Punjab Agricultural University के कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज की एनएसएस इकाई द्वारा “राष्ट्र निर्माण में युवाओं के अधिकार, कर्तव्य और जिम्मेदारियां” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चल रहे एनएसएस शिविर के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों को राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने अधिकारों और कर्तव्यों की समझ प्रदान करना था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को लेकर नई सोच विकसित की।
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. अतिंदर पाल कौर ने युवाओं की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके युवाओं की सोच, कार्यशैली और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे युवा देश में विद्यार्थियों और युवाओं की भागीदारी राष्ट्र निर्माण के हर क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि युवा अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर सकारात्मक दिशा में कार्य करें, तो देश सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से अधिक मजबूत बन सकता है।
डॉ. कौर ने अपने व्याख्यान में युवाओं के मौलिक अधिकारों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को शिक्षा का अधिकार, समानता का अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि इन अधिकारों का सही उपयोग तभी संभव है, जब युवा जागरूक और जिम्मेदार बनें। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल अधिकारों की मांग करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके साथ जुड़े कर्तव्यों को समझना और निभाना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि देश के प्रति कर्तव्य निभाना प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। कानून का सम्मान करना, सामाजिक सौहार्द बनाए रखना, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाना और समाज के कमजोर वर्गों की सहायता करना युवाओं के प्रमुख कर्तव्यों में शामिल है। उन्होंने कहा कि आज का युवा यदि अनुशासन, ईमानदारी और सेवा भावना को अपनाए, तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
व्याख्यान के दौरान डॉ. कौर ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारियों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, जल संरक्षण और सामाजिक जागरूकता फैलाना युवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल शैक्षणिक उपलब्धियों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के विकास में भी सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि एनएसएस जैसे मंच विद्यार्थियों को नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म युवाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में युवाओं को इन माध्यमों का उपयोग सकारात्मक सोच और जनजागरूकता फैलाने के लिए करना चाहिए। गलत सूचनाओं से बचना और समाज में सद्भाव बनाए रखना भी आज के युवाओं की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे अपने व्यवहार और कार्यों से दूसरों के लिए प्रेरणा बनें।
कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने भी विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपने विचार साझा किए और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। विद्यार्थियों ने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान उन्हें अपने सामाजिक दायित्वों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं और समाज के लिए कुछ बेहतर करने की प्रेरणा देते हैं।
कार्यक्रम का संचालन कॉलेज की एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. लवजीत कौर और डॉ. अन्ना गोयल द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि एनएसएस शिविर के माध्यम से विद्यार्थियों में सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न गतिविधियों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्याख्यान विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने राष्ट्र और समाज की प्रगति में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों में उत्साह और जागरूकता का विशेष माहौल देखने को मिला। व्याख्यान ने युवाओं को यह संदेश दिया कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या किसी एक वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक युवा नागरिक का इसमें महत्वपूर्ण योगदान होता है।

