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Per Drop More Crop Scheme: कम पानी में ज्यादा पैदावार का बड़ा मिशन, जानिए कैसे किसान उठा रहे हैं फायदा

Per Drop More Crop Scheme: A major mission to achieve higher yields with less water. Learn how farmers are benefiting.

Fiza by Fiza
May 21, 2026
in योजना
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Per Drop More Crop Scheme

Per Drop More Crop Scheme

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Per Drop More Crop Scheme: भारत में खेती का सबसे बड़ा आधार पानी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भूजल स्तर तेजी से गिरा है। कई राज्यों में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। ऐसे समय में केंद्र सरकार ने खेती में पानी बचाने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” Per Drop More Crop Scheme योजना शुरू की। यह योजना किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ती है ताकि कम पानी में अधिक फसल उत्पादन किया जा सके।

यह योजना खासतौर पर ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर सिस्टम को बढ़ावा देती है। सरकार का लक्ष्य है कि हर खेत तक पानी पहुंचे और किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकें। आज देश के लाखों किसान इस योजना के जरिए आधुनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।

क्या है पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना?

“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना केंद्र सरकार की माइक्रो इरिगेशन आधारित योजना है। इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत लागू किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य है:

  • पानी की बचत करना
  • फसल की पैदावार बढ़ाना
  • सिंचाई लागत कम करना
  • आधुनिक खेती को बढ़ावा देना
  • किसानों की आय में वृद्धि करना

इस योजना के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम लगाने पर सब्सिडी दी जाती है। इससे खेतों में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है और पानी की बर्बादी कम होती है।

योजना की शुरुआत कैसे हुई?

भारत में कई राज्यों में लगातार जल संकट बढ़ रहा था। परंपरागत सिंचाई पद्धतियों में बहुत अधिक पानी खर्च होता था। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की। इसी योजना के अंतर्गत “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” मिशन शुरू किया गया।

सरकार का उद्देश्य था कि किसानों को ऐसी तकनीक दी जाए जिससे कम पानी में भी बेहतर खेती की जा सके। शुरुआत में यह योजना सीमित राज्यों तक थी, लेकिन बाद में इसे पूरे देश में लागू किया गया।

किसानों के लिए यह योजना क्यों जरूरी है?

आज खेती में पानी की लागत लगातार बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में ट्यूबवेल सूख रहे हैं और बिजली खर्च भी बढ़ रहा है। ऐसे में यह योजना किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है।

पानी की बचत

ड्रिप सिंचाई में पानी बूंद-बूंद करके पौधों तक पहुंचता है। इससे 40 से 60 प्रतिशत तक पानी बच सकता है।

पैदावार में बढ़ोतरी

जब पौधों को सही मात्रा में पानी और पोषण मिलता है तो उत्पादन बेहतर होता है। कई फसलों में 20 से 40 प्रतिशत तक उत्पादन बढ़ने की रिपोर्ट सामने आई है।

बिजली और डीजल खर्च कम

कम पानी की जरूरत होने के कारण मोटर कम चलती है, जिससे बिजली और डीजल खर्च घटता है।

उर्वरकों का बेहतर उपयोग

फर्टिगेशन तकनीक के जरिए खाद सीधे पौधों तक पहुंचती है। इससे खाद की बर्बादी कम होती है।

कम मजदूरी खर्च

माइक्रो इरिगेशन सिस्टम में खेतों में बार-बार पानी देने की जरूरत कम होती है।

किन फसलों में ज्यादा फायदा?

यह योजना बागवानी और नकदी फसलों के लिए काफी उपयोगी मानी जाती है। जैसे:

  • गन्ना
  • कपास
  • सब्जियां
  • फल
  • मिर्च
  • टमाटर
  • प्याज
  • अंगूर
  • अनार
  • केला
  • फूलों की खेती

अब कई किसान गेहूं और दलहन फसलों में भी स्प्रिंकलर तकनीक का उपयोग कर रहे हैं।

किसान इस योजना का फायदा कैसे उठाएं?

किसान अपने राज्य के कृषि विभाग या उद्यान विभाग के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कई राज्यों में ऑनलाइन पोर्टल भी उपलब्ध हैं। योजना का लाभ लेने के लिए किसान को निम्न प्रक्रिया अपनानी होती है:

  1. आवेदन करना
  2. खेत का सत्यापन
  3. माइक्रो इरिगेशन कंपनी का चयन
  4. सिस्टम इंस्टॉलेशन
  5. निरीक्षण
  6. सब्सिडी जारी

रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया क्या है?

अलग-अलग राज्यों में प्रक्रिया थोड़ी अलग हो सकती है, लेकिन सामान्य रूप से किसान को ये कदम उठाने होते हैं:

ऑनलाइन आवेदन

राज्य सरकार के कृषि पोर्टल पर जाकर किसान आवेदन कर सकता है।

जरूरी जानकारी भरना

  • किसान का नाम
  • आधार नंबर
  • भूमि विवरण
  • फसल का प्रकार
  • बैंक जानकारी

दस्तावेज अपलोड

जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद आवेदन जमा करना होता है।

विभागीय जांच

कृषि विभाग खेत का निरीक्षण करता है।

सब्सिडी स्वीकृति

सिस्टम लगने के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।

किसानों को कितनी सब्सिडी मिलती है?

