Punjab Agricultural University के मानव विकास एवं परिवार अध्ययन विभाग द्वारा विद्यार्थियों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए “करियर काउंसलिंग” और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम 6 मई 2026 को विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके भविष्य की दिशा तय करने, करियर संबंधी सही निर्णय लेने तथा मानसिक रूप से स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत करियर काउंसलिंग सत्र से हुई, जिसे Shobhan Soi ने संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक समय में तेजी से बदलती पेशेवर दुनिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में केवल डिग्री प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं, रुचियों और कौशलों को पहचानकर उन्हें निरंतर विकसित करना भी आवश्यक है।
शोभन सोई ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने भीतर छिपी प्रतिभाओं को पहचानें और उसी के अनुरूप करियर का चयन करें। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और वैश्विक परिस्थितियों के कारण रोजगार के नए अवसर लगातार सामने आ रहे हैं, इसलिए विद्यार्थियों को पारंपरिक करियर विकल्पों के साथ-साथ उभरते क्षेत्रों की जानकारी भी रखनी चाहिए। उन्होंने कौशल विकास, संवाद क्षमता, नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास को सफल करियर की मुख्य कुंजी बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि सही करियर का चुनाव केवल आर्थिक लाभ के आधार पर नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता और जीवन के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उनके प्रेरणादायक विचारों ने विद्यार्थियों को अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग और सकारात्मक बनने के लिए प्रेरित किया।
इसके बाद कार्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया, जिसे प्रमाणित मनोवैज्ञानिक एवं लाइसेंस प्राप्त विशेष शिक्षिका Neha Lakhanpal ने प्रस्तुत किया। उनका व्याख्यान “ब्रेक द लूप : ओवरथिंकिंग और टालमटोल की आदत पर विजय प्राप्त कर संतुलित जीवन की ओर” विषय पर आधारित था।
नेहा लखनपाल ने विद्यार्थियों को बताया कि आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में अत्यधिक सोचने और काम को टालने की आदत युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है। उन्होंने कहा कि लगातार नकारात्मक विचारों में उलझे रहना तनाव, चिंता और आत्मविश्वास में कमी का कारण बन सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि यदि समय रहते इन आदतों पर नियंत्रण नहीं पाया जाए तो यह पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों के साथ कई व्यावहारिक उपाय साझा किए, जिनकी मदद से वे अपने मानसिक तनाव को कम कर सकते हैं। उन्होंने समय प्रबंधन, सकारात्मक सोच, नियमित दिनचर्या, ध्यान और आत्म-अनुशासन को मानसिक संतुलन बनाए रखने के महत्वपूर्ण साधन बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय परिवार, मित्रों और शिक्षकों के साथ खुलकर बातचीत करनी चाहिए, ताकि मानसिक दबाव कम हो सके।
कार्यक्रम में कुल 47 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें विद्यार्थी और संकाय सदस्य शामिल थे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से विभिन्न प्रश्न पूछे और अपने अनुभव भी साझा किए। पूरे सत्र के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की डीन Dr. Kiran Bains ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में विद्यार्थियों के लिए करियर योजना और मानसिक स्वास्थ्य दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि सही मार्गदर्शन और जागरूकता विद्यार्थियों को अपने पेशेवर जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करती है।
विभागाध्यक्ष Dr. Seema Sharma ने भी कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस प्रकार के सत्र विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच विकसित करने और मानसिक रूप से मजबूत बनने में सहायता करते हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि उपयोगी सोच और नकारात्मक मानसिक उलझनों में क्या अंतर होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ओवरथिंकिंग और टालमटोल की आदत को पहचानना ही सकारात्मक बदलाव की पहली सीढ़ी है।
कार्यक्रम का सफल संचालन Dr. Ritu Mahal और Dr. Rashmi Upreti द्वारा किया गया। अंत में विद्यार्थियों ने कार्यक्रम के आयोजकों और विशेषज्ञ वक्ताओं का आभार व्यक्त किया तथा कहा कि इस तरह के कार्यक्रम उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक विकास के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। कार्यक्रम सकारात्मक वातावरण और नई प्रेरणा के साथ संपन्न हुआ।

