कृषि क्षेत्र में तेजी से बढ़ती डिजिटल तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) की भूमिका को समझने तथा भविष्य की कृषि एवं एग्रीबिजनेस को नई दिशा देने के उद्देश्य से Punjab Agricultural University (PAU), Ludhiana के School of Business Studies (SBS) ने Australia-India HUB (AI-HUB) के सहयोग से एक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। Dr. Kulwant Singh Virk Auditorium में आयोजित इस सेमिनार का विषय था “AI, Cybersecurity, Quantum Computing and Digital Transformation: Shaping the Future of Agriculture and Agribusiness.”
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में शिक्षाविदों, उद्योग विशेषज्ञों, कृषि उद्यमियों, NIDHI-TBI के इनक्यूबेटीज़, शोधकर्ताओं तथा MBA एवं MBA (Agri Business) के विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि और एग्रीबिजनेस क्षेत्र में होने वाले बदलावों पर चर्चा करना तथा विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों को भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के लिए तैयार करना था।
कृषि और तकनीक के संगम पर विशेष चर्चा
आज विश्वभर में कृषि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं रह गई है। Artificial Intelligence (AI), Digital Transformation, Cybersecurity, Quantum Computing, Blockchain, Big Data, Machine Learning और Smart Agriculture जैसी आधुनिक तकनीकें खेती की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल रही हैं। इसी बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए PAU और Australia-India HUB ने इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच का आयोजन किया।
कार्यक्रम का आयोजन PAU के कुलपति Dr. Satbir Singh Gosal के संरक्षण तथा College of Basic Sciences and Humanities की डीन Dr. Kiran Bains के मार्गदर्शन में किया गया। वहीं Australia-India HUB के चेयरमैन Dr. Kamaljeet Sandhu तथा School of Business Studies के निदेशक Dr. Ramandeep Singh ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया।
विद्यार्थियों को Industry Ready बनने का संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत Dr. Navneet Kaur Gill, Assistant Professor, School of Business Studies द्वारा अतिथियों के स्वागत के साथ हुई। उन्होंने मुख्य वक्ता Dr. Kamaljeet Sandhu और विशिष्ट वक्ता Mr. M. S. Malhi का परिचय कराया तथा उनके शैक्षणिक एवं औद्योगिक योगदान पर प्रकाश डाला।
उद्योग विशेषज्ञ Mr. M. S. Malhi ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा और उद्योग के बीच की दूरी कम करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीकों के दौर में केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि Skill Development, Continuous Learning, Professional Adaptability और Innovation सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे नई तकनीकों को सीखने के लिए हमेशा तैयार रहें, क्योंकि भविष्य का रोजगार बाजार तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि जो युवा समय के साथ स्वयं को अपडेट करेंगे, वही आने वाले वर्षों में सबसे अधिक सफल होंगे।
Artificial Intelligence बनेगी कृषि की नई ताकत
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता Dr. Kamaljeet Sandhu ने अपने व्याख्यान में Artificial Intelligence (AI), Cybersecurity, Quantum Computing, Blockchain Technology तथा Digital Innovation के विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में Data सबसे मूल्यवान संपत्तियों में से एक बन चुका है। लेकिन डेटा का सुरक्षित भंडारण और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि डिजिटल जानकारी सुरक्षित नहीं होगी, तो तकनीकी विकास के लाभ सीमित रह जाएंगे।
उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में AI आधारित समाधान किसानों को मौसम की जानकारी, रोग एवं कीट प्रबंधन, फसल निगरानी, उत्पादकता बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर रहे हैं।
Cybersecurity की बढ़ती आवश्यकता
डॉ. संधू ने कहा कि जैसे-जैसे कृषि और एग्रीबिजनेस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर होते जा रहे हैं, Cybersecurity की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि डेटा, किसान रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्मार्ट मशीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भविष्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगा। उन्होंने संस्थानों और कंपनियों से मजबूत साइबर सुरक्षा प्रणाली अपनाने की अपील की ताकि डिजिटल परिवर्तन सुरक्षित और भरोसेमंद बन सके।
Quantum Computing और Blockchain से बदल सकता है भविष्य
मुख्य वक्ता ने Quantum Computing और Blockchain जैसी उभरती तकनीकों पर भी विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में Quantum Computing जटिल कृषि समस्याओं का समाधान तेजी से खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। वहीं Blockchain तकनीक कृषि उत्पादों की Traceability, Transparency, Supply Chain Management तथा खाद्य सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन तकनीकों का उपयोग किसानों, उपभोक्ताओं और कृषि उद्योग के बीच विश्वास बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