सब्सिडी राज्य और किसान श्रेणी के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

  • सामान्य किसानों को लगभग 45% से 55% तक सहायता
  • लघु और सीमांत किसानों को 55% से 75% तक सहायता

कुछ राज्यों में अतिरिक्त राज्य सब्सिडी भी दी जाती है।

पिछले 5 सालों में किसानों को कितना फायदा मिला?

पिछले कुछ वर्षों में माइक्रो इरिगेशन क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। सरकार और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार:

  • लाखों हेक्टेयर भूमि माइक्रो इरिगेशन से जुड़ी
  • कई राज्यों में पानी की खपत कम हुई
  • फल और सब्जी उत्पादन बढ़ा
  • किसानों की आय में सुधार हुआ
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती आसान हुई

महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इस योजना का असर सबसे ज्यादा देखा गया है।

किन राज्यों में किसान उठा सकते हैं फायदा?

यह योजना लगभग पूरे भारत में लागू है। प्रमुख राज्य:

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • राजस्थान
  • मध्य प्रदेश
  • महाराष्ट्र
  • गुजरात
  • हरियाणा
  • पंजाब
  • कर्नाटक
  • तमिलनाडु
  • तेलंगाना
  • आंध्र प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा
  • पश्चिम बंगाल

हर राज्य में कृषि विभाग अपनी गाइडलाइन के अनुसार योजना लागू करता है।

आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

किसानों को आमतौर पर ये दस्तावेज देने होते हैं:

  • आधार कार्ड
  • पहचान पत्र
  • भूमि रिकॉर्ड
  • बैंक पासबुक
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • मोबाइल नंबर
  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
  • किसान पंजीकरण नंबर

ड्रिप इरिगेशन कैसे बदल रहा खेती का तरीका?

आज कई किसान पारंपरिक सिंचाई छोड़कर ड्रिप तकनीक अपना रहे हैं। खासकर सब्जी और बागवानी किसानों को इसका बड़ा फायदा मिल रहा है।

ड्रिप सिस्टम के जरिए:

  • खरपतवार कम उगते हैं
  • मिट्टी का कटाव कम होता है
  • पौधों को संतुलित नमी मिलती है
  • रोगों का खतरा कम होता है

छोटे किसानों के लिए कितना उपयोगी?

पहले माइक्रो इरिगेशन को महंगा माना जाता था, लेकिन सरकारी सब्सिडी के बाद छोटे किसान भी इसे अपना रहे हैं। सीमांत किसान कम जमीन में अधिक उत्पादन लेकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

जल संकट वाले क्षेत्रों में बड़ा समाधान

राजस्थान, बुंदेलखंड और मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में यह योजना किसानों के लिए राहत बनी है। कम पानी में खेती होने से सूखे का असर कम हुआ है।

क्या हैं योजना की चुनौतियां?

हालांकि योजना फायदेमंद है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं:

  • कई किसानों को जानकारी नहीं
  • कुछ क्षेत्रों में तकनीकी सहायता की कमी
  • सब्सिडी मिलने में देरी
  • छोटे किसानों के लिए शुरुआती लागत

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ाई जाए तो योजना का लाभ और ज्यादा किसानों तक पहुंच सकता है।

आधुनिक खेती की ओर बढ़ते किसान

अब किसान सिर्फ परंपरागत खेती तक सीमित नहीं रहना चाहते। वे पानी बचाने वाली तकनीकों को अपना रहे हैं। पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना इसी बदलाव का बड़ा उदाहरण बन चुकी है। कई युवा किसान मोबाइल ऐप, सेंसर और ऑटोमेटेड इरिगेशन सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। इससे खेती ज्यादा वैज्ञानिक और लाभदायक बन रही है।

भविष्य में क्या हो सकता है असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत में माइक्रो इरिगेशन का दायरा तेजी से बढ़ेगा। इससे:

  • पानी की बचत होगी
  • खाद्यान्न उत्पादन बढ़ेगा
  • किसानों की लागत घटेगी
  • जल संकट से राहत मिलेगी
  • खेती टिकाऊ बनेगी

यदि सरकार और राज्यों की मदद इसी तरह जारी रही तो आने वाले समय में “हर बूंद से ज्यादा फसल” का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

निष्कर्ष

पर ड्रॉप मोर क्रॉप योजना आज किसानों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि आधुनिक और टिकाऊ खेती का रास्ता बन चुकी है। पानी की कमी वाले दौर में यह योजना किसानों को कम पानी में ज्यादा उत्पादन का अवसर दे रही है।

ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी तकनीकें खेती को लाभकारी बना रही हैं। यदि किसान सही जानकारी और सरकारी सहायता का उपयोग करें तो वे अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ पानी की बचत में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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