ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात वीबी-जी राम के प्रभावी और सुचारू क्रियान्वयन के लिए देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती करने का निर्णय लिया है। ये अधिकारी 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहे अधिनियम के कार्यान्वयन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक और संस्थागत सहयोग प्रदान करेंगे।
मंत्रालय का मानना है कि किसी भी नई योजना या अधिनियम की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय अधिकारियों की यह विशेष व्यवस्था की जा रही है, ताकि राज्यों और जिलों में योजना के क्रियान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों का समय पर समाधान किया जा सके और स्थानीय स्तर पर क्षमता निर्माण को मजबूत बनाया जा सके।
राज्यों और जिलों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण कड़ी बनेंगे अधिकारी
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार तैनात किए जाने वाले क्षेत्रीय अधिकारी केवल निगरानी की भूमिका में नहीं होंगे, बल्कि वे राज्यों और जिला प्रशासन के लिए संसाधन व्यक्ति और मार्गदर्शक के रूप में भी कार्य करेंगे। उनका मुख्य उद्देश्य योजना के विभिन्न घटकों को जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना होगा।
ये अधिकारी राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ लगातार संवाद स्थापित करेंगे। साथ ही योजना के संचालन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों की पहचान कर उनके समाधान में सहयोग देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की व्यवस्था से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा, जिससे योजना का लाभ लक्षित वर्ग तक तेजी से पहुंच सकेगा।
अधिकारियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा क्षेत्रीय अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं, कार्यान्वयन ढांचे, संस्थागत व्यवस्थाओं, डिजिटल शासन प्रणाली, निगरानी तंत्र तथा राज्यों को उपलब्ध सहायता व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की, जबकि कार्यक्रम का संचालन संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को यह समझाया गया कि उन्हें केवल प्रशासनिक भूमिका नहीं निभानी है, बल्कि स्थानीय स्तर पर समस्या समाधान, क्षमता निर्माण और नवाचारों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय योगदान देना है।
विकसित भारत के लक्ष्य को गति देगा मिशन
ग्रामीण विकास एवं ग्राम पंचायत विकास अधिनियम, 2025 को ग्रामीण भारत के समग्र विकास के दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। इस अधिनियम का उद्देश्य केवल रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत आजीविका, जलवायु अनुकूल विकास, मजबूत आधारभूत संरचना और आधुनिक तकनीक आधारित शासन प्रणाली को बढ़ावा देना भी है।
इस मिशन के तहत रोजगार सृजन को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अवसंरचना निर्माण तथा आजीविका संवर्धन कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण विकास की इन पहलों के माध्यम से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में योगदान दिया जाए।
तकनीक आधारित शासन पर विशेष जोर
नई व्यवस्था में डिजिटल तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। मंत्रालय ने बताया कि योजना के संचालन को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए विभिन्न तकनीकी उपाय लागू किए गए हैं।
देशभर में फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली लागू की जा चुकी है, जिससे कार्यस्थलों पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा डीबीटी-स्पर्श प्लेटफॉर्म के माध्यम से लाभार्थियों तक सीधे भुगतान की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस डिजिटल प्रणाली से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं, जो योजना की निगरानी, रिपोर्टिंग और डेटा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएंगे।
ई-केवाईसी और क्षमता निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति
मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार देशभर में सक्रिय श्रमिकों में से लगभग 93 प्रतिशत श्रमिकों की ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। यह उपलब्धि योजना के पारदर्शी संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इसके साथ ही विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को नई व्यवस्था के बारे में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
95,692 करोड़ रुपये का आवंटन
योजना के प्रभावी संचालन के लिए केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 95,692 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन किया है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका, अवसंरचना विकास और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए उपयोग की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी वित्तीय व्यवस्था ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी।
राज्यों ने शुरू की तैयारियां
वीबी-जी राम मिशन के कार्यान्वयन को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी व्यापक तैयारियां चल रही हैं। अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अपने बजट में इसके लिए आवश्यक प्रावधान कर लिए हैं।
इसके अलावा छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नई व्यवस्था के अनुरूप अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित भी कर दिया है। शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भी अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा
ग्रामीण विकास मंत्रालय का मानना है कि क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती और व्यापक संस्थागत सहयोग से योजना का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनेगा। इससे राज्यों को प्रशासनिक सहायता मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर आने वाली चुनौतियों का समाधान भी तेजी से हो सकेगा।
वीबी-जी राम मिशन केवल एक रोजगार कार्यक्रम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर, समृद्ध और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक व्यापक पहल है। यदि इसका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो यह ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक नया अध्याय स्थापित कर सकता है और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