AI रोजगार खत्म नहीं, नए अवसर पैदा करेगा
Artificial Intelligence को लेकर रोजगार पर होने वाली चर्चाओं का उल्लेख करते हुए डॉ. संधू ने कहा कि AI पारंपरिक नौकरियों के स्वरूप को अवश्य बदल रहा है, लेकिन यह नई संभावनाएं भी पैदा कर रहा है।
उन्होंने कहा कि जो लोग नई तकनीकों को सीखने, Reskilling, Upskilling और Continuous Learning को अपनाएंगे, उनके लिए रोजगार के अवसर पहले से अधिक होंगे।
उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु बनने, नए प्रश्न पूछने, प्रयोग करने और असफलताओं से डरने के बजाय उनसे सीखने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार प्रत्येक असफल प्रयास भविष्य की सफलता की तैयारी होता है।
Startup Ecosystem को मिला प्रोत्साहन
इस संगोष्ठी में NIDHI-TBI, Department of Science and Technology (DST), Government of India की परियोजना टीम ने भी सक्रिय भागीदारी की।
PAU FEDS (NIDHI-TBI) के CEO Mr. Gurinder Singh, Business Manager Mr. Sameer Gautam तथा Apni Kheti से जुड़े Mr. Chamkaur Singh ने विद्यार्थियों और युवा उद्यमियों के साथ अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप संस्कृति तेजी से विकसित हो रही है और आधुनिक तकनीकों की मदद से युवा उद्यमी कृषि को अधिक लाभकारी व्यवसाय में बदल सकते हैं।
महिला उद्यमियों ने साझा किए सफलता के अनुभव
कार्यक्रम में कई सफल कृषि उद्यमियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
Muskan Millets के Mr. Swaroop Singh, Rav Agro की Ms. Ravinder Kaur, Rabaco की Ms. Ravinder Kaur तथा Organolite की Ms. Jaspreet Kaur ने कृषि आधारित नवाचार और उद्यमिता के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए।
इन उद्यमियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक, बेहतर मार्केटिंग और नवाचार के माध्यम से कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों ने दिखाई विशेष रुचि
कार्यक्रम में MBA तथा MBA (Agri Business) के विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। इंटरैक्टिव सत्र के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से Artificial Intelligence, Digital Agriculture, Startup Funding, Innovation, Entrepreneurship तथा भविष्य की रोजगार संभावनाओं से जुड़े अनेक प्रश्न पूछे।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र में तकनीकी ज्ञान रखने वाले युवाओं की मांग लगातार बढ़ेगी।
कृषि में Digital Transformation की नई दिशा
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की कृषि पूरी तरह Technology Driven होगी। AI आधारित सलाह, Drone Technology, IoT, Satellite Monitoring, Digital Advisory Services, Automation, Smart Irrigation, Precision Farming तथा Data Analytics जैसी तकनीकें खेती को अधिक लाभदायक, टिकाऊ और वैज्ञानिक बनाएंगी।
उन्होंने कहा कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश में डिजिटल परिवर्तन किसानों की आय बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
नवाचार आधारित सोच को मिलेगा बढ़ावा
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में Innovation-driven Thinking और Entrepreneurial Mindset विकसित करना भी था।
विशेषज्ञों ने कहा कि केवल नौकरी तलाशना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि युवाओं को ऐसे समाधान विकसित करने चाहिए जो किसानों की वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें। यही सोच भविष्य में भारत को वैश्विक कृषि नवाचार का केंद्र बना सकती है।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में Dr. Navneet Kaur Gill ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी वक्ताओं, प्रतिभागियों, विद्यार्थियों और आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी विद्यार्थियों को नई तकनीकों को अपनाने, नवाचार को बढ़ावा देने तथा कृषि एवं एग्रीबिजनेस के भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए प्रेरित करेगी।
Punjab Agricultural University और Australia-India HUB द्वारा आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक अकादमिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य की Digital Agriculture, Artificial Intelligence, Cybersecurity, Quantum Computing, Blockchain, Agri Startup, Innovation और Agribusiness Transformation की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।
इस मंच ने स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य की कृषि केवल खेतों में नहीं, बल्कि Artificial Intelligence, Data Science, Digital Innovation और Technology-driven Solutions के माध्यम से आकार लेगी। यदि विद्यार्थी, वैज्ञानिक, उद्योग और स्टार्टअप मिलकर कार्य करें, तो भारत वैश्विक कृषि नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

