
आने वाले समय में प्रस्तावित कीटनाशक प्रबंधन विधेयक में डिजिटल बिक्री, उत्पाद की पहचान, विक्रेता की जवाबदेही और नियामकीय आंकड़ों की सुरक्षा जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण रह सकते हैं। ऑनलाइन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए कीटनाशकों की बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसानों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

